देश के तीन प्रमुख राज्यों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं पर केंद्रीय वित्तीय जांच एजेंसियों ने शिकंजा कसते हुए व्यापक स्तर पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई के तहत राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के कई चिकित्सा संस्थानों के परिसरों में पहुंचकर अधिकारियों ने दस्तावेजों की छानबीन शुरू की। इस पूरी कार्रवाई को सुबह के समय अंजाम दिया गया, जब जांच दलों ने औचक रूप से विभिन्न अस्पतालों के परिसरों में प्रवेश किया। जांच के दायरे में आने वाले इन संस्थानों में वित्तीय लेनदेन, बहीखातों और डिजिटल रिकॉर्ड की गहनता से पड़ताल की जा रही है ताकि आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्य जुटाए जा सकें।
राजस्थान के तीन शहरों में बड़े पैमाने पर दबिश
राजस्थान के भीतर जयपुर, बहरोड़ और झुंझुनूं जैसे प्रमुख शहरों में स्थित नामचीन स्वास्थ्य संस्थानों को इस कार्रवाई के केंद्र में रखा गया। राजधानी जयपुर के मानसरोवर इलाके में स्थित अमर मेडिकल एंड रिसर्च सेंटर पर आयकर विभाग की टीम पहुंची। इसी तरह बहरोड़ क्षेत्र में स्थित पार्क कैलाश हॉस्पिटल और झुंझुनूं के चूरू रोड पर संचालित होने वाले आरआर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भी अधिकारियों ने डेरा डाला। इन सभी स्थानों पर सुबह तड़के ही जांच दलों का पहुंचना हुआ, जिससे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति या संदेहास्पद गतिविधि को रोकने के लिए संबंधित अस्पतालों के मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों पर स्थानीय पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी।
पड़ोसी राज्यों हरियाणा और पंजाब तक फैला दायरा
यह वित्तीय जांच सिर्फ राजस्थान तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसका दायरा पड़ोसी राज्यों तक भी फैला हुआ नजर आया। हरियाणा के फरीदाबाद शहर में आयकर विभाग की टीमों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए दस्तावेजों की जांच जारी रखी। वहीं दूसरी ओर, पंजाब के मोहाली, बठिंडा और पटियाला जिलों में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीमों ने विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे। पार्क मेडिवर्ल्ड से जुड़े कई अन्य व्यावसायिक परिसरों और ठिकानों को भी इस जांच के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कार्रवाई किसी एक संस्थान तक सीमित न होकर एक व्यापक नेटवर्क से जुड़ी हो सकती है।
अधिग्रहण और नकद भुगतान को लेकर संदेह
केंद्रीय एजेंसियों की इस बड़ी कार्रवाई के पीछे मुख्य वजह पार्क ग्रुप द्वारा हाल के दिनों में किए गए कई अस्पतालों के अधिग्रहण बताए जा रहे हैं। जांच से जुड़े जानकारों का मानना है कि इन व्यावसायिक सौदों के दौरान कथित तौर पर भारी मात्रा में नकद भुगतान किए जाने का संदेह है। अधिकारी इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि इन परिसंपत्तियों को खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया धन कहां से आया और इसका वित्तीय स्रोत क्या था। इसके अलावा, बीस करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि की कर चोरी होने की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव हो सकेगी।
सर्वर रूम और डिजिटल डेटा की तकनीकी जांच
अस्पतालों के भीतर केवल कागजी दस्तावेजों तक ही जांच सीमित नहीं रही, बल्कि तकनीकी पहलुओं पर भी पूरा जोर दिया गया। आयकर विभाग की टीमों ने संबंधित संस्थानों के सर्वर रूम और रिकॉर्ड रूम में पहुंचकर कंप्यूटर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को अपने कब्जे में लिया। डिजिटल डेटा की क्लोनिंग और फाइलों की स्कैनिंग के जरिए वित्तीय लेन-देन का कच्चा चिट्ठा खंगाला जा रहा है। झुंझुनूं के आरआर मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में पंद्रह से अधिक अधिकारियों की टीम ने मोर्चा संभाला और वहां कार्यरत कर्मचारियों को कंप्यूटरों को छूने से साफ मना कर दिया गया ताकि किसी भी प्रकार की डिजिटल छेड़छाड़ या डेटा क्षति को रोका जा सके। बहरोड़ के अस्पताल में भी मुख्य परिचालन अधिकारी और लेखा विभाग के प्रमुखों से लंबी पूछताछ की गई।
सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के दावों की पड़ताल
वित्तीय अनियमितताओं की तह तक पहुंचने के लिए जांच अधिकारियों ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत अस्पतालों द्वारा किए गए दावों की फाइलों को भी खंगालना शुरू किया है। इनमें पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना यानी ECHS, राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी RGHS, मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना यानी MAA और राष्ट्रीय स्तर की आयुष्मान भारत योजना से जुड़े तमाम बिलिंग रिकॉर्ड और भुगतान विवरण शामिल हैं। यह देखने का प्रयास किया जा रहा है कि इन कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर जो दावे पेश किए गए थे, उनमें किसी प्रकार की वित्तीय धांधली या फर्जीवाड़ा तो नहीं किया गया है। तमाम बैंक खातों के स्टेटमेंट और टैक्स भुगतान के पुराने रिकॉर्ड्स का मिलान किया जा रहा है ताकि वित्तीय पारदर्शिता का पूरा सच सामने आ सके।























