राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और पड़ोसी देशों के संबंधों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। जयपुर स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कभी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव या युद्ध की नौबत आती है, तो भारत अपने पड़ोसी धर्म का पालन करते हुए पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। उनके इस अप्रत्याशित रुख के बाद विभिन्न हलकों में जोरदार चर्चा शुरू हो गई है।
भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के सम्मेलन में रखी बात
यह पूरा घटनाक्रम राजधानी जयपुर में स्थित भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय का है। वहां पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ की ओर से एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें प्रदेश भर से आए कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे। इसी मंच से मदन राठौड़ अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों और पड़ोसी मुल्कों के साथ भारत के रिश्तों पर अपने विचार साझा कर रहे थे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते निभाने के नैतिक सिद्धांतों पर जोर दिया और इसी क्रम में वैश्विक शक्तियों से जुड़े टकराव की एक काल्पनिक परिस्थिति का जिक्र किया।
पड़ोसी धर्म के तर्क से समझाया रुख
अपने वक्तव्य में मदन राठौड़ ने एक hypothetical यानी संभावित स्थिति का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत का भौगोलिक पड़ोसी मुल्क है और सदियों से पड़ोसियों के प्रति एक नैतिक दायित्व यानी पड़ोसी धर्म की परंपरा रही है। इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कभी युद्ध छिड़ता है, तो ऐसी विषम परिस्थिति में भारत को पड़ोसी होने के नाते पाकिस्तान का साथ निभाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे विचार को पड़ोसी धर्म की मर्यादा से जोड़कर पेश किया।
बयान के बाद राजनीतिक हलचल और नीतिगत स्थिति
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सियासी जानकार इस बात पर गौर कर रहे हैं कि एक प्रमुख राजनीतिक दल के प्रांतीय अध्यक्ष ने पारंपरिक विदेश नीति के विमर्श से हटकर बात कही है। हालांकि, कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी प्रांतीय नेता द्वारा व्यक्त किए गए ऐसे व्यक्तिगत या राजनीतिक बयानों को भारत सरकार की आधिकारिक विदेश नीति का हिस्सा नहीं माना जा सकता। भारत की वास्तविक विदेश नीति केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा व रणनीतिक हितों के अनुरूप तय होती है। फिलहाल मदन राठौड़ द्वारा पड़ोसी धर्म की दुहाई देकर पाकिस्तान के समर्थन की बात कहना प्रदेश की राजनीति में प्रमुख चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


















