पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, और ठीक इसी मौके पर सीमा पार से एक नई किस्म की चुनौती राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों के सामने आ खड़ी हुई है। सरहद के उस पार से उड़ान भरते ड्रोन अब महज जासूसी का जरिया नहीं रहे — वे नशे की खेप और घातक हथियार दोनों भारत में गिरा रहे हैं। अधिकारी इसे ड्रोन, ड्रग्स और दहशत का '3डी' खाका कह रहे हैं, और यही पैटर्न इन दिनों उनकी सबसे बड़ी सिरदर्दी बना हुआ है।
पांच साल में करीब 50 गुना उछाल
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और राज्य पुलिस के रिकॉर्ड बताते हैं कि सीमा पार से ड्रोन के सहारे ड्रग्स और हथियार पहुंचाने का सिलसिला कितनी तेजी से फैला है। वर्ष 2025 में अकेले 305 अलग-अलग घटनाओं में कुल 468 किलोग्राम नशीला पदार्थ पकड़ा गया — यह आंकड़ा पांच साल पहले के मुकाबले करीब 50 गुना ज्यादा है।
इस बढ़ोतरी को साल-दर-साल देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है। 2021 में महज 3 घटनाओं में 10 किलोग्राम नशीला पदार्थ बरामद हुआ था। इसके अगले बरस, यानी 2022 में 35 घटनाओं में 148 किलोग्राम, 2023 में 28 घटनाओं में 103 किलोग्राम और 2024 में 179 घटनाओं में 236 किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए।
मौजूदा साल में यह रफ्तार और भी आक्रामक हो चली है। जून के पहले हफ्ते तक ही पंजाब पुलिस 516 किलोग्राम हेरोइन पकड़ चुकी थी — यानी पूरे 2025 में जब्त हेरोइन से भी ज्यादा। नशे के अलावा इस दौरान पुलिस के हाथ 122 हथियार लगे, जिनमें एक ग्रेनेड भी शामिल है, साथ ही 909 जिंदा कारतूस और 139 ड्रोन भी बरामद हुए। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि भारत में तस्करी कर लाई जा रही करीब 58 प्रतिशत हेरोइन अब पंजाब के रास्ते ही देश में दाखिल हो रही है।
विदेशी हथियार और स्थानीय कड़ियां
एजेंसियों की परेशानी सिर्फ नशे तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान की ओर से भेजे जा रहे अत्याधुनिक विदेशी हथियार भी उन्हें बेचैन कर रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों से बरामद हुए हथियारों के तार चीन, ऑस्ट्रिया और तुर्किये की कंपनियों तक जाते पाए गए हैं।
गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सीमा पार बैठे तस्करी नेटवर्क ने पंजाब के कुछ स्थानीय लोगों को अपने जाल में फंसा लिया है। इन्हीं लोगों के जरिये हथियारों को एक ठिकाने से दूसरे ठिकाने तक पहुंचाया जा रहा है। खुफिया एजेंसियों का आकलन है कि ड्रोन से गिराई गई हेरोइन ही इन स्थानीय तस्करों को मेहनताने के तौर पर थमा दी जाती है, और बदले में वे हथियार पंजाब के आपराधिक गिरोहों तक — और कई बार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी मॉड्यूल तक — पहुंचा देते हैं।
बारामूला में पकड़ी गई तुर्किये की पिस्तौल
इस पूरे तंत्र की एक झलक 9 जून को जम्मू-कश्मीर के बारामूला में सामने आई। बारामूला पुलिस और 52 राष्ट्रीय राइफल्स ने मिलकर श्रीनगर से बारामूला की ओर जा रही एक सफेद मारुति ब्रेजा कार को रोका। तलाशी में इस गाड़ी से तुर्किये में बनी अत्याधुनिक CANIK TP9SF METE (9×19 mm) पिस्तौल बरामद हुई। खुफिया एजेंसियों को अंदेशा है कि यही हथियार पंजाब के ड्रोन रूट से होते हुए भारत में दाखिल हुआ था।
रक्षा जानकार मानते हैं कि ऐसे हथियारों का मकसद देश के भीतर अस्थिरता फैलाना है। सुरक्षा विश्लेषक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के. सिंह के मुताबिक, बीते महीनों में जालंधर और अमृतसर के सेना तथा बीएसएफ ठिकानों के आसपास घटी घटनाओं और चंडीगढ़ में एक पार्टी के दफ्तर पर हुए हमले में इसी किस्म के हथियारों के इस्तेमाल की आशंका है।
पाकिस्तान ने बदला तस्करी का तरीका
क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों के विश्लेषण से एक अहम बात उभरकर आई है — पाकिस्तान ने ड्रोन तस्करी का अपना तरीका ही बदल डाला है। पहले तस्कर चीन में बने उन कृषि ड्रोन का सहारा लेते थे, जो आम तौर पर खेतों में कीटनाशक छिड़कने के काम आते हैं। DJI Mavic 3 जैसे ये ड्रोन ज्यादा से ज्यादा करीब आधा किलोग्राम वजन ही उठा पाते थे और इनकी उड़ान की सीमा भी सीमित थी।
लेकिन अब तस्कर खास तौर पर तैयार किए गए उन्नत क्वाडकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो 5 से 10 किलोग्राम तक का बोझ ढो सकते हैं। ये ड्रोन कहीं ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं और बेहद कम आवाज करते हैं, जिससे सीमा सुरक्षा बलों के लिए इन्हें न तो आसानी से देखा जा सकता है और न ही सुना जा सकता है।
इतना ही नहीं, पकड़े जाने या जमीन पर उतरने की हालत में ये ड्रोन अपने जीपीएस और उड़ान से जुड़े सारे आंकड़े खुद ही मिटा देते हैं। नतीजतन जांच एजेंसियों के लिए यह सुराग जुटाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि आखिर ड्रोन ने पाकिस्तान के किस इलाके से उड़ान भरी थी।
सैटेलाइट इंटरनेट बना सबसे बड़ी चुनौती
अब एजेंसियों के सामने सबसे टेढ़ी गुत्थी सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाएं बन गई हैं। अब तक एंटी-ड्रोन तकनीक मुख्य रूप से रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) को जाम करके ड्रोन और उसके ऑपरेटर के बीच का संपर्क काटने पर टिकी थी। मगर सैटेलाइट इंटरनेट से चलने वाले ड्रोन इस तरकीब को काफी हद तक बेअसर कर देते हैं।
इस तकनीकी बदलाव का इशारा 24 मई को फिरोजपुर में हुई एक बड़ी कार्रवाई में मिला। पंजाब पुलिस ने चार लोगों को धरकर उनके पास से 28.12 किलोग्राम हेरोइन और 9.5 लाख रुपये नकद बरामद किए। शुरुआती पड़ताल में सामने आया कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों से एन्क्रिप्टेड सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क के जरिये रियल टाइम में निर्देश ले रहे थे।
यही वजह है कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब अपनी रणनीति में फेरबदल कर रही हैं और नई तकनीकों के सहारे इस खतरे से निपटने की तैयारी में जुटी हैं, ताकि पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सरहद पार से चल रही ड्रोन तस्करी पर लगाम कसी जा सके।













