राजस्थान में चल रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाली कई हिंसक झड़पें और विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। जयपुर और केकड़ी जिलों से आई रिपोर्टों के अनुसार, कहीं वोट चोरी के गंभीर आरोपों को लेकर भारी पुलिस बल पर पथराव हुआ, तो कहीं वोटों की गिनती शुरू होने से पहले धांधली की आशंका जाहिर करते हुए मुख्य राजमार्ग को पूरी तरह ठप कर दिया गया। इसके अलावा, एक स्थान पर स्थानीय वार्ड पंच के पद को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुट लाठी-डंडे लेकर सीधे सड़कों पर उतर आए और आपस में भिड़ गए। इन तमाम हिंसक घटनाओं के कारण कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील हो गई है तथा शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी है।
मोरीजा में वोट चोरी का आरोप और पुलिस पर पथराव
जयपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक चौमूं क्षेत्र की मोरीजा ग्राम पंचायत में पंचायत चुनाव के दौरान अचानक उस समय माहौल बिगड़ गया, जब स्थानीय निवासियों ने मतदान प्रक्रिया में वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा और उन्होंने चुनाव स्थल के बाहर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी आरंभ कर दी। जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तो सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए मौके पर मौजूद सामोद थाने की पुलिस टीम ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया।
हालांकि, उत्तेजित भीड़ ने पुलिस की बातों को सुनने के बजाय उन पर अचानक पत्थरों से हमला बोल दिया। पुलिस बल पर हुए इस पथराव के कारण मौके पर भारी अफरा-तफरी और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई। अपने बचाव और इलाके में कानून-व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस को मजबूरन लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। लाठी पटककर पुलिस ने उग्र भीड़ को खदेड़ा और स्थिति को नियंत्रण में लिया। इस हिंसक टकराव के बाद मोरीजा गांव में बेहद तनावपूर्ण माहौल व्याप्त हो गया है। फिलहाल पुलिस गांव में गश्त कर रही है ताकि किसी भी तरह की पुनः भड़कने वाली हिंसा को रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वोट चोरी के आरोपों की जांच की जा रही है, लेकिन पुलिस पर हमला करने वालों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया जाएगा।
अजगरा में मतगणना से पूर्व धांधली का दावा, राजमार्ग ठप
उधर, केकड़ी जिले के अंतर्गत आने वाली अजगरा ग्राम पंचायत में भी पंचायती राज चुनाव की सरगर्मी के बीच बड़ा विवाद सामने आया। यहां वोटों की गिनती शुरू होने से ठीक पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने मतदान और प्रशासनिक तैयारियों में गड़बड़ी होने की आशंका जताते हुए भारी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की नीयत से गड़बड़ी की कोशिश की जा रही है। इस बात की भनक मिलते ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण सड़कों पर उतर आए और अजमेर-कोटा राजमार्ग को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया।
अजमेर-कोटा राजमार्ग पर जाम लगाए जाने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं और आम यात्रियों व कमर्शियल वाहनों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हाईवे जाम होने की सूचना तुरंत जिला पुलिस प्रशासन को दी गई, जिसके बाद भारी संख्या में पुलिस जाब्ता और उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने शुरुआत में समझाइश के जरिए ग्रामीणों से रास्ता खाली करने की अपील की, लेकिन आक्रोशित प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए प्रदर्शनकारियों को सड़क से खदेड़ दिया। अजगरा ग्राम पंचायत में इस बार सरपंच पद के लिए कुल 16 उम्मीदवार मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, जिससे मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा बना हुआ है। इसी कड़े मुकाबले के बीच धांधली की आशंकाओं ने चुनावी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
मौजमाबाद के नागौरी मोहल्ले में वार्ड पंच पद के लिए खूनी संघर्ष
चौमूं और केकड़ी के अलावा जयपुर जिले के मौजमाबाद कस्बे के नागौरी मोहल्ले में भी चुनावी रंजिश की एक दर्दनाक तस्वीर देखने को मिली। मौजमाबाद में वार्ड पंच की एक सीट पर अपना वर्चस्व स्थापित करने को लेकर दो स्थानीय गुटों के बीच विवाद शुरू हो गया। शुरुआती दौर में दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी बहस और कहासुनी हुई, लेकिन देखते ही देखते यह जुबानी जंग उग्र रूप ले बैठी।
विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के लोग अपने-अपने घरों से लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर आमने-सामने आ गए। घने आबादी वाले नागौरी मोहल्ले की मुख्य सड़क पर ही दोनों गुटों के लोगों ने एक-दूसरे पर लाठियों से हमला करना शुरू कर दिया। बीच सड़क पर खुलेआम लाठी-डंडे चलने और चीख-पुकार मचने से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया। आसपास के दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने लगे और आम नागरिकों में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस की गश्ती टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव करते हुए दोनों पक्षों को जबरन एक-दूसरे से अलग किया और उन्हें शांत कराया। पुलिस की तत्परता और समय पर की गई कार्रवाई के कारण कोई बड़ा हादसा या गंभीर जानी नुकसान होने से टल गया। प्रशासन ने दोनों पक्षों को सख्त हिदायत दी है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनावी प्रक्रिया के बीच पुलिस और प्रशासन के लिए बढ़ीं चुनौतियाँ
राजस्थान में चल रहे इन स्थानीय निकाय व पंचायत चुनावों के दौरान एक के बाद एक सामने आ रही हिंसा और विरोध की घटनाओं ने राज्य पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। अलग-अलग क्षेत्रों में उपजे तनाव के पीछे कारण भले ही भिन्न-भिन्न रहे हों—जैसे चौमूं के मोरीजा में वोट चोरी का आरोप, केकड़ी के अजगरा में मतगणना पूर्व धांधली का अंदेशा, और मौजमाबाद में स्थानीय सीट पर कब्जे को लेकर आपसी गुटबाजी—लेकिन इन सभी घटनाओं ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने की प्रशासनिक दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है।
तीनों ही स्थानों पर पुलिस को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा। जहाँ मोरीजा में पथराव के जवाब में लाठीचार्ज करना पड़ा, वहीं अजगरा में राष्ट्रीय राजमार्ग से जाम हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग की राह चुननी पड़ी। मौजमाबाद में यदि पुलिस सही समय पर हस्तक्षेप न करती तो लाठी-डंडों से होने वाली यह झड़प जानलेवा साबित हो सकती थी। वर्तमान में पुलिस बल इन सभी क्षेत्रों में स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और उपद्रवियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। ग्रामीण इलाकों में शांतिपूर्ण वातावरण में मतदान और मतगणना का काम पूरा कराना अब स्थानीय पुलिस व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।





















