पंजाब के भीतर महज 140 किलोमीटर के फासले पर स्थित दो अलग-अलग निजी शिक्षण संस्थान लगातार दो रातों तक गंभीर हिंसा, तोड़फोड़ और अफवाहों की चपेट में रहे। एक तरफ राजपुरा के पास स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में हॉस्टल के कमरों को लेकर भूत और छात्राओं के गायब होने की झूठी बातें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही थीं, तो दूसरी तरफ फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी यानी LPU में एक छात्रा के साथ कथित यौन अपराध और उसके बाद आत्महत्या की अफवाहों ने हजारों छात्रों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।
इन दोनों ही परिसरों में उपजा तनाव छात्राओं की सुरक्षा को लेकर उठने वाली चिंताओं और सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के तैरते हुए दावों से शुरू हुआ था। देखते ही देखते मामूली बातें उग्र विरोध प्रदर्शन, भारी पुलिस बल की तैनाती, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और सीधी हिंसा तक जा पहुंचीं। हालांकि पंजाब पुलिस के स्पेशल डीजीपी परवीन सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि इन दोनों विश्वविद्यालयों में सामने आए घटनाक्रमों के बीच फिलहाल किसी भी तरह का कोई आपसी संबंध नहीं पाया गया है।
चितकारा यूनिवर्सिटी में भूत और गायब छात्राओं का भ्रम
चितकारा यूनिवर्सिटी के भीतर अफवाहों और डर का यह पूरा दौर 23 सितंबर से शुरू हुआ था। पुलिस के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हॉस्टल परिसर में कुछ छात्राओं ने कथित तौर पर अपने स्पीकर के माध्यम से कुछ डरावनी आवाजें चला दी थीं। इस गतिविधि के बाद हॉस्टल के वार्डन ने तुरंत कमरों की तलाशी ली, लेकिन उन्हें वहां ऐसी कोई भी असामान्य बात नहीं मिली जिससे किसी भी प्रकार की अलौकिक घटना की पुष्टि हो सके।
इसके बाद हॉस्टल के भूतहा होने की तमाम कहानियां सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स पर अपने आप गढ़ ली गईं। यह दावा किया जाने लगा कि कुछ साल पहले आत्महत्या करने वाली एक छात्रा की आत्मा की वजह से पूरे हॉस्टल पर भूत का साया मंडरा रहा है। पुलिस ने बाद में इन तमाम दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें केवल कोरी अफवाह बताया।
अगले दिन यानी 24 सितंबर को कैंपस के भीतर एक एंबुलेंस और एक पुजारी के अचानक पहुंचने की वजह से इन अफवाहों को और अधिक बल मिल गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन की तरफ से स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया गया कि वह एंबुलेंस दोपहर करीब 2:50 बजे एक छात्रा को अस्पताल से वापस हॉस्टल लाने के लिए आई थी, जबकि वह पुजारी दोपहर करीब 3 बजे केवल अपनी बेटी से मिलने के सिलसिले में वहां पहुंचे थे। यूनिवर्सिटी के अनुसार, इन दोनों ही अलग-अलग घटनाओं का किसी की मौत या आत्महत्या से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था, लेकिन तब तक सोशल मीडिया पर पूरी कहानी एक नया और डरावना रूप ले चुकी थी।
लापता छात्राओं के नाम पर बढ़ता गया तनाव
तारीख 25 सितंबर की रात को बड़ी संख्या में छात्र अचानक यूनिवर्सिटी कैंपस मेंजमा होने लगे। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने यह दावा करना शुरू कर दिया कि हॉस्टल से कई छात्राएं लापता हो चुकी हैं और उनके साथ कोई बड़ी अनहोनी घटित हुई है। पुलिस के मुताबिक, जब उन प्रदर्शनकारियों से कथित तौर पर गायब हुई छात्राओं के बारे में ठोस जानकारी मांगी गई, तो वे कोई भी नाम, फोटो, रोल नंबर या अन्य पहचान संबंधी ब्योरा मुहैया नहीं करा सके। पुलिस का कहना था कि किसी भी छात्रा के लापता होने या घायल होने की कोई आधिकारिक सूचना उन्हें नहीं मिली थी।
इन सब के बावजूद कैंपस के भीतर तनाव लगातार बढ़ता ही चला गया और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस की कई टुकड़ियों को तुरंत मौके पर पहुंचना पड़ा। जब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो पुलिस के वाहनों को निशाना बनाया गया और परिसर की संपत्ति को बुरी तरह तोड़ा गया। एक पुलिस अधिकारी के साथ कथित तौर पर हाथापाई की वारदात भी सामने आई, जिससे यह साफ हो गया कि सोशल मीडिया पर जन्मा डर किस तरह कुछ ही घंटों में जमीन पर एक खौफनाक और हिंसक रूप अख्तियार कर चुका था।
LPU में यौन उत्पीड़न की अफवाहों का बवंडर
चितकारा यूनिवर्सिटी की घटना के ठीक अगले दिन फगवाड़ा स्थित LPU के छात्रों का गुस्सा भी इसी तरह सड़क पर फूट पड़ा। इस संस्थान में पूरा विवाद कथित तौर पर एक छात्रा के साथ हुए यौन उत्पीड़न की खबर से जुड़ा हुआ था। छात्रों के बीच तेजी से यह बात फैली कि लड़कियों के हॉस्टल के अंदर बाहर से आए किसी व्यक्ति ने एक छात्रा के साथ यौन अपराध किया है। इस आरोपी को लेकर भी अलग-अलग तरह के दावे किए जा रहे थे, जिसमें किसी ने उसे पेंटर, किसी ने प्लंबर तो किसी ने निर्माण कार्य से जुड़ा हुआ मजदूर बताया।
कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि कथित पीड़ित छात्रा बाद में अपने घर चली गई थी और वहां उसकी मौत हो गई। हालांकि, पुलिस और प्रशासन ने साफ किया कि इन तमाम दावों की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से कोई पुष्टि नहीं हो पाई है।
यह मामला इसलिए और अधिक संवेदनशील हो गया क्योंकि छात्रों की तरफ से मिली शिकायत के आधार पर पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ औपचारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली। इस पूरे मामले की तह तक जाने और सच्चाई का पता लगाने के लिए एक एसआईटी का भी गठन किया गया। पुलिस इस समय कथित घटना के हर पहलू को खंगालने के लिए फोरेंसिक सबूतों, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल फोन के डेटा का बारीकी से विश्लेषण कर रही है।
यूनिवर्सिटी के वीडियो ने पैदा किए नए सवाल
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के प्रशासन ने सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही रेप की इन तमाम खबरों को सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत करार दिया। छात्रों के गुस्से को शांत करने और उन्हें भरोसा दिलाने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी प्रबंधन की तरफ से हॉस्टल में रहने वाले तीन छात्रों का एक वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिसमें उन छात्रों ने ऐसी किसी भी कथित घटना के होने से साफ इनकार किया था।
हालांकि, कुछ समय बाद उन्हीं छात्रों ने यह गंभीर आरोप लगा दिया कि वह वीडियो रिकॉर्ड करवाते समय उन्हें यह सिखाया गया था कि कैमरे पर क्या बोलना है। उनका यह भी दावा था कि उनकी बिना किसी अनुमति के उस वीडियो में एडिटिंग करके उसे सोशल मीडिया पर जारी किया गया था।
इस नए घटनाक्रम ने पूरे मामले को और अधिक उलझा कर रख दिया। हालांकि छात्रों के इन आरोपों से किसी भी यौन अपराध के होने की पुष्टि तो नहीं होती, लेकिन यूनिवर्सिटी द्वारा जारी किए गए उस वीडियो की प्रामाणिकता और मंशा को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े हो गए।
कैंपस से लेकर नेशनल हाईवे तक पहुंचा उग्र प्रदर्शन
LPU के भीतर शुरू हुआ छात्रों का विरोध प्रदर्शन सिर्फ यूनिवर्सिटी की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उग्र भीड़ सीधे जालंधर-फगवाड़ा हाईवे पर जा पहुंची और यातायात को पूरी तरह ठप कर दिया। इस हाईवे के जाम होने की वजह से पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की तरफ आने-जाने वाले आम यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
परिसर के भीतर तोड़फोड़ की घटनाओं के अलावा आसपास की दुकानों, निजी वाहनों और अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाए जाने की खबरें भी सामने आईं। सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए कुछ वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों को कैंपस में सजाकर रखे गए सैन्य उपकरणों और एक मिग-23 लड़ाकू विमान के ऊपर तक चढ़ते हुए देखा गया। इसके बाद एक पुलिस वाहन को आग के हवाले किए जाने की गंभीर घटना भी सामने आई।
पुलिस अधिकारियों का कहना था कि इस दौरान उनके कई जवान घायल हुए और सरकारी वाहनों को क्षति पहुंचाई गई। दूसरी तरफ, प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर बेरहमी से लाठीचार्ज करने के गंभीर आरोप लगाए। पुलिस ने इन आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले उनकी तरफ से कोई बल प्रयोग नहीं किया गया, बल्कि प्रदर्शनकारियों ने ही पुलिस बल पर पथराव शुरू कर दिया था।
दो हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों का पहरा
बिगड़ती हुई कानून-व्यवस्था और स्थिति को पूरी तरह काबू में लाने के लिए LPU परिसर में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती करनी पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 28 सितंबर तक वहां 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों के तैनात होने की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आई। जिला और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बहाल कर दी गई है। इसके साथ ही दोनों ही विश्वविद्यालयों ने अपनी अकादमिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के प्रयास तेज कर दिए हैं।





















