पंचायतीराज चुनाव की सरगर्मियों के बीच दौसा में तैनात सरकारी कर्मचारियों के बीच चुनावी जिम्मेदारी से राहत पाने की होड़ मची हुई है। मतदान केंद्रों पर तैनाती से बचने के लिए कर्मचारी तरह-तरह की दलीलें दे रहे हैं, जिसके चलते जिला परिषद कार्यालय परिसर में आवेदकों की कतारें देखने को मिल रही हैं। हालात यह हैं कि जिला परिषद में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (ACEO) के कक्ष के बाहर से लेकर गलियारे तक कर्मचारी अपनी अर्जी लेकर खड़े हैं। कई कर्मचारी तो राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के जरिए भी ड्यूटी निरस्त कराने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके तहत मंत्रियों, विधायकों और उच्च अधिकारियों के सिफारिशी फोन भी आ रहे हैं।
त्योहार की नजदीकी और 5 दिन का लंबा प्रवास बनी मुख्य वजह
इस बार चुनाव प्रक्रिया के संचालन के लिए गठित पोलिंग पार्टियों को लगातार पांच दिनों तक मतदान केंद्रों पर डेरा डालना होगा। इसके अतिरिक्त, दिवाली का प्रमुख पर्व भी बिल्कुल नजदीक आ चुका है। ऐसे में कई कर्मचारियों को चिंता सता रही है कि पांच दिनों तक दूर-दराज के मतदान केंद्रों पर रहने से उनका पारिवारिक माहौल और त्योहारी तैयारी प्रभावित होगी। इसी असुविधा और लंबे प्रवास से बचने के लिए कर्मचारी लगातार जिला परिषद पहुंच रहे हैं और चुनावी जिम्मेदारियों से नाम हटवाने के लिए औपचारिक प्रार्थना पत्र सौंप रहे हैं।
पारिवारिक जिम्मेदारियों और बीमारी के गिनाए जा रहे बहाने
जिला परिषद में जमा किए जा रहे छूट पत्रों में कर्मचारियों ने बेहद विविध और निजी कारण दर्ज कराए हैं। कई कर्मियों ने अपनी बुजुर्ग मां अथवा पिता के गंभीर रूप से बीमार होने का हवाला दिया है, तो कुछ कर्मचारियों ने घर में अपने छोटे बेटे या बेटी की देखरेख की मजबूरी बताई है। कुछ कर्मियों का तर्क है कि वे अपने माता-पिता के इकलौते संतान हैं और उनकी नियमित देखभाल के लिए घर पर मौजूद रहना अपरिहार्य है। इसके साथ ही, एक बड़ी तादाद ऐसे कर्मचारियों की भी है जिन्होंने खुद के गंभीर रूप से अस्वस्थ होने का दावा करते हुए चुनावी दायित्व से पूरी तरह मुक्त करने की गुहार लगाई है।
फर्जी दावों को रोकने के लिए प्रशासन ने बैठाया मेडिकल बोर्ड
बड़ी संख्या में आ रहे बीमारी के आवेदनों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। दौसा की जिला कलेक्टर सौम्या झा ने इस पूरे मामले की सच्चाई परखने के लिए एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। इस मेडिकल बोर्ड का मुख्य कार्य उन सभी आवेदनों और मेडिकल दस्तावेजों की गहन चिकित्सकीय जांच करना है, जिनमें अस्वस्थता को आधार बनाकर ड्यूटी निरस्त करने की मांग की गई है। प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट किया गया है कि मात्र आवेदन दे देने भर से किसी को राहत नहीं मिलेगी, बल्कि चिकित्सकीय जांच में दावा प्रमाणित होने पर ही विचार किया जाएगा। फिलहाल परिषद कार्यालय में कर्मचारियों की आवाजाही निरंतर जारी है और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पात्र कर्मियों को आधिकारिक रूप से छूट प्रदान की जाएगी।
















