राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे सख्त अभियानों के बीच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी ने बांसवाड़ा जिले में एक बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी सीजेएम न्यायालय में प्रथम श्रेणी लिपिक यानी रीडर के रूप में कार्यरत संदीप कुमार नानावटी और ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड चालक राहुल चंदेल को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों पर एक विचाराधीन मामले में राहत देने के नाम पर अवैध रूप से 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगने और लेने का गंभीर आरोप है, जिससे स्थानीय न्यायिक परिसर और प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मच गई है।
शिकायत और रिश्वत की मांग का पूरा खेल
इस पूरे मामले का खुलासा एक परिवादिया की ओर से दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के आधार पर हुआ। परिवादिया का आरोप था कि अदालत में चल रहे एक मुकदमे में उसकी जमानत सुरक्षित रखने, उसे बाद में खारिज न होने देने और मुकदमे के दौरान सजा से बचाने के साथ-साथ भविष्य में भी हरसंभव मदद पहुँचाने का झांसा दिया गया था। इसी एवज में आरोपियों द्वारा लगातार पैसों की मांग की जा रही थी। एसीबी के पास जब यह शिकायत पहुँची, तो एजेंसी ने बेहद गोपनीय तरीके से इसका सत्यापन कराया। सत्यापन की इस प्रक्रिया के दौरान ही 40 हजार रुपये की रिश्वत मांगे जाने की पूरी बात बिल्कुल पुख्ता हो गई। इसके अलावा, शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई कि आरोपियों ने खर्चे-पानी के नाम पर पहले ही 2 हजार रुपये की राशि ले ली थी।
जाल बिछाकर रंगे हाथों दबोचा
शिकायत के सही पाए जाने और रिश्वत की माँग की पुष्टि होने के बाद, एसीबी की एक विशेष टीम ने आरोपियों को पकड़ने के लिए पूरी योजना तैयार की और एक सुनियोजित ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। तय योजना के मुताबिक जब रिश्वत की रकम का लेन-देन हो रहा था, तभी एसीबी की टीम ने जाल बिछाकर होमगार्ड चालक राहुल चंदेल को 40 हजार रुपये की नगद रिश्वत लेते हुए मौके पर ही रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद पूछताछ और मौके पर मिले तमाम ठोस तथ्यों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के रीडर संदीप कुमार नानावटी को भी इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता और संलिप्त मानते हुए गिरफ्तार कर लिया गया। अब एसीबी यह गहराई से पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध वसूली के खेल में दोनों की व्यक्तिगत भूमिका क्या थी और क्या इस पूरे प्रकरण में न्यायालय परिसर या बाहर का कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।
निवास स्थानों पर छापेमारी और आगे की कानूनी कार्रवाई
एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के दिशा-निर्देशों के तहत यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक राज्यव्यापी अभियान का एक हिस्सा है। एसीबी उदयपुर रेंज के प्रभारी पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित के कड़े सुपरविजन में और डीएसपी रतन सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में इस ट्रैप को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद, एसीबी की अलग-अलग टीमों ने दोनों आरोपियों के आधिकारिक और निजी निवास स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू कर दिया है ताकि अन्य संपत्तियों या दस्तावेजों का पता लगाया जा सके। एसीबी ने इस संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत औपचारिक मामला दर्ज करके आगे की विस्तृत अनुसंधान प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई अब पूरी तरह से तलाशी के दौरान मिलने वाले सबूतों और जांच के निष्कर्षों पर ही निर्भर करेगी।

















