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जालोर और सिरोही की सीमा पर स्थित वराडा हनुमानजी मंदिर, महाभारत काल और अनोखी परंपराओं से है गहरा नाताराजस्थान
24 अक्तू॰ 2026, 9:30 pm (2 घंटे पहले)· 1

जालोर और सिरोही की सीमा पर स्थित वराडा हनुमानजी मंदिर, महाभारत काल और अनोखी परंपराओं से है गहरा नाता

जालोर और सिरोही की सीमा पर बने वराडा हनुमानजी मंदिर की महिमा निराली है। यहां हनुमानजी के एक पैर के नीचे शनिदेव विराजमान हैं और गुजरने वाले वाहन हॉर्न बजाकर अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।

राजस्थान के जालोर और सिरोही जिलों की सीमा पर स्थित वराडा हनुमानजी का यह पावन स्थल अपनी गहरी धार्मिक मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इस मंदिर के इतिहास के तार सीधे महाभारत काल से जुड़े हुए बताए जाते हैं। क्षेत्र के लोगों का ऐसा पक्का विश्वास है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के कठिन समय के दौरान यहां कदम रखे थे और संकटमोचन हनुमानजी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसी पौराणिक प्रसंग के कारण इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता बहुत अधिक बढ़ जाती है और भक्त यहां पूरी श्रद्धा के साथ माथा टेकने आते हैं।

स्वयंभू प्रतिमा और शनिदेव का अनोखा स्वरूप

इस पवित्र मंदिर में स्थापित हनुमानजी की मूर्ति को लेकर भक्तों में यह मान्यता है कि यह प्रतिमा मनुष्य द्वारा नहीं बनाई गई है, बल्कि यह स्वयंभू रूप से प्रकट हुई है। मूर्ति का विशाल आकार और भव्य रूप हर आने वाले श्रद्धालु को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां बजरंगबली के एक पैर के नीचे शनिदेव विराजमान हैं। हनुमानजी और शनिदेव के इस दुर्लभ और अनोखे स्वरूप के दर्शन करने के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं।

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वाहन चालकों की अनोखी आस्था और परंपरा

वराडा हनुमानजी मंदिर मुख्य सड़क मार्ग पर ही बना हुआ है, इसलिए यहां से आने-जाने वाले लोगों की लंबी आवाजाही रहती है। इस रास्ते से गुजरने वाले तमाम वाहन चालक मंदिर के सामने से निकलते वक्त अपने वाहनों का हॉर्न बजाकर और हाथ जोड़कर आगे बढ़ना बेहद शुभ मानते हैं। यहां तक कि इस मार्ग से निकलने वाली रोडवेज बसें भी मंदिर के सामने पहुंचते ही हॉर्न बजाती हैं। यात्रियों और चालकों के लिए यह स्थान सिर्फ रास्ते का एक सामान्य मंदिर नहीं, बल्कि उनकी संपूर्ण यात्रा के दौरान आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर और दीवारों पर रामायण

वराडा हनुमानजी के मुख्य मंदिर के विशाल परिसर के भीतर कई अन्य देवी-देवताओं के छोटे-बड़े मंदिर भी बने हुए हैं। इनमें सुंधा माता, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम दरबार, शनिदेव और वीर भगवान के मंदिर प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा परिसर के पास ही एक कुंवारी कन्या का मंदिर होने की बात भी कही जाती है। इन तमाम मंदिरों के साथ ही इस पूरे परिसर की दीवारों पर संपूर्ण रामायण का बहुत सुंदर चित्रण किया गया है, जो यहां आने वाले लोगों को आकर्षित करता है।

चमत्कारी पत्थर और बंदरों की मौजूदगी

इस धार्मिक स्थल से एक खास पत्थर से जुड़ी मान्यता भी काफी प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर परिसर का यह विशेष पत्थर हर कोई नहीं उठा सकता है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि केवल वही व्यक्ति इस पत्थर को उठाने में सफल होता है जिसने कभी अपने जीवन में कोई बुरा काम न किया हो। इसके अलावा, मंदिर के आस-पास भारी संख्या में बंदरों का डेरा रहता है। श्रद्धालु इन बंदरों को हनुमानजी की वानर सेना का रूप मानकर बहुत शुभ मानते हैं और उन्हें श्रद्धा के साथ भोजन कराते हैं।

सवाल-जवाब

वराडा हनुमानजी मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के जालोर और सिरोही जिलों की सीमा पर स्थित है।
इस मंदिर का संबंध किस काल से माना जाता है?
इस मंदिर से जुड़ी मान्यता महाभारत काल से जुड़ी है और कहा जाता है कि पांडवों ने यहां दर्शन किए थे।
मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति की क्या विशेषता है?
यहां हनुमानजी की प्रतिमा स्वयंभू है और उनके एक पैर के नीचे शनिदेव विराजमान हैं।
वाहन चालक मंदिर के सामने क्या करते हैं?
इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालक और रोडवेज बसें मंदिर के सामने हॉर्न बजाकर आगे बढ़ते हैं।
मंदिर परिसर में कौन-से अन्य देवी-देवता हैं?
परिसर में सुंधा माता, श्री राम दरबार, शनिदेव और वीर भगवान के मंदिर मौजूद हैं।
मंदिर के पत्थर से जुड़ी क्या मान्यता है?
माना जाता है कि मंदिर का एक खास पत्थर केवल वही व्यक्ति उठा सकता है जिसने कभी बुरे कर्म न किए हों।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·6 मिनट पहले

जब मैं पिछले साल राजस्थान की यात्रा पर था, तब इस रास्ते से गुजरते हुए ड्राइवर ने अचानक गाड़ी का हॉर्न बजाया था। तब उसने मुझे बताया था कि यहाँ हनुमानजी के चरणों में शनिदेव हैं और सब लोग ऐसे ही सम्मान देते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·43 मिनट पहले

हनुमानजी के पैर के नीचे शनिदेव होना वाकई चौंकाने वाली बात है, मैंने ऐसा पहली बार पढ़ा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 मिनट पहले

रवि जी, सही कहा आपने! वैसे राजस्थान में ऐसे कई मंदिर हैं जहां अनोखी मान्यताएं हैं, यहाँ का हॉर्न बजाने वाला नियम भी बड़ा दिलचस्प है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

मंदिर के सामने से गुजरते वक्त गाड़ियों का हॉर्न बजाना और रोडवेज बसों का भी रुककर या हॉर्न देकर निकलना वाकई गजब की परंपरा है। सफर के बीच ऐसी छोटी आस्थाएं दिल को छू लेती हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, सफर में हॉर्न बजाने वाली बात तो ठीक है, पर क्या सच में कोई बिना पाप वाला आदमी वो पत्थर उठा पाता है?

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