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आपदा राहत विभाग की समीक्षा के बाद राजस्थान के 13 जिलों की 53 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषितराजस्थान
25 अक्तू॰ 2026, 11:29 pm (1 घंटे पहले)· 2

आपदा राहत विभाग की समीक्षा के बाद राजस्थान के 13 जिलों की 53 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

कम बारिश और घटते भूजल स्तर के चलते राजस्थान सरकार ने 13 जिलों की 53 तहसीलों में अकाल की घोषणा की है, जिनमें 44 तहसीलें गंभीर सूखे का सामना कर रही हैं।

कम मानसूनी बारिश और गिरते भूजल स्तर के संकट के बीच राजस्थान के तेरह जिलों में अकाल की आधिकारिक स्थिति सामने आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा मंगाई गई विस्तृत समीक्षा के आधार पर आपदा राहत विभाग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इस प्रशासनिक आकलन के सामने आने के बाद सरकार ने राज्य के 13 जिलों की कुल 53 तहसीलों को सूखे से प्रभावित माना है। संकट की गंभीरता को देखते हुए इन सभी अकाल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से विशेष राहत अभियान संचालित किए जाएंगे।

बांसवाड़ा से लेकर जैसलमेर तक के 13 जिले शामिल

अकाल की चपेट में आए इलाकों की भौगोलिक स्थिति देखें तो पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों के साथ-साथ दक्षिणी और मध्य राजस्थान के कई हिस्से इस सूची में शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार बांसवाड़ा, बाड़मेर, बालोतरा, चूरू, डूंगरपुर, ब्यावर, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर, फलौदी, नागौर, पाली और सिरोही जिलों को सूखाग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। इन सभी प्रशासनिक क्षेत्रों में कृषि कार्यों, पशुधन के चारे और ग्रामीणों के लिए पेयजल की उपलब्धता पर गहरा असर देखा जा रहा है।

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गंभीर सूखे की मार झेल रही हैं 44 तहसीलें

आपदा राहत विभाग के व्यापक सर्वेक्षण में सूखे की तीव्रता को दो श्रेणियों में बांटा गया है। राज्य की कुल 44 तहसीलों में हालात बेहद नाजुक पाए गए हैं, जिन्हें गंभीर सूखे की श्रेणी में रखा गया है। इन गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में गढ़ी, अर्थूना, गडरारोड़, चौहटन, बाड़मेर, बायतू, सैड़वा, रामसर, शिव, धनाऊ और बाड़मेर (ग्रामीण) शामिल हैं। इसके अलावा बालोतरा जिले की गुढ़ामालानी, कल्याणपुर, पचपदरा और चूरू जिले की राजगढ़ तहसील भी गंभीर सूखे से जूझ रही है।

डूंगरपुर जिले के आसपुर, गलियाकोट, झौथरीपाल और सागवाड़ा इलाके भी इसी गंभीर श्रेणी में आते हैं। मरुस्थलीय जिले जैसलमेर की फतेहगढ़, भणियाना, सम और रामगढ़ तहसीलों में पानी का भारी संकट बना हुआ है। जालौर जिले के अंतर्गत आने वाली आहोर, चितलवाना, जसवंतपुरा, बागौड़ा, भीनमाल, रानीवाड़ा, सांचौर, सायला और भाद्राजून तहसीलों को भी अति-संवेदनशील पाया गया है। जोधपुर जिले की ओसियां, तिवरी, बालेसर, बावड़ी, शेरगढ़ और शेखाला तहसीलें गंभीर रूप से त्रस्त हैं। फलौदी जिले में फलौदी, बाप, बापिणी और आऊ तहसीलें जबकि पाली जिले की सुमेरपुर और सिरोही जिले की शिवगंज तहसील भी गंभीर सूखे के दायरे में हैं।

मध्यम सूखे के दायरे में आई 9 तहसीलें

विभाग के आकलन में नौ तहसीलों को मध्यम सूखे की श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में हालात गंभीर सूखे जितने विकट नहीं हैं, लेकिन कृषि उपज और जल संसाधनों पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। मध्यम श्रेणी वाली तहसीलों में बांसवाड़ा जिले की सज्जनगढ़ तहसील शामिल है। डूंगरपुर जिले की सीमलवाड़ा, पालदेवल और ओबरी तहसीलें भी इस सूची में रखी गई हैं। इसके अतिरिक्त ब्यावर जिले की रायपुर, जैसलमेर जिले की जैसलमेर तहसील, जोधपुर की पीपाड़शहर, फलौदी की सेतरावा और नागौर जिले की खींवसर तहसील को मध्यम स्तर के सूखे से प्रभावित माना गया है।

सूखा घोषित करने के प्रमुख आधार

प्रशासनिक अधिकारियों ने इस फैसले के पीछे कई वैज्ञानिक और जमीनी कारणों को स्पष्ट किया है। केंद्र सरकार के ड्रॉट मॉनिटरिंग पोर्टल से प्राप्त तकनीकी आंकड़ों, उपग्रह चित्रों और मौसमी रिकॉर्ड की गहन जांच की गई। तय मानकों के अनुसार मानसून के दौरान सामान्य से काफी कम वर्षा का दर्ज होना इसका मुख्य कारण बना। इसके कारण सतही जलाशयों में पानी का भंडारण सीमित रह गया और भूजल के दोहन से भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट आई। खेतों में खड़ी फसलों के सूखने और पैदावार की बदहाल स्थिति को देखते हुए राज्य आपदा राहत तंत्र ने इन 53 तहसीलों में राहत कार्य शुरू करने की सिफारिश की। इससे पूर्व सितंबर महीने में महाराष्ट्र में भी देवेंद्र फडणवीस प्रशासन द्वारा राज्य के 265 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था, जिससे राज्य का 75 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ था।

सवाल-जवाब

राजस्थान के कितने जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है?
राजस्थान सरकार ने राज्य के 13 जिलों की 53 तहसीलों को अकाल प्रभावित घोषित किया है।
सूखे से प्रभावित कुल 53 तहसीलों में से कितनी गंभीर श्रेणी में हैं?
कुल 53 तहसीलों में से 44 तहसीलों को गंभीर सूखे और 9 तहसीलों को मध्यम सूखे की श्रेणी में रखा गया है।
किन-किन प्रमुख जिलों को इस सूची में शामिल किया गया है?
इसमें बाड़मेर, जालौर, जोधपुर, जैसलमेर, डूंगरपुर, फलौदी, बांसवाड़ा, बालोतरा, ब्यावर, चूरू, नागौर, पाली और सिरोही जिले शामिल हैं।
किन मुख्य आधारों पर तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया?
बारिश की भारी कमी, सतही और भूजल स्तर में गिरावट, फसलों के नुकसान और केंद्र के ड्रॉट मॉनिटरिंग पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर यह फैसला हुआ।
सूखा घोषित होने के बाद सरकार इन इलाकों में क्या कदम उठाएगी?
प्रभावित 13 जिलों में अकाल राहत के तहत विशेष अभियान चलाए जाएंगे, जिनमें पेयजल और मवेशियों के चारे का प्रबंध शामिल है।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·12 मिनट पहले

बांसवाड़ा से जैसलमेर तक पानी का संकट बहुत डरावना है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·31 मिनट पहले

राजस्थान में बारिश न होने से किसानों की हालत सचमुच बहुत खराब हो गई है। 53 तहसीलों में अकाल घोषित होना बड़ी बात है, सरकार को तुरंत ज़मीनी स्तर पर मदद पहुंचानी चाहिए वरना पशुओं और पीने के पानी का संकट और गहरा जाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·31 मिनट पहले

अर्जुन, जैसलमेर की सम और रामगढ़ जैसी जगहों पर पानी का संकट पहले से ही रहता है, अब अकाल की घोषणा से हालात और भी ज्यादा डरावने हो गए हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·53 मिनट पहले

बाड़मेर और जैसलमेर के इतने सारे इलाकों में गंभीर सूखा। पानी का संकट गहराया तो गांवों से पलायन रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·52 मिनट पहले

करण भाई, पलायन रोकना तो दूर की बात है, सरकार के पास इन 53 तहसीलों के पशुओं के लिए चारे की कोई ठोस तैयारी है भी या नहीं?

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