जयपुर। राजस्थान में औद्योगिक क्षेत्रों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) ने एक नई पहल की शुरुआत की है। इस व्यवस्था के तहत अब पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक के माध्यम से औद्योगिक जमीनों की पैमाइश और निगरानी की जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक इलाकों में मौजूद जमीनों, भूखंडों और बुनियादी ढांचे का सटीक और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, जिससे प्रशासनिक कामकाज में तेजी आ सके और अधिकारियों को किसी भी भूखंड की वास्तविक स्थिति की जानकारी एक क्लिक पर मिल सके।
पहले चरण में 50 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का सर्वे
इस महत्वाकांक्षी योजना के शुरुआती चरण के तहत लगभग 50 वर्ग किलोमीटर के भूभाग का ड्रोन सर्वेक्षण कराया जाएगा। इस विशेष सर्वे के दौरान संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित सभी प्रकार के भूखंडों, भवनों, आंतरिक सड़कों, बिजली वितरण नेटवर्क और अन्य तमाम बुनियादी सुविधाओं का बारीकी से डाटा जुटाया जाएगा। ड्रोन कैमरों की मदद से ली गई हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों और मैपिंग के जरिए इन इलाकों की जमीनी हकीकत का डिजिटल ब्योरा तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में मदद मिलेगी।
प्रत्येक भूखंड के लिए बनेगी डिजिटल एविडेंस शीट
ड्रोन सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रीको की तरफ से हर एक औद्योगिक भूखंड के लिए एक अलग और विशेष डिजिटल एविडेंस शीट तैयार की जाएगी। इस दस्तावेज़ में उस भूखंड से जुड़ी हर अहम जानकारी दर्ज होगी, जिसमें उसका विशिष्ट पहचान नंबर, ज़मीन की सटीक सीमाएं, उस पर हुए निर्माण की मौजूदा स्थिति और भूखंड का असल इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है, इसका पूरा विवरण शामिल होगा। इसके अलावा रीको के नियमानुसार अन्य जरूरी तकनीकी और प्रशासनिक विवरण भी इस शीट में जोड़े जाएंगे, जिससे भूमि उपयोग का विश्लेषण करना आसान हो जाएगा।
तैयार होंगे उन्नत 2D नक्शे और 3D मॉडल
सर्वे के दौरान ड्रोन के जरिए एकत्र किए गए विशाल आंकड़ों और विजुअल्स के आधार पर औद्योगिक क्षेत्रों के अत्याधुनिक 2D डिजिटल नक्शे और जीवंत 3D मॉडल विकसित किए जाएंगे। इन सभी तकनीकी आंकड़ों को भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के साथ एकीकृत किया जाएगा। इस एकीकरण से अधिकारियों को औद्योगिक क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को कंप्यूटर स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से समझने, उपलब्ध संसाधनों का आकलन करने और नीतिगत फैसले लेने में काफी सहूलियत होगी।
बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक संसाधनों का भी होगा रिकॉर्ड
इस व्यापक सर्वेक्षण में केवल भूखंडों और इमारतों को ही शामिल नहीं किया गया है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों की तमाम बुनियादी सुविधाओं और वहां मौजूद प्राकृतिक संपदा का भी पूरा हिसाब रखा जाएगा। इसके तहत सड़कों की लंबाई, बिजली ढांचे की स्थिति, पेड़-पौधों और अन्य प्रमुख स्थलों की पहचान कर उनकी गिनती और विवरण दर्ज किए जाएंगे। रीको का मानना है कि आधुनिक भू-स्थानिक तकनीक के इस इस्तेमाल से औद्योगिक क्षेत्रों का नियोजन और प्रबंधन पूरी तरह बदल जाएगा और अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए सटीक तथ्य आधारित डिजिटल जानकारी मिल सकेगी।




















