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राजस्थान के मतोड़ा में खुले बोरवेल के भीतर 605 फीट नीचे गिरा छह साल का भोमाराम, बचाने के लिए राहत कार्य तेजराजस्थान
15 अक्तू॰ 2026, 11:20 pm (2 घंटे पहले)· 0

राजस्थान के मतोड़ा में खुले बोरवेल के भीतर 605 फीट नीचे गिरा छह साल का भोमाराम, बचाने के लिए राहत कार्य तेज

राजस्थान के फलोदी जिले में खेत में मोटर निकालते समय छह वर्षीय भोमाराम बोरवेल में समा गया। करीब 605 फीट की गहराई पर फंसे इस इकलौते बेटे तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है और राहत टीमें लगातार जुटी हैं।

राजस्थान के फलोदी जिले में एक दर्दनाक हादसे के बाद छह साल के बच्चे को बचाने के लिए बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाया जा रहा है। मतोड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नोसर गांव की पूनियों की ढाणी में यह मासूम बालक खुले पड़े बोरवेल के गड्ढे में अचानक समा गया। हादसे को बीते करीब 9 घंटे से अधिक का वक्त गुजर चुका है, लेकिन जमीन के भीतर भारी गहराई होने की वजह से बच्चे को अब तक सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका है। अंदर फंसे बालक की पहचान भोमाराम के रूप में हुई है, जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान है।

गहराई में फंसा मासूम और जीवन रक्षक व्यवस्था

प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी टीमों की शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चा बोरवेल के भीतर लगभग 605 फीट की अत्यधिक गहराई पर अटका हुआ है। इतनी अधिक गहराई में हवा का दबाव और ऑक्सीजन की भारी किल्लत सबसे बड़ा संकट बनी हुई है। बचाव कर्मियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पाइपलाइन के माध्यम से गड्ढे के भीतर लगातार कृत्रिम ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू कर दी है, ताकि बच्चे को सांस लेने में किसी तरह की तकलीफ न हो। इसके साथ ही एक विशेष कैमरे को नीचे उतारकर बच्चे की हर गतिविधि, शारीरिक स्थिति और हलचल पर नजर रखी जा रही है।

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पिता के सामने हुआ हादसा

यह हृदयविदारक घटना उस वक्त घटी जब मासूम के पिता पाचाराम बोरवेल से पानी की मोटर बाहर निकालने की मशक्कत कर रहे थे। उसी दौरान पास ही खेल रहा भोमाराम अचानक खुले मुहाने की ओर चला गया और सीधे बोरवेल में गिर पड़ा। पाचाराम ने जब पीछे मुड़कर देखा तो उन्हें चंद पलों के लिए बच्चे का सिर और हाथ गड्ढे के मुहाने पर नजर आए। वे बदहवास होकर अपने बेटे को पकड़ने के लिए उसकी तरफ दौड़े, लेकिन जब तक वे हाथ बढ़ा पाते, बच्चा फिसलकर अथाह गहराई में समा चुका था। अपने इकलौते चिराग के आंखों के सामने ओझल हो जाने से पूरे परिवार में चीख-पुकार मची हुई है और माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।

वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा बल तैनात

हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव दल तत्काल हरकत में आ गए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए फलोदी के कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य काकड़े स्वयं घटनास्थल पर पहुंचे हैं। ये दोनों शीर्ष अधिकारी मौके पर रहकर चलाए जा रहे हर कदम की निगरानी कर रहे हैं। राज्य आपदा मोचन बल यानी एसडीआरएफ की टीमें बचाव तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बालक तक पहुंचने की कोशिशों में लगी हैं। जोधपुर से भी एसडीआरएफ की एक अतिरिक्त टीम को तत्काल बुलाया गया है ताकि अभियान में तेजी लाई जा सके।

घटनास्थल पर ग्रामीणों और उत्सुक लोगों की भारी भीड़ जमा होने से रोकने के लिए कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। नोसर गांव की पूनियों की ढाणी में 50 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जबकि आरएसी के जवानों को भी कानून और व्यवस्था बनाए रखने के काम में लगाया गया है। इलाके की पूरी परिधि को बैरिकेड लगाकर सील कर दिया गया है ताकि बचाव कार्य में जुटी भारी मशीनरी और विशेषज्ञ टीमों को अपने काम में किसी तरह की रुकावट का सामना न करना पड़े। गांव के तमाम लोग अपने स्तर पर बच्चे के सकुशल बाहर निकलने की प्रार्थनाएं कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

यह बोरवेल हादसा कहां और किस गांव में हुआ?
यह हादसा राजस्थान के फलोदी जिले के मतोड़ा थाना क्षेत्र स्थित नोसर गांव की पूनियों की ढाणी में हुआ।
बोरवेल में गिरे बच्चे का नाम और उम्र क्या है?
बोरवेल में फंसे बच्चे का नाम भोमाराम है और उसकी उम्र 6 साल है।
मासूम भोमाराम बोरवेल में कितनी गहराई पर फंसा हुआ है?
नवीनतम जानकारी के अनुसार बच्चा बोरवेल के भीतर करीब 605 फीट की गहराई पर अटका हुआ है।
हादसा किस समय और किस वजह से हुआ?
हादसा उस वक्त हुआ जब बच्चे के पिता पाचाराम बोरवेल से मोटर निकालने का काम कर रहे थे और बच्चा खुले गड्ढे में गिर गया।
गहराई में फंसे बच्चे की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?
बच्चे तक ऑक्सीजन की आपूर्ति लगातार पहुंचाई जा रही है और कैमरे के माध्यम से उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
बचाव कार्य की निगरानी कौन से प्रशासनिक अधिकारी कर रहे हैं?
फलोदी के कलेक्टर अंकित कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक आदित्य काकड़े मौके पर मौजूद रहकर बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं।
मौके पर कौन-सी बचाव और सुरक्षा टीमें तैनात की गई हैं?
राहत कार्य में एसडीआरएफ और जोधपुर से बुलाई गई अतिरिक्त टीम जुटी है, जबकि 50 से अधिक पुलिसकर्मी और आरएसी बल सुरक्षा संभाल रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

खुले बोरवेल की लापरवाही अब कब बंद होगी? मासूम के लिए दुआ कर रहा हूँ।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन भाई, सही कहा आपने। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी की सख्त गाइडलाइन्स के बावजूद ऐसे खुले बोरवेल हादसों को न्योता दे रहे हैं, पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

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