बीकानेर के रेगिस्तानी आंचल में उगने वाले देसी बेर इन दिनों बाजार की रौनक बढ़ा रहे हैं और लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। आम बोलचाल की भाषा में स्थानीय लोग इन्हें भुंगरा के नाम से भी पुकारते हैं। सर्दियों की आहट के साथ ही यह मौसमी फल बाजारों में अपनी खास जगह बनाने लगा है। खास बात यह है कि केवल ताजे बेर ही नहीं, बल्कि सूखे हुए बेर की भी बाजार में जबरदस्त मांग बनी रहती है। बीकानेर और आसपास के तमाम मरुस्थलीय क्षेत्रों में बेर के पेड़ों पर फल लदने शुरू हो चुके हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी बाजारों तक इस पारंपरिक सौगात को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
स्वाद और परंपरा का अनूठा संगम
बीकानेर के ये पारंपरिक देसी बेर स्वाद, पुरानी परंपरा और भरपूर पोषण का एक बेहतरीन मेल माने जाते हैं। चूंकि यह एक मौसमी फल है, इसलिए लोग इसका इंतजार बड़ी बेसब्री से करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि सूखे बेर के अंदर प्राकृतिक रूप से शर्करा यानी शुगर की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है, इसलिए इनका सेवन हमेशा एक संतुलित मात्रा में करना ही समझदारी है। यह फल सीमित समय के लिए ही उपलब्ध होता है, जो इसे और भी खास बनाता है।
बाजार में सूखे बेर की कीमत और उपलब्धता
बीकानेर के आसपास के ग्रामीण और मैदानी इलाकों में देसी बेर के अनगिनत पेड़ प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं। इन पेड़ों पर उगने वाले फल अपनी खास मिठास और अनूठे स्वाद के लिए दूर-दूर तक पहचाने जाते हैं। बाजारों में बिकने वाले सूखे बेर ग्राहकों को अपनी तरफ खींच रहे हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए प्रोफेसर संदीप कुमार यादव ने बताया कि बाजार में सूखे बेर इन दिनों 120 से 140 रुपए प्रति किलो के भाव तक बेचे जा रहे हैं। स्थानीय संस्कृति के अनुसार, दीपावली के आसपास ही बेर का यह पूरा सीजन आरंभ हो जाता है और कुछ हफ्तों तक बाजार में इनकी नियमित उपलब्धता बनी रहती है। धूप में सूखने के बाद इन फलों का स्वाद और मिठास बिल्कुल बदल जाती है, जिसे लोग बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं। यह सीमित अवधि का देसी फल ग्रामीण खानपान की समृद्ध परंपरा का एक अहम हिस्सा है।
पोषण तत्वों का पावरहाउस है देसी बेर
देसी बेर केवल जीभ के स्वाद को संतुष्ट करने का जरिया नहीं है, बल्कि पोषण के पैमाने पर भी यह बेहद उपयोगी फल साबित होता है। इसमें विटामिन, डाइटरी फाइबर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। अपने रोजाना के संतुलित आहार में बेर को शामिल करने से शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं। इस फल में मौजूद विटामिन सी शरीर की सामान्य रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बनाए रखने में काफी मददगार साबित होता है। इसके अलावा, इसमें पाया जाने वाला फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में बहुत सहायक हो सकता है। यही मुख्य वजह है कि सर्दियों के तमाम मौसमी फलों में बेर को हमेशा से एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना गया है।
हड्डियों से लेकर दिल की सेहत तक का सफर
बेर के अंदर मौजूद तमाम पोषक तत्व हमारे समग्र शारीरिक स्वास्थ्य को बरकरार रखने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, किसी भी स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित खानपान के साथ-साथ नियमित शारीरिक गतिविधि का होना भी उतना ही जरूरी है। फाइबर से भरपूर ऐसे फल शरीर के बढ़ते वजन को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते हैं। इसके अलावा, इन फलों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण होने वाले नुकसान से बचाने का काम करते हैं। हालांकि, यह बात भी ध्यान रखने योग्य है कि केवल बेर खा लेने मात्र से किसी भी हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों को रोकने की कोई पक्की गारंटी नहीं मिल जाती है। ठीक इसी प्रकार, बेर को कैंसर जैसी बीमारी का कोई अचूक इलाज या उससे बचाव का निश्चित उपाय मान लेना भी बिल्कुल सही नहीं होगा। ताजे फलों के अलावा सूखे बेर का अपना एक अलग जायका होता है, जिन्हें लंबे समय तक सहेज कर रखा जा सकता है और सीजन बीत जाने के बाद भी इनका लुत्फ उठाया जा सकता है। बीकानेर के मरुस्थलीय अंचल में मिलने वाले ये बेर वहां की स्थानीय जीवनशैली और खानपान की एक अनूठी पहचान हैं।
















