झुंझुनूं क्षेत्र में रबी सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों को खाद की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब विभिन्न जिलों में उर्वरक का आवंटन कृषि विभाग के माध्यम से तय किया जाएगा। पिछले चार वर्षों के दौरान हुई औसत बुवाई और खपत के आंकड़ों को आधार बनाकर ही जिलावार कोटे का निर्धारण किया जा रहा है। इसके अलावा सहकारी समितियों को खाद के वितरण में पहली प्राथमिकता दी जाएगी ताकि किसानों को समय पर और बिना किसी परेशानी के जरूरी उर्वरक मिल सकें। इस पूरी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बाजार में खाद की आपूर्ति को संतुलित करना और हर किसान तक उसकी पहुंच आसान बनाना है।
निजी विक्रेताओं की मनमानी पर लगेगी रोक
हाल के दिनों में यह शिकायतें सामने आ रही थीं कि बुवाई से ठीक पहले कई इलाकों में सहकारी केंद्रों पर डीएपी का स्टॉक खत्म हो चुका था। इसका फायदा उठाकर निजी दुकानों पर खाद खरीदने के एवज में किसानों पर दूसरे कृषि उत्पाद खरीदने का दबाव बनाया जा रहा था। नई गाइडलाइन के अनुसार अब दुकानदारों की इस तरह की जबरदस्ती पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। कोई भी विक्रेता डीएपी या अन्य खाद के साथ बीज, कीटनाशक, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स या अन्य उत्पाद खरीदने के लिए किसानों को बाध्य नहीं कर पाएगा। ऐसा करने वाले किसी भी दोषी वितरक, अधिकारी, कंपनी या विक्रेता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कंपनियां अपनी मर्जी से नहीं घटा-बढ़ा सकेंगी कोटा
नई प्रणाली लागू होने के बाद अब खाद निर्माता कंपनियां अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी जिले या डीलर को होने वाले आवंटन में फेरबदल नहीं कर सकेंगी। कंपनियों को कृषि विभाग की ओर से पहले से निर्धारित की गई जिलेवार कार्ययोजना के तहत ही उर्वरक की आपूर्ति करनी होगी। यदि आवंटन में किसी भी प्रकार का बदलाव करना जरूरी हुआ, तो इसके लिए विभाग के सक्षम अधिकारी की आधिकारिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि उर्वरक का वितरण हर जिले की वास्तविक मांग के अनुरूप हो और किसी खास क्षेत्र में जरूरत से ज्यादा या कम खाद पहुंचने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
सहकारी संस्थाओं को मिलेगी प्राथमिकता
उर्वरक के वितरण में प्राथमिक कृषि साख समितियों और क्रय-विक्रय सहकारी समितियों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इन सभी सहकारी संस्थाओं की वास्तविक मांग का आकलन करके ही खाद का आवंटन किया जाएगा। कृषि विभाग और सहकारिता विभाग मिलकर मौसमी जरूरतों, फसल चक्र और जिलों से मिलने वाली मांगों के आधार पर आपूर्ति की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इस व्यवस्था के जरिए किसानों को सरकारी दरों पर सहकारी माध्यमों से खाद खरीदने का सीधा अवसर मिलेगा, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच एक बेहतर संतुलन स्थापित होगा।
आपूर्ति और स्टॉक की होगी नियमित निगरानी
नई गाइडलाइन के तहत खाद कंपनियों को अपनी रवानगी, रैक की स्थिति, जिलेवार आपूर्ति, डीलर और संस्थानवार आवंटन तथा स्टॉक की तमाम जानकारियाँ कृषि विभाग को समय पर उपलब्ध करानी होंगी। इससे विभाग के पास हमेशा इस बात का पूरा रिकॉर्ड रहेगा कि किस जिले में कितना स्टॉक मौजूद है और कहाँ अतिरिक्त खेप भेजने की आवश्यकता है। यदि किसी भी इलाके में खाद की किल्लत या वितरण असंतुलन की स्थिति बनती है, तो तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे। इसके साथ ही निजी दुकानों के गोदामों में रखे स्टॉक पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी ताकि समूची वितरण प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता बनी रहे।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. मोहनलाल दादरवाल ने जानकारी दी है कि सरकार की इस नई गाइडलाइन के तहत सहकारी संस्थाओं को प्राथमिकता के आधार पर खाद मिलेगी और निजी दुकानों के स्टॉक पर पैनी नजर रखी जाएगी। कंपनियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने मार्केटिंग कर्मचारियों, अधिकारियों और अधिकृत डीलरों तक इन नियमों की जानकारी समय पर पहुँचाएँ। खाद की अनधिकृत आवाजाही, आवंटन में मनमानी या तय क्षेत्र के बजाय दूसरे स्थान पर उर्वरक भेजने जैसी गतिविधियों पर विभाग की कड़ी नजर रहेगी, और नियम का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
















