जयपुर की खेल प्रतिभाओं ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया है। जापान के नागोया में आयोजित हो रहे पैरा-एशियन गेम्स में जयपुर की बेटी और दिग्गज पैरा शूटर अवनी लेखरा ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश के लिए रजत पदक हासिल किया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता की आर2 विमेंस 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग की एसएच1 कैटेगरी में उन्होंने यह सफलता प्राप्त की है। अपनी असाधारण सटीकता और एकाग्रता का परिचय देते हुए उन्होंने इस मुकाबले में कुल 249.6 अंक हासिल किए और पोडियम पर अपनी जगह पक्की की।
डब्ल्यूएसपीएस वर्ल्ड चैंपियनशिप के बाद शानदार वापसी
इससे पहले अवनी लेखरा ने डब्ल्यूएसपीएस वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, जहां वे मेडल जीतने में सफल नहीं हो पाई थीं। हालांकि उस प्रतियोगिता की निराशा को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने इस बार नागोया के खेल मैदान पर अपनी जीत का परचम लहरा दिया है। इस रजत पदक के साथ ही उन्होंने साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक के लिए भी आधिकारिक रूप से क्वालिफाई कर लिया है। एसएच1 कैटेगरी में मुख्य रूप से वे निशानेबाज हिस्सा लेते हैं जिन्हें कमर से नीचे की दिव्यांगता होती है। दो बार पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली अवनी राजस्थान की पहली ऐसी पैरालंपिक एथलीट बन गई हैं जो लगातार तीसरी बार पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2015 में जयपुर के जगतपुरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में ट्रेनिंग लेकर की थी।
प्रेरणा और शुरुआती संघर्ष की कहानी
जयपुर में जन्मी अवनी लेखरा आज के समय में भारत की सबसे प्रेरणादायी एथलीटों में गिनी जाती हैं। लगातार तीन पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली वह देश की इकलौती महिला एथलीट हैं। उनकी सफलता के पीछे कड़ा अनुशासन और अटूट एकाग्रता जुड़ी हुई है। उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब मात्र 11 वर्ष की उम्र में एक भीषण कार दुर्घटना का शिकार होने के कारण उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। इस दुर्घटना के बाद उन्हें हमेशा के लिए व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। लेकिन उन्होंने इस बड़ी शारीरिक चुनौती को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इसे अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ शूटिंग का कड़ा अभ्यास जारी रखा और अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से अपनी तकदीर बदल डाली।
शिक्षा और खेल के बीच बेहतरीन संतुलन
दुर्घटना के बाद जब वे उबर रही थीं, तब उनके पिता ने उन्हें खेलों में अपनी किस्मत आजमाने के लिए प्रेरित किया था। उन्होंने अभिनव बिंद्रा की आत्मकथा अ शॉट एट हिस्ट्री को पढ़कर निशानेबाजी में उतरने का फैसला किया था। खेल के मैदान पर पसीना बहाने के साथ-साथ उन्होंने अपनी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी और राजस्थान यूनिवर्सिटी से फाइव ईयर लॉ डिग्री की पढ़ाई पूरी की। कड़े प्रशिक्षण और एक के बाद एक कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के बीच संतुलन बिठाते हुए उन्होंने राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया। कोरिया में आयोजित एक प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल प्रोन मिक्स्ड स्पर्धा में 631.7 का शानदार स्कोर बनाकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से नवाजी जा चुकी हैं
खेल जगत में उनके अद्वितीय योगदान और उपलब्धियों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया है। इसके अलावा खेल के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें साल 2022 में प्रतिष्ठित पद्मश्री से भी अलंकृत किया गया। केंद्र सरकार के साथ-साथ राजस्थान सरकार द्वारा भी उन्हें समय-समय पर सम्मानित किया जा चुका है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर राज्य के मुख्यमंत्रियों तक ने उनकी इस ऐतिहासिक सफलता पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से बधाई दी है और सम्मानित किया है।

















