प्रवर्तन निदेशालय की गुवाहाटी जोनल यूनिट ने क्रिकेट सट्टेबाजी और वित्तीय धोखाधड़ी के एक बड़े नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसते हुए स्थानीय निवासी दीपेश बजोरिया को हिरासत में लिया है। यह कानूनी कार्रवाई असम समेत समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र में इंडियन प्रीमियर लीग के मुकाबलों के दौरान चलाए जाने वाले गैरकानूनी सट्टेबाजी तंत्र की व्यापक पड़ताल के सिलसिले में की गई है। संघीय जांच एजेंसी ने दीपेश बजोरिया को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 की धारा 19(1) के तहत 19 सितंबर को आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया।
असम पुलिस की एफआईआर से शुरू हुई थी जांच
केंद्रीय जांच एजेंसी का यह पूरा मामला गुवाहाटी जोनल ऑफिस द्वारा 30 मार्च 2023 को दर्ज किए गए ईसीआईआर/जीडब्ल्यूजेडओ-आई/06/2023 पर आधारित है। इस जांच की आधारशिला अक्टूबर 2021 में गुवाहाटी क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज की गई शुरुआती एफआईआर थी। इसके अतिरिक्त तिनसुकिया पुलिस और पानबाजार पुलिस थानों में दर्ज संबंधित मुकदमों को भी इस जांच का हिस्सा बनाया गया। पुलिस द्वारा दर्ज इन मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 406 और 420 के साथ असम गेम एंड बेटिंग एक्ट, 1970 के कई कड़े प्रावधान शामिल किए गए थे, जो एक सुनियोजित अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी गिरोह की गतिविधियों से जुड़े थे।
सट्टेबाजी के डिजिटल प्लेटफॉर्म और बुकी का नेटवर्क
जांच एजेंसी के अनुसार दीपेश बजोरिया इस पूरे आपराधिक नेटवर्क में मुख्य बुकी की भूमिका निभा रहा था। दांव लगाने, सट्टे के सौदे स्वीकार करने और वित्तीय लेन-देन के निपटारे के लिए उसने कई ऑनलाइन सट्टेबाजी पोर्टलों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। इन गतिविधियों के लिए विशेष रूप से www.skyexchange.com और www.winner7.io जैसी वेबसाइटों की मदद ली गई थी। इन गुप्त माध्यमों के जरिए खिलाड़ियों और मैचों पर बड़ी रकम के दांव लगवाए जाते थे और फिर फंड का आदान-प्रदान किया जाता था।
फर्म के बैंक खातों से 28 करोड़ रुपये की आवाजाही
सट्टेबाजी से अर्जित अवैध कमाई को छिपाने और उसे बैंकिंग प्रणाली में खपाने के लिए एक साझेदारी फर्म का सहारा लिया गया। मेसर्स डीआरएम कोक नामक इस फर्म में दीपेश बजोरिया खुद एक पार्टनर है। इस कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल मुख्य तौर पर सट्टेबाजी के अवैध धन को घुमाने के लिए किया जा रहा था। वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा से पता चला कि 19 अप्रैल 2022 से 15 मई 2026 के बीच इस खाते में लगभग 28.12 करोड़ रुपये जमा किए गए, जबकि करीब 28.03 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई।
छापेमारी में संपत्तियों के दस्तावेज और लग्जरी गाड़ियां जब्त
इससे पूर्व धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 17 के तहत 26 मई को बजोरिया से जुड़े ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान जांच अधिकारियों ने कई अचल संपत्तियों के कागजात और महंगी लग्जरी गाड़ियों के रिकॉर्ड बरामद किए। इसके साथ ही आरोपी के मोबाइल फोन और ईमेल खातों से जुड़ा डिजिटल डेटा भी जब्त कर उसकी क्लोनिंग की गई थी। जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी अपराध से अर्जित धन के अधिग्रहण, कब्जे, हस्तांतरण और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की साजिश में पूरी तरह लिप्त था।
अदालत ने छह दिनों की रिमांड पर सौंपा
वित्तीय लेनदेन के संबंध में आरोपी द्वारा दी गई दलीलों और बाद में एकत्र किए गए ठोस सबूतों के बीच भारी विसंगतियां पाई गईं। जांच एजेंसी अब इस अवैध पूंजी के अंतिम स्रोत, विभिन्न माध्यमों से इसके प्रवाह, उपयोग और वास्तविक लाभार्थियों का पता लगाने में जुटी है। गिरफ्तारी के पश्चात दीपेश बजोरिया को विशेष पीएमएलए अदालत के रूप में नामित गुवाहाटी की सीबीआई अदालत संख्या 3 के समक्ष पेश किया गया। अदालत ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी को छह दिनों की प्रवर्तन निदेशालय हिरासत में भेजने का आदेश दिया।


















