राजस्थान के जालोर और सिरोही जिलों की सीमा पर स्थित वराडा हनुमानजी का यह पावन स्थल अपनी गहरी धार्मिक मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इस मंदिर के इतिहास के तार सीधे महाभारत काल से जुड़े हुए बताए जाते हैं। क्षेत्र के लोगों का ऐसा पक्का विश्वास है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के कठिन समय के दौरान यहां कदम रखे थे और संकटमोचन हनुमानजी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी पौराणिक प्रसंग के कारण इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता बहुत अधिक बढ़ जाती है और भक्त यहां पूरी श्रद्धा के साथ माथा टेकने आते हैं।
स्वयंभू प्रतिमा और शनिदेव का अनोखा स्वरूप
इस पवित्र मंदिर में स्थापित हनुमानजी की मूर्ति को लेकर भक्तों में यह मान्यता है कि यह प्रतिमा मनुष्य द्वारा नहीं बनाई गई है, बल्कि यह स्वयंभू रूप से प्रकट हुई है। मूर्ति का विशाल आकार और भव्य रूप हर आने वाले श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बजरंगबली के एक पैर के नीचे शनिदेव विराजमान हैं। हनुमानजी और शनिदेव के इस दुर्लभ और अनोखे स्वरूप के दर्शन करने के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं।
वाहन चालकों की अनोखी आस्था और परंपरा
वराडा हनुमानजी मंदिर मुख्य सड़क मार्ग पर ही बना हुआ है, इसलिए यहां से आने-जाने वाले लोगों की लंबी आवाजाही रहती है। इस रास्ते से गुजरने वाले तमाम वाहन चालक मंदिर के सामने से निकलते वक्त अपने वाहनों का हॉर्न बजाकर और हाथ जोड़कर आगे बढ़ना बेहद शुभ मानते हैं। यहां तक कि इस मार्ग से निकलने वाली रोडवेज बसें भी मंदिर के सामने पहुंचते ही हॉर्न बजाती हैं। यात्रियों और चालकों के लिए यह स्थान सिर्फ रास्ते का एक सामान्य मंदिर नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण यात्रा के दौरान आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर और दीवारों पर रामायण
वराडा हनुमानजी के मुख्य मंदिर के विशाल परिसर के भीतर कई अन्य देवी-देवताओं के छोटे-बड़े मंदिर भी बने हुए हैं। इनमें सुंधा माता, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम दरबार, शनिदेव और वीर भगवान के मंदिर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा परिसर के पास ही एक कुंवारी कन्या का मंदिर होने की बात भी कही जाती है। इन तमाम मंदिरों के साथ ही इस पूरे परिसर की दीवारों पर संपूर्ण रामायण का बहुत सुंदर चित्रण किया गया है, जो यहां आने वाले लोगों को आकर्षित करता है।
चमत्कारी पत्थर और बंदरों की मौजूदगी
इस धार्मिक स्थल से एक खास पत्थर से जुड़ी मान्यता भी काफी प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर परिसर का यह विशेष पत्थर हर कोई नहीं उठा सकता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि केवल वही व्यक्ति इस पत्थर को उठाने में सफल होता है जिसने कभी अपने जीवन में कोई बुरा काम न किया हो। इसके अलावा, मंदिर के आस-पास भारी संख्या में बंदरों का डेरा रहता है। श्रद्धालु इन बंदरों को हनुमानजी की वानर सेना का रूप मानकर बहुत शुभ मानते हैं और उन्हें श्रद्धा के साथ भोजन कराते हैं।
























