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गुरुशिखर की तलहटी में बसी ओरिया पंचायत: पर्यटन का खजाना होने के बावजूद पगडंडियों पर कट रही जिंदगीराजस्थान
20 अक्तू॰ 2026, 5:54 am (2 घंटे पहले)· 0

गुरुशिखर की तलहटी में बसी ओरिया पंचायत: पर्यटन का खजाना होने के बावजूद पगडंडियों पर कट रही जिंदगी

माउंट आबू की ओरिया ग्राम पंचायत राज्य में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित है, जहां अरावली की चोटियों पर पर्यटन से भरपूर आमदनी के बाद भी कई गांव पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं।

सिरोही जिले में स्थित मशहूर पर्वतीय स्थल माउंट आबू अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और ठंडी आबोहवा के लिए जाना जाता है। इस हिल स्टेशन पर नगरपालिका प्रशासन के समानांतर एक ऐसी भी ग्राम पंचायत काम कर रही है, जो पूरे राजस्थान में समुद्र तल से सर्वाधिक ऊंचाई पर दर्ज है। ओरिया नाम की इस ग्राम पंचायत के दायरे में अरावली पर्वत श्रृंखला की सबसे ऊंची चोटी गुरुशिखर आती है, जिसकी भौगोलिक ऊंचाई समुद्र तल से 1,722 मीटर दर्ज की गई है। इस इलाके में अचलगढ़ दुर्ग, ब्रह्माकुमारी संस्थान का प्रसिद्ध पीस पार्क और मनोरम शूटिंग पॉइंट जैसे कई आकर्षण मौजूद हैं, जो साल भर सैलानियों को अपनी ओर खींचते हैं।

भूगोल, आबादी और वीरान हुए गांवों की दास्तान

ओरिया ग्राम पंचायत के अंतर्गत कुल नौ गांव दर्ज हैं। इन राजस्व गांवों में ओरिया, अचलगढ़, उतरज, गुरुशिखर, शेरगांव, जवाई, आरना, आकी और ब्लॉक नंबर 3 शामिल हैं। अरावली की पथरीली पहाड़ियों में फैली इस ग्राम पंचायत के प्रशासनिक आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2011 की जनगणना में यहां की कुल आबादी 1,159 दर्ज थी। ग्राम विकास अधिकारी अशोक सिंह के अनुसार, मौजूदा समय में पंचायत क्षेत्र के भीतर मतदाताओं की तादाद 2,200 तक पहुंच चुकी है और समग्र आबादी तकरीबन 3,000 के करीब आंकी जा रही है। समूचे पंचायत क्षेत्र में लगभग 200 से 250 रिहायशी मकान बने हुए हैं।

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दिलचस्प बात यह है कि कागजों पर नौ गांव होने के बावजूद दो गांव लंबे अरसे से पूरी तरह जनशून्य पड़े हैं। आकी और ब्लॉक नंबर 3 नाम के इन दोनों गांवों में आज एक भी बाशिंदा नहीं रहता। स्थानीय मान्यताओं और पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 1930 के आसपास इन दोनों बस्तियों में एक भयंकर महामारी फैली थी। उस दौर में चिकित्सा सुविधाओं का भारी अभाव था और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण जान बचाने के लिए लोगों ने इन गांवों को हमेशा के लिए छोड़ दिया। इसके बाद ये इलाके कभी दोबारा नहीं बस सके।

सड़कविहीन रास्ते और 12 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा

पंचायत के आबाद गांवों में शेरगांव और उतरज की भौगोलिक स्थिति बेहद दुर्गम मानी जाती है। शेरगांव समुद्र तल से लगभग 1,500 मीटर की ऊंचाई पर टिका हुआ है। इन दोनों ही गांवों तक आज भी मोटरगाड़ी पहुंचने लायक पक्का सड़क संपर्क विकसित नहीं हो सका है। नतीजतन, यहां रहने वाले ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों और बाजार तक आने के लिए 7 से 12 किलोमीटर का दुर्गम पहाड़ी फासला पगडंडियों के सहारे पैदल ही तय करना पड़ता है।

स्थानीय बाशिंदों को लोकतंत्र के महापर्व में भागीदारी निभाने के लिए भी भारी पसीना बहाना पड़ता है। शेरगांव के निवासियों को मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए लगभग 5 किलोमीटर की चढ़ाई और उतराई पैदल चलकर उतरज गांव जाना पड़ता है। इसके अलावा, सर्दियों के महीनों में जब पारा तेजी से नीचे लुढ़कता है, तो इस ऊंचाई पर हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ती है। मूलभूत सुविधाओं की किल्लत और बर्फीली हवाओं के चलते कई स्थानीय परिवार ठंड के मौसम में पहाड़ों से उतरकर नीचे के सुरक्षित इलाकों में शरण लेने पर मजबूर हो जाते हैं।

पर्यटन से भरपूर राजस्व, मगर बुनियादी ढांचे की जंग जारी

ओरिया पंचायत की आर्थिकी और पहचान यहां फैले ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों पर निर्भर है। इस क्षेत्र में पौराणिक अचलगढ़ का किला, अचलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक जैन मंदिर, मां काली मंदिर और चामुंडा माता का पावन स्थल मौजूद हैं। इसके साथ ही एक गुफा भी मौजूद है, जिसे भीम गुफा कहा जाता है और मान्यता है कि इसका नाता महाभारत काल के महाबली भीम से है। इसके अलावा पीस पार्क भी देश-विदेश के आध्यात्मिक पर्यटकों को सुकून की तलाश में यहां लाता है।

ग्राम पंचायत को टोल नाके और पर्यटन आधारित कारोबारी गतिविधियों से ठीक-ठाक कमाई होती है। यहां के आम परिवार मुख्यतः खेती, मवेशी पालन और टूरिज्म से जुड़ी छोटी-मोटी नौकरियों या दुकानों से अपना गुजर-बसर करते हैं। विडंबना यह है कि राजस्थान की सबसे ऊंची और पर्यटन से भरपूर कमाई करने वाली इस पंचायत के भीतरी गांवों में शिक्षा, अस्पताल और बारहमासी पक्की सड़क जैसी बुनियादी जरूरतें आज भी एक बड़ा सपना बनी हुई हैं।

सवाल-जवाब

राजस्थान की सबसे ऊंची ग्राम पंचायत कौन सी है?
सिरोही जिले के माउंट आबू क्षेत्र में स्थित ओरिया राजस्थान की सबसे ऊंची ग्राम पंचायत है।
इस ग्राम पंचायत के दायरे में कौन सी प्रसिद्ध पर्वत चोटी आती है?
ओरिया पंचायत क्षेत्र में अरावली पर्वतमाला की सर्वोच्च चोटी गुरुशिखर स्थित है, जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 1,722 मीटर है।
ओरिया ग्राम पंचायत में कुल कितने गांव शामिल हैं?
इस पंचायत में कुल 9 गांव आते हैं, जिनमें से आकी और ब्लॉक नंबर 3 गांव करीब 1930 के दशक से वीरान पड़े हैं।
शेरगांव के ग्रामीणों को वोट डालने के लिए कितनी दूरी पैदल चलनी पड़ती है?
शेरगांव के बाशिंदों को मतदान करने के लिए लगभग 5 किलोमीटर का पहाड़ी रास्ता पैदल चलकर उतरज गांव जाना पड़ता है।
ओरिया पंचायत की आय का मुख्य स्रोत क्या है?
इस पंचायत को मुख्य रूप से स्थानीय टोल नाके और पर्यटन स्थलों से जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों से राजस्व मिलता है।
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टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·57 मिनट पहले

गुरुशिखर जैसी मशहूर जगह के पास आज भी गांवों में सड़क न होना थोड़ा अजीब लगता है। सैलानियों की आवाजाही इतनी है, तो रास्ते की दिक्कत अब तक क्यों नहीं सुलझी?

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

गुरुशिखर जैसी मशहूर जगह के पास आज भी लोग सड़क के बिना जी रहे हैं और 12 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं, यह सोचकर हैरानी होती है। जब सरकार हर तरफ विकास का दावा करती है, तो इतने साल बीत जाने के बाद भी इन गांवों तक गाड़ियां क्यों नहीं पहुंच पाईं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। जब मैं पिछली बार माउंट आबू गया था, तब कुछ स्थानीय लोगों ने बताया था कि सर्दियों में इन रास्तों पर चलना कितना मुश्किल हो जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

पर्यटन से इतनी कमाई के बाद भी सड़क न हो, बात गले उतरती नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन, बात बिल्कुल सही है। पर इतने सालों से यहां कोई सड़क क्यों नहीं बन पाई, बजट की कमी है या कुछ और?

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