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पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने उठाई SIR पर उंगली, बोले- तीन देशों में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद भी नागरिकता साबित करने की क्यों पड़ी जरूरतपंजाब
23 अग॰ 2026, 7:31 pm (1 घंटे पहले)· 2

पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने उठाई SIR पर उंगली, बोले- तीन देशों में देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद भी नागरिकता साबित करने की क्यों पड़ी जरूरत

भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने पंजाब में चल रही वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब विदेशी धरती पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति को नागरिकता के सबूत देने पड़ रहे हैं, तो आम नागरिकों की मुश्किलें कितनी बढ़ सकती हैं।

चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों को अपडेट और सत्यापित करने के लिए चलाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया इन दिनों गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। इस पूरी व्यवस्था को लेकर भारत के पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है और कई तीखे सवाल पूछे हैं। उन्होंने पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान खुद को हुई परेशानियों को विस्तार से साझा करते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया है।

नवदीप सूरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र जैसे देशों में भारत के राजदूत की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके साथ ही वह ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अपनी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्होंने बताया कि जब एक जिम्मेदार और देश के लिए शीर्ष पदों पर काम कर चुके व्यक्ति को ऐसे हालातों का सामना करना पड़ रहा है, तो आम जनता की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

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वोटर आईडी और आधार कार्ड देने के बाद भी कागजों की मांग

सूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए अपनी आपबीती सुनाई है। उन्होंने बताया कि वह SIR प्रक्रिया के तहत अपने इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO के पास गए थे। वहां उन्होंने अपनी पहचान के पुख्ता प्रमाण के तौर पर अपना वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड जमा करवा दिया था। उस वक्त उन्हें यह आश्वस्त किया गया था कि उनके द्वारा दिए गए सभी दस्तावेज और जानकारियां पूरी तरह सही हैं।

लेकिन कुछ समय बीतने के बाद उन्हें एक वॉलंटियर की तरफ से संदेश मिला कि उनके कुछ विवरण साल 2003 की पुरानी मतदाता सूची के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं। इस विसंगति के सामने आने के बाद उन्होंने तुरंत दोबारा BLO से संपर्क साधा। उन्हें इसके बाद नोटिस लेने के लिए फिर से बुलाया गया और ऐसे अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया गया, जिससे उनकी भारतीय नागरिकता प्रमाणित हो सके।

तीन देशों में देश का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद नागरिकता पर सवाल

अधिकारियों के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए सूरी ने बताया कि उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2003 के दौरान वह देश में मौजूद ही नहीं थे, क्योंकि वह आधिकारिक तौर पर विदेश में तैनात थे। इसके बाद अधिकारियों ने उन्हें नागरिकता के पक्के सबूत के तौर पर अपना पासपोर्ट पेश करने के लिए कहा। हालांकि उनके पास वोटर आईडी और आधार के अलावा अन्य दस्तावेज भी मौजूद थे, जिसकी वजह से वह अपनी बात साबित करने में सफल रहे, लेकिन मूल समस्या प्रक्रिया की जटिलता को लेकर है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि अगर एक ऐसा व्यक्ति, जिसने यूएई, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया जैसे तीन प्रमुख देशों में भारत का आधिकारिक प्रतिनिधित्व किया हो, उसे भी अपनी ही नागरिकता साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो उस आम नागरिक का क्या हाल होगा जिसके पास सीमित संसाधन और दस्तावेज हैं। पूर्व राजदूत के इन सवालों ने SIR प्रक्रिया के दौरान पुराने वोटर रिकॉर्ड के मिलान को लेकर चल रही बहस को और अधिक गर्मा दिया है।

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया

बता दें कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR चुनाव आयोग की एक व्यापक प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची का संशोधन और सत्यापन किया जाता है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को पूरी तरह अपडेट करना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र मतदाताओं के नाम ही सूची में शामिल रहें।

यह विशेष प्रक्रिया सबसे पहले जून 2025 में बिहार राज्य में शुरू की गई थी। उस दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में ऐसे नाम हटाए गए थे, जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई थी या जो मतदाता अब इस दुनिया में नहीं रहे थे। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले मतदाता रिकॉर्ड को छांटने और हटाने की इसी तरह की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था।

इस पूरी प्रक्रिया के तहत उन सभी मतदाताओं से अतिरिक्त कागजात मांगे जाते हैं, जिनके नाम साल 2002 या 2003 के पुराने चुनावी रिकॉर्ड में आसानी से नहीं मिलते हैं। ऐसे मतदाताओं को अपने पुराने पारिवारिक इतिहास या फिर पुख्ता दस्तावेजी साक्ष्यों के जरिए अपना संबंध स्थापित करने की अनिवार्यता का सामना करना पड़ता है।

सवाल-जवाब

नवदीप सूरी कौन हैं?
नवदीप सूरी भारत के पूर्व राजदूत और उच्चायुक्त रहे हैं, जिन्होंने यूएई, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया में देश का प्रतिनिधित्व किया है।
नवदीप सूरी ने किस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं?
उन्होंने चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट के सत्यापन के लिए चलाई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
सूरी को किस वर्ष के रिकॉर्ड से मिलान न होने की समस्या आई?
उन्हें वर्ष 2003 की पुरानी मतदाता सूची के रिकॉर्ड से विवरण मेल न खाने की बात बताई गई थी।
SIR प्रक्रिया सबसे पहले किस राज्य में शुरू हुई थी?
यह प्रक्रिया सबसे पहले जून 2025 में बिहार राज्य में शुरू की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 मिनट पहले

निर्वाचन आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के तहत 2003 की मतदाता सूची से मिलान की अनिवार्यता ने प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक पूर्व राजनयिक का यह मामला दिखाता है कि यदि ऐतिहासिक दस्तावेजों या पुरानी सूचियों में विसंगति हो, तो सिस्टम कितनी जटिलता पैदा कर सकता है। इससे यह आशंका बलवती होती है कि कानूनी और प्रशासनिक साक्षरता की कमी वाले आम नागरिकों को अपनी नागरिकता या मताधिकार साबित करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

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