मध्य प्रदेश में आगामी तीज-त्योहारों, सामाजिक मेलों और धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर राज्य सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर पूरी तरह से कमर कस ली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर्स, कमिश्नर्स, एसपी और आईजी की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि पर्वों के समय सुरक्षा इंतजामों में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि किसी भी जिले में कोई अप्रिय या विषम परिस्थिति उत्पन्न होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर उस जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक जिम्मेदार माने जाएंगे। बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की विभिन्न फ्लैगशिप योजनाओं और विकास कार्यों के मैदानी क्रियान्वयन का फीडबैक भी लिया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने जिलों में सभी संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करें ताकि किसी भी स्तर पर सामाजिक या सांप्रदायिक तनाव की स्थिति न पनपने पाए। इसके लिए सभी आवश्यक प्रतिबंधात्मक और सुरक्षात्मक कदम पहले ही उठा लिए जाएं। दीपावली और अन्य त्योहारों के दौरान बाजारों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर संदिग्ध व्यक्तियों तथा असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इन इलाकों में पुलिस की नियमित और प्रभावी गश्त सुनिश्चित की जाए, साथ ही महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पटाखों की बिक्री और भंडारण को लेकर भी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पटाखों की दुकानों के लिए लाइसेंस जारी करते समय सभी निर्धारित शर्तों का कड़ाई से पालन करवाया जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे विक्रेताओं की दुकानों का भौतिक सत्यापन और निरीक्षण नियमित रूप से करें। किसी भी क्षेत्र में विस्फोटक सामग्री का अवैध भंडारण न होने पाए और यदि ऐसा पाया जाता है, तो तुरंत सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए। प्रतिबंधित श्रेणी के पटाखों के क्रय-विक्रय, भंडारण और उनके इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रभावी रोक सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी दुर्घटना से बचा जा सके।
त्योहारों के सीजन में संभावित हादसों को रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह से मुस्तैद रहने को कहा गया है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा कि मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक साबित होने वाली लोकल मेड कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप के इस्तेमाल पर पूरी तरह से सख्ती से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही दीपावली पर संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थलों पर पर्याप्त संख्या में दमकल वाहनों, अग्निशमन उपकरणों और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। प्रमुख मार्गों और सार्वजनिक स्थलों पर एंबुलेंस की तैनाती के साथ ही नजदीकी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को पहले से ही अलर्ट पर रखा जाए ताकि आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। शहरों और कस्बों के सभी मुख्य मार्गों व संवेदनशील इलाकों में रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
कार्बाइड गन से होने वाले खतरे
बैठक में कार्बाइड गन से होने वाले गंभीर खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्बाइड गन के इस्तेमाल की प्रक्रिया के दौरान जब कैल्शियम कार्बाइड पानी के संपर्क में आता है, तो उससे निकलने वाली एसीटिलीन गैस अत्यधिक ज्वलनशील होती है। यह गैस हल्की सी चिंगारी के संपर्क में आते ही जोरदार विस्फोट का कारण बन सकती है। इस विस्फोट के दौरान प्लास्टिक और धातु के छोटे-छोटे टुकड़े छिटककर बाहर निकलते हैं जो व्यक्ति की आंखें, चेहरे और त्वचा को बुरी तरह घायल कर सकते हैं। एसीटिलीन गैस के जलने से त्वचा के गंभीर रूप से झुलसने का भी भारी खतरा रहता है। इस खतरनाक पहलू को देखते हुए लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2025 में एक विस्तृत एडवाइजरी भी जारी की जा चुकी है।
पटाखों के भंडारण और बिक्री पर कड़ी नजर
मुख्यमंत्री ने बैठक में दोहराया कि सभी जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पटाखों के अवैध भंडारण और उनकी खरीद-फरोख्त पर पैनी नजर रखें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे व्यापारियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और साथ ही आम जनता की जान-माल की सुरक्षा से भी कोई समझौता न हो। त्योहारी सीजन के दौरान आग लगने जैसी दुर्घटनाओं से निपटने के लिए तमाम जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उत्सव का माहौल शांतिपूर्ण ढंग से बीते।
खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी पर सख्त शिकंजा
त्योहारों के मद्देनजर मिलावटखोरों के खिलाफ राज्यभर में सख्त अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मिलावटी मावा, घी, पनीर और मिठाइयों की बिक्री किसी भी कीमत पर नहीं होनी चाहिए। बैठक के दौरान यह जानकारी दी गई कि अब तक मिलावट के मामलों में कार्रवाई करते हुए 17 लाइसेंस निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि 42 मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है। प्रशासन लगातार ऐसे तत्वों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कस रहा है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य प्रतिष्ठानों की सघन जांच के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। यदि खाद्य पदार्थों में मिलावट का संदेह हो, तो उनके नमूने लिए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर खाद्य सामग्री को तुरंत जब्त किया जाए। जिलों में इसके लिए विशेष टीमों का गठन किया जाए जो लगातार निरीक्षण करती रहें। हालांकि यह भी हिदायत दी गई कि सैंपल लेने और जब्ती की इस कार्रवाई के दौरान किसी भी व्यापारी को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। इसके अलावा जो प्रतिष्ठान अस्वच्छ और अस्वास्थ्यकर वातावरण में खाद्य पदार्थों का निर्माण या बिक्री कर रहे हैं, उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए।



















