पंजाब पुलिस ने कुछ ही दिनों के अंतराल में दो अलग-अलग हथियार तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा किया है। एक मामला अमृतसर से जुड़ा है, जहां ग्रेनेड और असॉल्ट राइफल जैसे घातक हथियार बरामद हुए, तो दूसरे मामले में पार्सल डिलीवरी की आड़ में सीधे ग्राहकों के घर तक पिस्तौलें पहुंचाई जा रही थीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों को साथ रखकर देखें तो साफ पता चलता है कि अवैध हथियार राज्य में कितने अलग-अलग तरीकों से पहुंच रहे हैं, एक तरफ सैन्य स्तर के हथियारों की बड़ी खेप है तो दूसरी तरफ आम कूरियर जैसा दिखने वाला डिलीवरी रैकेट।
अमृतसर में ग्रेनेड और AK-47 के साथ तीन गिरफ्तार
पहले मामले में अमृतसर ग्रामीण पुलिस ने हथियार और विस्फोटक तस्करी करने वाले एक गैर-कानूनी गिरोह पर शिकंजा कसते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से एक हैंड ग्रेनेड, एक AK-47 राइफल, एक मॉडिफाइड M4-टाइप.30-बोर ऑटोमैटिक हथियार, एक खास तरीके से मॉडिफाइड किया गया.30-बोर सेमी-ऑटोमैटिक हथियार और पांच मैगजीन बरामद कीं। हैंड ग्रेनेड से लेकर असॉल्ट राइफल तक इतनी विविधता वाली बरामदगी ने पुलिस को भी सतर्क कर दिया है और अब यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि आखिर इन हथियारों की सप्लाई कहां से हो रही थी और ये किसके लिए मंगाए गए थे।
घरिंडा पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है, ये वही दोनों कानून हैं जो हथियार और विस्फोटक सामग्री एक साथ बरामद होने पर आमतौर पर लगाए जाते हैं। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि बरामद हथियार कहां से लाए गए, इनका इस्तेमाल किस मकसद से किया जाना था और इस तस्करी की चेन से और कौन-कौन जुड़ा है, क्योंकि इतने बड़े जखीरे के पीछे सिर्फ तीन लोगों का हाथ होना मुश्किल लगता है।
डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गौरव यादव ने दी जानकारी
डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस गौरव यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमृतसर के भैनी राजपूतान निवासी आकाशबीर सिंह उर्फ काशी, अमृतसर के बालागन निवासी जोबन सिंह और एक नाबालिग के तौर पर हुई है, जिसकी पहचान उजागर नहीं की गई है। यादव ने साफ किया कि बरामद हथियारों का स्रोत पता लगाने, इनके इस्तेमाल का असली मकसद जानने, आरोपियों से जुड़े बाकी लोगों की पहचान करने और पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए जांच लगातार जारी रहेगी।
पार्सल डिलीवरी की आड़ में घर तक पहुंचाई जा रही थीं पिस्तौलें
इसी बीच पंजाब पुलिस ने एक और अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पार्सल डिलीवरी करने वाले कर्मचारी की तरह बनकर ग्राहकों के घर तक अवैध हथियार पहुंचाता था, ताकि रिहायशी इलाकों में किसी को शक न हो। पुलिस ने इस गिरोह से मध्य प्रदेश से लाई गई 15 अवैध पिस्तौलें और 30 जिंदा कारतूस बरामद किए और 20 से 22 साल की उम्र के चार युवकों को गिरफ्तार किया। सूत्रों के मुताबिक यह गिरोह मध्य प्रदेश से सस्ते दामों पर हथियार खरीदता था और फिर उन्हें पंजाब में गैंगस्टरों को ऊंची कीमत पर बेच देता था, यानी यह गिरोह दोनों राज्यों के बीच एक तरह की हथियार सप्लाई चेन की तरह काम कर रहा था।
पुलिस का दावा है कि आरोपी जेल में बंद गैंगस्टर सोनू खत्री के सीधे संपर्क में थे और राज्य में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। जब्त किए गए हथियार खासतौर पर सोनू खत्री गिरोह के सदस्यों के लिए ही मंगाए गए थे, और इस गिरोह के खिलाफ पहले से ही हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती, अपहरण और लूटपाट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिससे यह बरामदगी जांच एजेंसियों के लिए और भी अहम हो जाती है।
चारों आरोपी कॉलेज ड्रॉपआउट, जल्दी पैसा कमाने की चाहत में हथियारों के धंधे में उतरे
पुलिस के मुताबिक चारों गिरफ्तार आरोपी कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ चुके ड्रॉपआउट हैं और किसी आपराधिक पृष्ठभूमि की बजाय कथित तौर पर जल्दी पैसा कमाने के लालच में अवैध हथियारों की सप्लाई के धंधे में उतर गए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान होशियारपुर के गढ़दीवाला निवासी विशाल (20), उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी सुभाष, होशियारपुर के टल्ला निवासी जिंदर उर्फ सागर (21) और जालंधर के भार्गव कैंप निवासी बादल (20) के रूप में हुई है।











