राजस्थान के टोंक जिले के देवली शहर में दीपावली के त्योहारी सीजन से ठीक पहले अवैध रूप से चलाए जा रहे पटाखों के कारोबार के खिलाफ जिला स्पेशल टीम यानी डीएसटी ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान शहर के भीतर तीन अलग-अलग स्थानों पर अचानक छापामारी की गई, जिससे अवैध रूप से चल रहे पटाखा गोदामों का भंडाफोड़ हुआ है। इन संदिग्ध ठिकानों से भारी मात्रा में बड़े और वजनी पटाखे बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इस अवैध कारोबार में संलिप्त पाए गए एक आरोपी को भी सुरक्षा बलों द्वारा तुरंत डिटेन कर लिया गया है, और फिलहाल स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर ही मौजूद रहकर मामले की गहराई से छानबीन कर रहे हैं।
शहर के तीन प्रमुख इलाकों में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी
डीएसटी की इस बड़ी और अचानक की गई कार्रवाई के बाद से ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और हड़कंप का माहौल बन गया है। शुरुआती जानकारियों से यह बात सामने निकलकर आई है कि इन सभी चिन्हित ठिकानों पर बिना किसी वैध लाइसेंस के बड़े पैमाने पर पटाखों की खरीद-फरोख्त और भंडारण का अवैध काम चल रहा था। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन गोदामों के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम या जरूरी उपकरण तक मौजूद नहीं थे, जो किसी भी बड़ी दुर्घटना को रोकने के लिए अनिवार्य माने जाते हैं। घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास इस प्रकार भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री का बेखौफ रखा जाना किसी बड़े और भयानक हादसे को सीधे तौर पर न्यौता दे रहा था। समय रहते की गई इस छापेमारी से एक संभावित और बड़ा खतरा टल गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों ने भी राहत की सांस ली है।
थाने के सामने, रीको एरिया और दौलता मोड़ बने थे ठिकाने
जिला स्पेशल टीम ने देवली के भीतर कुल तीन अलग-अलग जगहों को निशाना बनाते हुए अपनी यह कार्रवाई पूरी की है। इन मुख्य ठिकानों में सीधे थाने के ठीक सामने का संवेदनशील इलाका, रीको एरिया और दौलता मोड़ शामिल हैं। जांच दल ने जब इन तीनों ही स्थानों पर एक साथ पहुंचकर मुआयना किया, तब वहां बड़े पैमाने पर पटाखों के अवैध भंडारण का अवैध काला कारोबार बेनकाब हुआ। पुलिस अब तकनीकी और कागजी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिरकार इन जगहों पर कुल कितनी मात्रा में पटाखे छिपाकर रखे गए थे और इस पूरे नेटवर्क का संचालन किस सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था।
बिना लाइसेंस चल रहा था खतरनाक कारोबार
सामने आई तमाम जानकारियों के मुताबिक, पटाखों का यह पूरा अवैध कारोबार बिना किसी प्रशासनिक अनुमति या लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था। गोदामों के अंदर जो स्टॉक भरा हुआ था, उसमें सामान्य नहीं बल्कि बेहद भारी और बड़े खतरनाक पटाखे शामिल थे। मुख्य आरोप यह है कि इस प्रकार के जोखिम भरे व्यवसाय को अंजाम देते समय सुरक्षा से जुड़े किसी भी मानक या उपकरण की परवाह नहीं की गई। इसके कारण आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की जीवन रक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। हालांकि इस मामले में पुलिस की कानूनी और मैदानी जांच अभी भी लगातार जारी है, और इस अवैध नेटवर्क से जुड़ी पूरी और अंतिम तथ्यात्मक जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
ओमप्रकाश चौधरी के नेतृत्व में चला अभियान
इस पूरी गोपनीय और छापामार कार्रवाई को जिला स्पेशल टीम के प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी के सीधे और सख्त नेतृत्व में अंजाम दिया गया। टीम द्वारा ताबड़तोड़ छापेमारी की कार्रवाई को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद तत्काल देवली पुलिस को भी मौके पर बुला लिया गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस थानों की टीमें भी इन तीनों संदिग्ध ठिकानों पर पहुंचकर अपनी विस्तृत जांच-पड़ताल में जुट गईं। अवैध पटाखा कारोबार के इस मामले में फिलहाल एक मुख्य आरोपी को डिटेन किया जा चुका है, जिससे गहन पूछताछ के जरिए इस अवैध धंधे से जुड़े अन्य संदिग्ध लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
जब्त माल की कीमत और संख्या का आकलन जारी
इन तीनों अलग-अलग ठिकानों से बरामद किए गए पटाखों की सटीक गिनती और उनकी कुल बाजार कीमत का मूल्यांकन अभी भी आधिकारिक तौर पर किया जा रहा है। शुरुआती दौर की अनुमानित रिपोर्ट में इनकी कीमत सीधे तौर पर करोड़ों रुपये बताई जा रही है, जो इस अवैध कारोबार के बड़े पैमाने की तरफ इशारा करती है। हालांकि, पुलिस और प्रशासन द्वारा जब्त किए गए पटाखों की अंतिम और पुख्ता संख्या के साथ-साथ उनकी वास्तविक कुल कीमत की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस बल के जवान अभी भी पूरी मुस्तैदी के साथ मौके पर डटे हुए हैं और अपनी कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहे हैं।
सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल और आगे की जांच
देवली शहर के भीतर थाने के बिल्कुल सामने, रीको एरिया और दौलता मोड़ जैसे स्थानों पर सामने आए इस अवैध पटाखा प्रकरण ने स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। सबसे खास और खतरनाक पहलू यह है कि इन पटाखों का भंडारण ऐसे रिहायशी इलाकों के करीब किया गया था, जहां जरा सी भी लापरवाही किसी भीषण तबाही का कारण बन सकती थी। यदि दुर्घटनावश इन पटाखों में कभी आग लग जाती, तो वहां एक बहुत बड़ा जानलेवा हादसा घटित हो सकता था। फिलहाल डीएसटी और देवली पुलिस मिलकर इस पूरे प्रकरण की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रहे हैं। पुलिस की मुख्य प्राथमिकता यह पता लगाना है कि ये पटाखे आखिर कहां से और किसके जरिए लाए गए थे, इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं, और बिना किसी लाइसेंस के इतना विशालकाय स्टॉक कैसे जमा किया गया। इस विस्तृत जांच के पूरी तरह संपन्न होने के बाद ही इस मामले से जुड़े सभी पर्दे पूरी तरह से साफ हो सकेंगे।




















