पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच वाहनों पर लगने वाले टैक्स को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पंजाब के रोपड़ ज़िले की ज़िला परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत अब हिमाचल प्रदेश से पंजाब की सीमा में प्रवेश करने वाली सभी गाड़ियों पर एंट्री टैक्स लगाया जाएगा। इस फैसले को मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी वाहनों पर लगाए गए टोल टैक्स के सीधे जवाब के रूप में देखा जा रहा है। रोपड़ में पारित हुए इस नए प्रस्ताव के बाद हिमाचल प्रदेश प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वे एक ओर बातचीत के ज़रिए इस मुद्दे को सुलझाने की वकालत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर एक ज़िला स्तरीय निकाय द्वारा अंतर-राज्यीय कर लगाने के कानूनी अधिकार पर भी गंभीर सवाल उठा रहे हैं। यह बढ़ता विवाद पंजाब और पहाड़ी राज्य को जोड़ने वाले व्यस्त सीमा मार्गों पर परिवहन और राजस्व संग्रह की व्यापक चुनौतियों को उजागर करता है।
सीमा विवाद की जड़ और टोल की कहानी
इस विवाद की शुरुआत हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार के एक पूर्व फैसले से हुई थी। राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कीरतपुर-मनाली नेशनल हाईवे पर स्थित स्टेट टोल प्लाज़ा पर एंट्री टैक्स में भारी वृद्धि कर दी थी। यह मार्ग पंजाब और अन्य मैदानी इलाकों से पहाड़ों की ओर जाने वाले पर्यटकों और व्यावसायिक वाहनों द्वारा सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाता है। टोल दरों में हुई इस अचानक और भारी बढ़ोतरी के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और ट्रांसपोर्टरों ने इसका कड़ा विरोध किया। भारी विवाद और चौतरफा दबाव के बाद, हिमाचल सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े और अंततः टैक्स को घटाकर 100 रुपये कर दिया गया। लेकिन इस शुरुआती बढ़ोतरी ने पंजाब में खासी नाराज़गी पैदा कर दी थी। उसी समय से पंजाब में भी हिमाचल की गाड़ियों से इसी तर्ज़ पर एंट्री फीस वसूलने की मांग उठने लगी थी, जिसका नतीजा अब रोपड़ ज़िला परिषद के हालिया प्रस्ताव के रूप में सामने आया है।
आपसी सौहार्द और बातचीत की अपील
रोपड़ में हुए इस ताज़ा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, हिमाचल प्रदेश सरकार ने शांतिपूर्ण समाधान की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। राज्य के राजस्व और बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यह दो पड़ोसी राज्यों के बीच का सीधा मामला है और इसे आपसी सौहार्द और द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि रोपड़ ज़िला परिषद ने आखिर किन कारणों से यह अचानक फैसला लिया है और अब इस शांत हो चुके मुद्दे को दोबारा क्यों उछाला जा रहा है। जगत सिंह नेगी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि हिमाचल में वर्तमान सरकार के सत्ता में आने से पहले दोनों राज्यों के बीच सीमा कर को लेकर कभी कोई विवाद नहीं रहा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े कई ऐसे गहरे तथ्य और पेचीदगियां हैं, जो अभी तक पूरी तरह से जनता के सामने नहीं आ पाए हैं।
ज़िला परिषद के कानूनी अधिकार पर उठे सवाल
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, पंजाब के इस ज़िले द्वारा उठाए गए कदम की तकनीकी वैधता को भी चुनौती दी गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि क्या किसी ज़िला परिषद के पास अंतर-राज्यीय एंट्री टैक्स लगाने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार है भी या नहीं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे के भीतर, इस तरह का कर लगाने का अधिकार केवल राज्य सरकार या नगर निगमों के पास ही सुरक्षित है, न कि किसी ग्रामीण ज़िला परिषद के पास। इसके साथ ही, नरेश चौहान ने हिमाचल की अपनी कर प्रणाली को भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पहाड़ी राज्य में लिया जाने वाला टोल या एंट्री टैक्स कोई नया नियम नहीं है और इसे किसी एक विशेष राज्य के वाहनों को निशाना बनाकर लागू नहीं किया गया है। उन्होंने आलोचकों को याद दिलाया कि हिमाचल सरकार ने लोगों की सुविधा को देखते हुए पहले ही बढ़ी हुई कर दरों को कम कर दिया था और यहां तक कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आसान आवाजाही के लिए एक विशेष पास व्यवस्था भी लागू की थी। इसके बावजूद, उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि आवश्यकता हुई, तो हिमाचल सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए पंजाब सरकार के साथ फिर से औपचारिक बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रोपड़ में टैक्स लागू करने की तेज़ तैयारी
हिमाचल के अधिकारियों द्वारा व्यक्त की गई आपत्तियों और कानूनी सवालों के बावजूद, रोपड़ का प्रशासन अपने इस जवाबी कदम को ज़मीन पर उतारने के लिए दृढ़ संकल्पित नज़र आ रहा है। रोपड़ ज़िला परिषद की पहली आधिकारिक बैठक के तुरंत बाद, स्थानीय विधायक दिनेश चड्ढा ने नए एंट्री टैक्स को लागू करने की सार्वजनिक घोषणा कर दी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि हिमाचल प्रदेश से पंजाब की सीमा में आने वाले वाहनों पर यह नया शुल्क पूरी तरह से हिमाचल सरकार द्वारा अपनाई गई कर संरचना की तर्ज़ पर ही वसूला जाएगा। अपने इस कदम का बचाव करते हुए, दिनेश चड्ढा ने तर्क दिया कि इस नए टैक्स से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग विशेष रूप से क्षेत्रीय सड़क अवसंरचना को उन्नत करने और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। योजना के तेज़ कार्यान्वयन की रूपरेखा बताते हुए, विधायक ने खुलासा किया कि टैक्स वसूलने की प्रशासनिक तैयारियां ज़ोरों पर शुरू हो चुकी हैं। संबंधित अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियां और ड्यूटी सौंप दी गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि बहुत जल्द ही ज़मीनी स्तर पर यह एंट्री टैक्स वसूली प्रणाली पूरी तरह से काम करना शुरू कर देगी।




















