कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और उन्नत उपकरणों का प्रयोग किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। जहां पारंपरिक तौर-तरीकों से खेती करने में किसानों को अत्यधिक शारीरिक श्रम और लंबे समय की आवश्यकता होती है, वहीं बाजार में आ रहे नए कृषि यंत्र खेती के कई कठिन कार्यों को बेहद आसान बना रहे हैं। इन दिनों कोडरमा जिले के किसान आलू की खेती की तैयारियों में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। ऐसे समय में जिले के एक प्रगतिशील किसान कृष्णा वर्मा ने आधुनिक कृषि उपकरण का बेहतरीन उपयोग करके इलाके के अन्य किसानों के सामने एक बेहतरीन मिसाल पेश की है।
आलू की खेती में मेढ़ मेकर का अनूठा प्रयोग
कृष्णा वर्मा ने आलू की फसल के लिए खेत को तैयार करने की प्रक्रिया में 'मेढ़ मेकर' नामक विशेष कृषि उपकरण का इस्तेमाल किया है। इस आधुनिक यंत्र की सहायता से उन्होंने केवल 20 से 25 मिनट के भीतर लगभग 20 डिसमिल जमीन पर आलू की बुवाई के लिए मेढ़ तैयार कर डाले। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यदि इसी क्षेत्रफल में पारंपरिक तरीकों से मेढ़ बनाने का प्रयास किया जाता, तो कम से कम दो से तीन मजदूरों को पूरा दिन यानी घंटों मेहनत करनी पड़ जाती। इस आधुनिक तकनीक के प्रयोग से न केवल समय की भारी बचत हुई, बल्कि किसानों के पसीने बहाने वाली मेहनत में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
आलू की फसल में मेढ़ निर्माण की प्रक्रिया
आलू की सफल पैदावार के लिए खेत की सही प्रकार से तैयारी करना सबसे महत्वपूर्ण चरणों में गिना जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत सबसे पहले खेत की गहरी और अच्छी तरह से जुताई की जाती है। इसके बाद खेत में रोटावेटर चलाया जाता है ताकि मिट्टी पूरी तरह से भुरभुरी हो जाए और आलू के बीजों के विकास के लिए एकदम अनुकूल वातावरण व स्थिति तैयार हो सके। जब खेत पूरी तरह भुरभुरा होकर तैयार हो जाता है, तब जाकर मेढ़ बनाने का चरण शुरू होता है। पुराने या पारंपरिक तरीकों से मेढ़ तैयार करने में किसानों को काफी अधिक शारीरिक मशक्कत करनी पड़ती है। पूरे खेत में एक समान आकार की मेढ़ तैयार करने के लिए भारी मात्रा में समय और मानव श्रम दोनों की जरूरत पड़ती है जो अक्सर किसानों के लिए थकाऊ साबित होता है।
सिर्फ 8500 रुपये में की आधुनिक उपकरण की खरीदारी
खेती-किसानी में काम आने वाले आधुनिक उपकरणों की उपयोगिता और उनके फायदों को अच्छी तरह समझते हुए कृष्णा वर्मा ने कुछ समय पहले ही मेढ़ मेकर के बारे में पूरी जानकारी हासिल की और इसे बाजार से खरीद लिया। स्थानीय कोडरमा बाजार में इस आधुनिक कृषि यंत्र की अनुमानित कीमत करीब 8500 रुपये बताई गई है। उन्होंने इस यंत्र का इस्तेमाल अपने खेतों में आलू की बुवाई से पहले की तैयारियों के दौरान किया। कृष्णा वर्मा के बताए अनुसार, जब खेत की दो से तीन बार जुताई करने के बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लिया गया, तब उन्होंने इस मेढ़ मेकर की मदद से खेत में मेढ़ बनाने का काम शुरू किया। इस मशीन के प्रयोग से लगभग 20 डिसमिल जमीन पर मेढ़ों का निर्माण कार्य महज 20 से 25 मिनट के भीतर ही सफलतापूर्वक पूरा हो गया।
एक समान मेढ़ बनने से कृषि कार्य में मिली सुविधा
कृष्णा वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मेढ़ मेकर का उपयोग करने का सबसे बड़ा और मुख्य फायदा यह देखने को मिला कि खेत में जितनी भी मेढ़ बनीं, वे सभी लगभग एक समान और करीने से तैयार हुईं। इस यंत्र के प्रयोग से पूरा खेत बेहद व्यवस्थित और सुंदर दिखाई देने लगा, जिससे आगे चलकर आलू लगाने की पूरी प्रक्रिया भी काफी सरल हो गई। पुराने समय में इस काम को अंजाम देने के लिए दो से तीन मजदूरों को सुबह से शाम तक दिनभर कड़ा परिश्रम करना पड़ता था, लेकिन इस आधुनिक कृषि यंत्र के आ जाने से अब वही काम अत्यंत कम समय और बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के पूरा हो जाता है, जिससे किसानों का खेती के प्रति रुझान और अधिक बढ़ रहा है।





















