कोटा जिले में एक ऐसा शातिर गिरोह सक्रिय था जो मौत को दावत देते हुए हाईटेंशन विद्युत लाइनों से एल्युमिनियम और जर्मन तार चोरी करने का काम करता था। पुलिस की गिरफ्त में आए इन बदमाशों के तौर-तरीके इतने खतरनाक थे कि वे चलती विद्युत लाइनों की सप्लाई बंद कर कुछ ही मिनटों में हजारों किलोग्राम तार काटकर गायब हो जाते थे। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से स्थानीय किसानों और विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बड़ी राहत की सांस ली है।
इस तरह देते थे वारदात को अंजाम
पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि बदमाशों का काम करने का तरीका बेहद अनोखा और जोखिम भरा था। गिरोह के सदस्य सबसे पहले खेतों और वीरान इलाकों में जाकर हाईटेंशन लाइनों की पूरी रेकी करते थे। इसके बाद वे तारों पर रस्सियां फेंककर स्पार्किंग के जरिए यह जांच करते थे कि लाइन चालू है या नहीं। यदि तारों में करंट दौड़ रहा होता था, तो वे ट्रांसफार्मर का जंपर उड़ाकर बिजली की पूरी आपूर्ति को ठप कर देते थे। सुनसान जगहों पर सीसीटीवी कैमरों के न होने का फायदा उठाकर वे अपनी गाड़ियों से वहां पहुंचते थे और कुछ ही मिनटों में कीमती तार काटकर फरार हो जाते थे।
पांच आरोपी गिरफ्तार और भारी मात्रा में तार बरामद
कोटा ग्रामीण पुलिस ने एक विशेष टीम बनाकर इस गिरोह के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। पुलिस ने इस दौरान पांच शातिर बदमाशों पूरण बागरी, सुल्तान बागरी, गोलू बागरी के अलावा चोरी का माल खरीदने वाले कबाड़ी जाहिद और शाहिद को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों के पास से लाखों रुपये मूल्य का 1200 किलोग्राम से अधिक चोरी किया हुआ विद्युत तार बरामद किया गया है। ये शातिर चोर मुख्य रूप से खेतों में लगे खंभों पर तनी 33 केवी और 11 केवी की हाईटेंशन लाइनों को अपना निशाना बनाते थे।
कुल 77 वारदातों का हुआ पर्दाफाश
यह गिरोह कोटा ग्रामीण के अलावा बारां और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी आतंक का पर्याय बन चुका था। कोटा ग्रामीण के सिमलिया, देवलीमांझी, कैथून और आसपास के तमाम इलाकों में इस गैंग ने किसानों और बिजली विभाग की नींद उड़ा रखी थी। कोटा ग्रामीण एसपी सुजीत शंकर के मार्गदर्शन में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ है और अब तक कुल 77 चोरी के मामलों से पर्दा उठ चुका है। पुलिस फिलहाल सभी आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और भी कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

















