कानपुर की युवा बॉक्सर का उन्नाव में मिला शव, त्योहार की खरीदारी के दौरान हुई थी लापताचेन्नई से शुरू करें ऊटी और कुन्नूर का सफर, आईआरसीटीसी लेकर आया है किफायती टूर पैकेजघर पर ऐसे बनाएं कैरेमलाइज्ड चाय, अदरक और इलायची से स्वाद होगा दोगुनाशाम की चाय के साथ झटपट बनाएं स्वादिष्ट ब्रेड, घी, गुड़ और शहद का यह हेल्दी स्नैकरामायण में सीता के युद्ध वाले सीन पर बोलीं दीपिका चिखलिया, कहा- मुझे ऐसे दृश्य याद नहींदीपावली पर मनेगा लालकृष्ण आडवाणी का 100वां जन्मदिन, दिल्ली स्थित मुख्यालय में जुटेंगे दिग्गजआर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियां खरीद रही हैं प्राइवेट वर्क फाइलें और ईमेल, इंडस्ट्री में मची होड़बच्चों की सर्दी और खांसी को न समझें मामूली, जानिए कब यह बन सकती है निमोनिया जैसी गंभीर बीमारीदीवाली के पटाखों से अपनी कार और बाइक को यूं बचाएं, इन जरूरी बातों का रखें ध्यानघर की शोभा बढ़ाने वाला स्नेक प्लांट, रात में भी देता है ऑक्सीजन और क्या इससे आते हैं सांप?
भरतपुर के पूर्व फौजी पूरन सिंह ने चुनी अनोखी राह, शीर्षासन करते हुए पूरी कर रहे गिरिराज परिक्रमाराजस्थान
7 नव॰ 2026, 11:18 am (13 घंटे पहले)· 0

भरतपुर के पूर्व फौजी पूरन सिंह ने चुनी अनोखी राह, शीर्षासन करते हुए पूरी कर रहे गिरिराज परिक्रमा

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद पूरन सिंह ने एक अनूठा कदम उठाते हुए शीर्षासन की मुद्रा में गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा शुरू की है। उनका यह कठिन प्रयास और योग के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

भरतपुर में सेना से सेवानिवृत्ति के बाद एक पूर्व सैनिक ने अपनी अनूठी शैली और मजबूत इच्छाशक्ति से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पूरन सिंह नामक ये पूर्व फौजी सामान्य तौर पर चलने के बजाय सिर के बल यानी शीर्षासन की मुद्रा में भगवान गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा कर रहे हैं। उनका यह अद्भुत तरीका हर देखने वाले के लिए कौतूहल और आकर्षण का विषय बना हुआ है। अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान जब वे डीग पहुंचे, तो वहां मौजूद स्थानीय श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया और उनके इस जज्बे की जमकर सराहना की।

आम तौर पर जहां लोग सामान्य रूप से चलकर परिक्रमा पूरी करते हैं, वहीं पूरन सिंह ने इस कठिन मार्ग को अपने शारीरिक संतुलन और योग साधना के जरिए तय करने का बीड़ा उठाया है। इस पूरी प्रक्रिया में वे अपने दोनों हाथों के बल पर शरीर का पूरा भार संभालते हैं और संतुलन बनाए रखते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। उनके इस बेहद कठिन अभ्यास को सड़क पर चलते हुए जो भी देखता है, वह हैरान रह जाता है और उनके अनुशासन की दाद देता है।

ये भी पढ़ें

योग और अनुशासन का संदेश

इस अनूठी यात्रा के रास्ते में जहां से भी उनका काफिला गुजर रहा है, वहां उन्हें देखने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक एकत्र हो रहे हैं। इस बारे में बात करते हुए पूरन सिंह का कहना है कि योग और निरंतर अभ्यास के बलबूते शरीर को हमेशा स्वस्थ और ऊर्जावान बनाए रखा जा सकता है। उनका मानना है कि उम्र के आंकड़े का कोई खास महत्व नहीं होता है, यदि इंसान के मन में पक्का इरादा और कुछ हटकर दिखाने का जुनून हो, तो दुनिया का कोई भी कठिन लक्ष्य असंभव नहीं रहता है।

युवाओं को प्रेरित करने का उद्देश्य

इस पूरी कठिन परिक्रमा को निकालने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य आम जनता को योग के फायदों के प्रति जागरूक करना और देश के युवाओं को रोजाना व्यायाम करने के लिए प्रेरित करना है। उनका विचार है कि योग साधना के जरिए जहां एक तरफ शरीर को सेहतमंद रखा जा सकता है, वहीं दूसरी तरफ ईश्वर की सच्ची भक्ति और सेवा भी पूरी निष्ठा के साथ की जा सकती है।

पहले भी बना चुके हैं रिकॉर्ड

अपनी इस अद्भुत क्षमता के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि इससे पहले भी वे शीर्षासन की विभिन्न विधाओं में वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। अब वे गोवर्धन गिरिराज जी की पूरी परिक्रमा इसी कठिन शीर्षासन मुद्रा में पूरी करके एक नया विश्व रिकॉर्ड कायम करने के इरादे से मैदान में उतरे हैं। इसी लक्ष्य को साधने के लिए वे बिना रुके लगातार अपनी इस यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं। सेना की नौकरी छोड़ने के बाद भी उनका यह अटूट समर्पण और जज्बा हर उम्र के व्यक्ति को गहराई से प्रभावित कर रहा है। उनका यह प्रयास यह मजबूत संदेश देता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सच्ची आस्था के मिलन से इंसान हर असंभव लगने वाले काम को भी संभव कर सकता है।

सवाल-जवाब

पूरन सिंह कौन हैं?
पूरन सिंह सेना से सेवानिवृत्त हुए एक पूर्व फौजी हैं जो अपनी अनूठी परिक्रमा के लिए चर्चा में हैं।
वे किस स्थान पर परिक्रमा कर रहे हैं?
वे भगवान गोवर्धन गिरिराज जी की परिक्रमा कर रहे हैं।
परिक्रमा करने का उनका तरीका क्या है?
वे सामान्य रूप से चलने के बजाय सिर के बल यानी शीर्षासन की मुद्रा में परिक्रमा कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान वे कहां पहुंचे हैं?
अपनी इस अनोखी यात्रा के दौरान वे डीग पहुंचे हैं जहां स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उनका उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करना और युवाओं को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना है।
क्या वे पहले भी कोई रिकॉर्ड बना चुके हैं?
हां, वे इससे पहले भी शीर्षासन में वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp