पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना में पुलिस बल ने एक बेहद खतरनाक साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और स्थानीय कमिश्नरेट पुलिस के एक संयुक्त सुरक्षा अभियान के दौरान खतरनाक डोनी बल्ल गिरोह के दो शूटरों को मुठभेड़ में मार गिराया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों शूटर शहर में एक बड़े हमले को अंजाम देने के इरादे से घूम रहे थे। आत्म पार्क अंडर ब्रिज के निकट हुई इस हिंसक मुठभेड़ के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने घटनास्थल से अत्याधुनिक हथियार और भारी मात्रा में कारतूस बरामद किए हैं, जिससे पता चलता है कि वे एक बड़े खून-खराबे की तैयारी में थे।
सड़क पर नाकेबंदी और मुठभेड़ का घटनाक्रम
इस बड़ी कार्रवाई को लेकर लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वपन शर्मा ने विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि मारे गए अपराधियों की पहचान करनजोत सिंह उर्फ नोना और संदीप सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से अमृतसर के सुल्तानविंड रोड के रहने वाले थे। पुलिस को पहले से ही खुफिया इनपुट मिला था कि शहर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए शूटर घूम रहे हैं। इस गुप्त सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीमों ने आत्म पार्क के पास बने अंडर ब्रिज पर नाकाबंदी कर दी। इसी बीच, काले रंग की बिना नंबर प्लेट वाली एक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर सवार होकर दो संदिग्ध लोग वहां पहुंचे।
पुलिस ने जब उन्हें रुकने का संकेत दिया, तो उन्होंने मोटरसाइकिल की गति बढ़ा दी और भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस टीम ने तुरंत उनका पीछा किया, जिसके बाद आरोपियों ने सुरक्षाकर्मियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों द्वारा चलाई गई गोलियों में से दो गोलियां सीधे पुलिस की गाड़ियों में जा लगीं, जिससे पुलिस कर्मियों की जान बाल-बाल बची। खुद को बचाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में गोलियां चलाईं, जिसमें दोनों आरोपी गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मौत हो गई। मुठभेड़ के बाद पुलिस को आरोपियों के पास से तीन आधुनिक ऑटोमेटिक पिस्तौल और लगभग 50 जिंदा कारतूस मिले हैं।
रक्तदान शिविर में नरसंहार की रची गई थी साजिश
मामले की शुरुआती जांच में सुरक्षा एजेंसियों को बेहद चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। मारे गए दोनों आरोपी कुख्यात गैंगस्टर डोनी बल्ल और शगनप्रीत के सीधे संपर्क में थे और उन्हीं के इशारे पर काम कर रहे थे। दोनों को रविवार के दिन लुधियाना के दुगरी रोड पर स्थित मैरीलैंड पैलेस में आयोजित एक रक्तदान शिविर में अंधाधुंध गोलीबारी करने का जिम्मा सौंपा गया था। अगर पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती, तो सामाजिक और मानवीय कार्य के लिए आयोजित इस शिविर में कई बेगुनाह लोगों की जान जा सकती थी। इस प्रकार, पुलिस की सूझबूझ और त्वरित एक्शन ने एक संभावित नरसंहार को होने से पहले ही टाल दिया।
आपराधिक इतिहास और आगे की कानूनी कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के विश्लेषण से पता चला है कि एनकाउंटर में मारे गए करनजोत सिंह उर्फ नोना का आपराधिक इतिहास काफी पुराना था। उसके खिलाफ पहले से ही आर्म्स एक्ट, डकैती और NDPS कानून के तहत दो गंभीर मामले दर्ज थे। वहीं दूसरे आरोपी संदीप सिंह के खिलाफ भी पहले से एक आपराधिक मामला दर्ज था। पुलिस अब डोनी बल्ल गैंग के बाकी बचे गुर्गों और उनके मददगारों का पता लगाने के लिए संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है। इस घटना के संबंध में थाना मॉडल टाउन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 109, 221, 132, 62, और 111 के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत मामला दर्ज कर आगे की तफ्तीश शुरू कर दी गई है।


















