लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक को अपने कर्मचारियों की ओर से बार-बारी चेतावनियां मिल रही थीं कि यह ऐप बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। अदालत के रिकॉर्ड से सामने आए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि कर्मचारियों ने कंपनी के भीतर बच्चों की सुरक्षा से जुड़े खतरों को लेकर आवाज उठाई थी। इसमें बच्चों का यौन शोषण और आत्महत्या से जुड़ी सामग्री तक पहुंच जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
मार्च 2026 में दायर किए गए कर्मचारियों के बयान इस सोशल मीडिया कंपनी की बाल सुरक्षा नीतियों पर एक नया प्रकाश डालते हैं। इन दस्तावेजों के अनुसार, कर्मचारियों ने आंतरिक स्तर पर चिंता जताई थी कि नाबालिग बच्चों के वीडियो और सामग्री को टिकटॉक पर पैसे देकर खरीदा जा सकता है। इससे यह आशंका जताई गई थी कि कंपनी इस संभावित अवैध गतिविधि से मुनाफा कमा रही है। इसके अलावा, यह भी सामने आया कि नाबालिग उपयोगकर्ता उम्र से जुड़ी पाबंदियों के नियमों को दरकिनार करने के लिए लूपहोल का इस्तेमाल कर रहे थे और अपनी ऑनलाइन गतिविधियों को अभिभावकों से छिपाने में सफल हो रहे थे।
عدालत के इन दस्तावेजों से एक और चौकाने वाला तथ्य यह भी सामने आया है कि कंपनी ने अपने उपयोगकर्ताओं की सही उम्र का पता लगाने के लिए कोई सर्वे नहीं कराया था। इसके पीछे मुख्य वजह यह थी कि यदि सर्वे किया जाता, तो उसके परिणाम फेडरल ट्रेड कमीशन के साथ साझा करने पड़ते, जिससे कंपनी बचना चाहती थी। कर्मचारियों की इन तमाम चिंताओं और आंतरिक चेतावनियों के बावजूद प्रबंधन का रवैया उदासीन बना रहा, जिससे अंदरूनी स्तर पर भारी नाराजगी देखने को मिली।
इन तमाम आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक टिकटॉक प्रवक्ता ने कहा कि ये दावे मुकदमे के वकीलों के इशारे पर चुने गए हैं और इनका इस्तेमाल हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश करने के लिए किया जा रहा है। प्रवक्ता ने आगे कहा कि हमने ट्रस्ट एंड सेफ्टी विभाग में अरबों डॉलर का निवेश किया है और किशोरों के लिए परिवार पेयरिंग सहित 50 से अधिक सुरक्षा, गोपनीयता और सुरक्षा सेटिंग्स शुरू की हैं। कंपनी का दावा है कि वह अपने उपयोगकर्ताओं की भलाई के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उनके रिकॉर्ड को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
वर्तमान में टिकटॉक के साथ-साथ मेटा, गूगल और स्नैप जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियां भी संघीय अदालत में सैकड़ों मुकदमों का सामना कर रही हैं। इन सभी मुकदमों में मुख्य आरोप यह लगाया गया है कि इन कंपनियों के प्लेटफॉर्म नाबालिगों को नुकसान पहुंचाते हैं और उन्होंने युवाओं के लिए मौजूद इन ज्ञात जोखिमों को जानबूझकर छिपाया है। इन विवादों के बीच टिकटॉक ने मुकदमे की नौबत आने से पहले ही कई मामलों में समझौते भी कर ली हैं, जबकि लॉस एंजिल्स में एक ज्यूरी ने फैसला सुनाया था कि मेटा और यूट्यूब ने अपने प्लेटफॉर्म्स को युवा उपयोगकर्ताओं के लिए जानबूझकर व्यसनकारी यानी एडिक्टिव बनाया है।



















