एनएसयूआई नेता रितु बराला के समर्थन और उनके साथ हुई कथित मारपीट के मामले में जीरो नंबर एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर राजस्थान में सियासी भूचाल आ गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को एक बड़ा मुद्दा बनाते हुए जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पर लगातार तीन दिनों तक जोरदार प्रदर्शन किया। हालात यह रहे कि कड़ाके की ठंड और राजनीतिक तनाव के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने पुलिस कमिश्नरेट के परिसर में ही रातें गुजारीं, लेकिन इसके बावजूद उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी और उन्हें अंततः बिना एफआईआर दर्ज कराए ही वापस लौटना पड़ा।
क्या है पूरा विवाद और कैसे हुई शुरुआत
यह पूरा मामला गत 13 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है जिसमें एनएसयूआई की तेजतर्रार नेता रितु बराला ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। प्रदर्शन के दौरान रितु बराला ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस कर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उनके साथ मारपीट की। हालांकि घटना के कई दिनों तक राज्य के कांग्रेस नेता इस मुद्दे पर खामोश रहे, लेकिन अचानक पार्टी आलाकमान से मिले निर्देशों के बाद पूरा घटनाक्रम बदल गया। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का फोन आने के बाद प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं को रितु बराला की मदद करने और इस मामले को आक्रामकता से उठाने के निर्देश दिए गए, जिसके बाद पार्टी पूरी तरह हरकत में आ गई।
पुलिस कमिश्नरेट में डेरा और रातभर का धरना
पार्टी हाईकमान का आदेश मिलते ही राजस्थान कांग्रेस के प्रमुख चेहरे जैसे गोविंद सिंह डोटासरा, प्रताप सिंह खाचरियावास और टीकाराम जूली समेत कई वरिष्ठ नेता रितु बराला को अपने साथ लेकर सीधे जयपुर पुलिस कमिश्नरेट जा पहुंचे। इन नेताओं ने पुलिस अधिकारियों के सामने अड़ियल रुख अपनाते हुए तुरंत जीरो नंबर एफआईआर दर्ज करने की मांग की। कमिश्नरेट के उच्च अधिकारियों ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को विस्तार से समझाया कि रितु बराला इस मामले में पहले ही दिल्ली के कनॉट प्लेस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा चुकी हैं, इसलिए किसी दूसरे स्थान पर उसी घटना को लेकर दोबारा एफआईआर दर्ज किया जाना कानूनी रूप से संभव नहीं है। लेकिन कांग्रेस नेता अपनी जिद पर अड़े रहे और कमिश्नरेट के भीतर ही अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों के तमाम तर्कों को दरकिनार करते हुए फर्श पर ही रात बिताई।
हाईजैकिंग का दावा और पुलिस का दो टूक जवाब
धरने के दौरान सियासी बयानबाजी भी अपने चरम पर पहुंच गई। कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने मीडिया और अधिकारियों के सामने यहां तक दावा कर डाला कि उन्होंने जयपुर पुलिस कमिश्नरेट को अपने कब्जे में यानी हाईजैक कर लिया है और जब तक उनकी मांग पर एफआईआर दर्ज नहीं होगी, वे यहां से एक इंच भी नहीं हिलेंगे। इसके बावजूद जयपुर पुलिस के आला अधिकारियों पर इन तीखे तेवरों और राजनीतिक धमकियों का कोई असर नहीं हुआ। पुलिस ने अपनी कानूनी स्थिति को पूरी स्पष्टता के साथ दोहराते हुए साफ कर दिया कि एक ही आपराधिक घटना की देश में दो अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग एफआईआर नहीं खोली जा सकती। चूंकि इस मामले की जांच प्रक्रिया पहले से ही संबंधित थाने में गति पकड़ चुकी है, इसलिए अब नए सिरे से प्राथमिकी दर्ज करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।
लिखित जवाब मिलने के बाद समाप्त हुआ धरना
कांग्रेस नेताओं ने पुलिस के इस मौखिक आश्वासन को मानने से साफ इंकार कर दिया और अड़ गए कि पुलिस अपनी यह बात उन्हें लिखित रूप में दे। स्थिति को संभालते हुए पुलिस प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए वही पूरी बात लिखित में कांग्रेस नेताओं को सौंप दी, जिसके बाद उनके पास धरना समाप्त करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा। हालांकि धरना खत्म होने के बाद भी कांग्रेस का आक्रामक रुख जारी रहा। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि जीरो नंबर एफआईआर दर्ज करवाना हर नागरिक का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, लेकिन जयपुर की पुलिस पूरी तरह से दिल्ली में बैठे आकाओं के इशारों पर काम कर रही है और एफआईआर दर्ज करने से बुरी तरह डर रही है। उन्होंने ऐलान किया कि पुलिस की इस कार्यप्रणाली के खिलाफ उनकी पार्टी अब कानूनी लड़ाई लड़ेगी और न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के बारे में विस्तार से पढ़ने के लिए टिकट की पैरवी नहीं की तो BJP जिलाध्यक्ष को जान से मारने की धमकी से जुड़ी खबर भी देख सकते हैं, जहां एक अन्य मामले में त्वरित कार्रवाई की गई थी।


















