राजस्थान के नागौर रेलवे स्टेशन पर पिछले करीब ढाई साल से चल रही खुदाई, धूल और संकरे रास्तों का दौर अब अपने अंत पर है. केंद्र सरकार की ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत यहां हो रहे कायाकल्प का लगभग 96 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, और स्टेशन अब अपने पुराने ढर्रे की जगह एक बिल्कुल नई, भव्य शक्ल में यात्रियों के सामने आ रहा है. लंबे समय से निर्माण कार्य के कारण जिन हजारों मुसाफिरों को रोज परेशानी झेलनी पड़ रही थी, उनके लिए यह बड़ी राहत की खबर है.
नया मुख्य द्वार खुला, संकरे रास्तों से छुटकारा
बदलाव का सबसे बड़ा असर स्टेशन के प्रवेश पर दिखता है. चमचमाता नया मुख्य प्रवेश द्वार आम यात्रियों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है. अब तक लोगों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए तंग गलियों और कंस्ट्रक्शन ज़ोन के बीच से होकर गुजरना पड़ता था, लेकिन इस चौड़े मार्ग के चालू होने से वह झंझट हमेशा के लिए खत्म हो गई है. नतीजा यह कि स्टेशन तक आना-जाना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान, सुरक्षित और सहूलियत भरा हो गया है — और इसका सीधा फायदा यहां से रोज सफर करने वाले हजारों लोगों को मिल रहा है.
पत्थरों पर उकेरी गई नागौर की विरासत
नए स्टेशन भवन की सबसे खास बात इसका डिजाइन है, जिसमें राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली इतिहास को केंद्र में रखा गया है. कंक्रीट के बड़े-बड़े खंभों पर बारीक राजस्थानी नक्काशी उकेरी गई है, जो इलाके की पारंपरिक कला को जीवंत कर देती है. इतना ही नहीं, स्टेशन की दीवारों और अलग-अलग हिस्सों में नागौर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को दर्शाने वाले कलात्मक तत्व भी जोड़े जा रहे हैं. इसका मकसद यह है कि देश-विदेश से आने वाले यात्री ट्रेन पकड़ने के साथ-साथ नागौर की अनूठी विरासत की झलक भी अपने साथ ले जाएं.
टिकट से लेकर रोशनी तक — सब एक छत के नीचे
टिकट लेने की प्रक्रिया को भी सहज बनाने पर खास जोर दिया गया है. इसके लिए सभी टिकट काउंटरों को अब एक ही विशाल मुख्य हॉल में लाया जा रहा है, ताकि लाइन में लगने और टिकट खरीदने का पूरा काम साफ-सुथरे और व्यवस्थित ढंग से हो सके. इस बड़े हॉल में की गई शानदार लाइटिंग और चारों ओर मौजूद आधुनिक इंतजाम मिलकर यात्रियों के सफर के अनुभव को खुशनुमा और विश्वस्तरीय बना देंगे.
FOB, लिफ्ट और एस्केलेटर — हर यात्री का ध्यान
स्टेशन को हाईटेक बनाने की कड़ी में एक नया और चौड़ा फुट ओवर ब्रिज (FOB) तैयार किया जा रहा है. बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक लिफ्ट लगाने का काम भी अंतिम चरण में है. इसके अलावा सीढ़ियां चढ़ने-उतरने की परेशानी से बचाने के लिए एस्केलेटर यानी स्वचालित सीढ़ियों की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक जाना बेहद आसान हो जाएगा.
अलग एंट्री-एग्जिट और बड़ी पार्किंग
स्टेशन परिसर के भीतर वाहनों और यात्रियों की आवाजाही को सुचारु रखने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था को नए सिरे से प्लान किया गया है. प्रवेश (एंट्री) और निकास (एग्जिट) के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए जा रहे हैं, ताकि मुख्य द्वारों पर बेवजह की भीड़ न लगे. साथ ही गाड़ियों की सुरक्षित पार्किंग के लिए बड़ा स्थान, यात्रियों को छोड़ने के लिए आधुनिक ड्रॉप-ऑफ पोर्च और एक नया सर्कुलेटिंग एरिया भी तैयार किया जा रहा है, जो आगे चलकर स्टेशन का मुख्य आकर्षण बनेगा.
फर्नीचर, साइनबोर्ड और साफ-सुथरे शौचालय
यात्री सुविधाओं को और ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए स्टेशन पर आधुनिक फर्नीचर, दूर से दिखने वाले नए साइनबोर्ड, बड़े शेल्टर, पीने के साफ पानी के लिए वाटर बूथ और चकाचक शौचालयों का इंतजाम किया जा रहा है. सुरक्षा और निजता को ध्यान में रखते हुए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग टॉयलेट ब्लॉक बनाए गए हैं, जबकि स्टेशन के बाहरी हिस्से में आम जनता के लिए ‘पे एंड यूज’ शौचालय की सुविधा भी रहेगी. इन तमाम बदलावों के साथ नागौर रेलवे स्टेशन अब महज ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं रहेगा, बल्कि शहर की तरक्की और उसकी नई आधुनिक पहचान का प्रतीक बनकर उभरेगा.













