पवित्र शारदीय नवरात्रि 2026 का आज तीसरा दिन है। इस पावन अवसर पर मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप देवी चंद्रघंटा की विधि-विधान से आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की सच्चे मन से उपासना करने से साधक के जीवन के समस्त कष्ट, बाधाएं और संकट शीघ्र समाप्त हो जाते हैं तथा घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। आज के इस विशेष दिन पर माता रानी की पूजा-अर्चना करने और उनके मंत्रों का सविधि जाप करने के साथ ही उन्हें कुछ खास चीजों का भोग अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसी गहरी मान्यता है कि इन खास भोगों से माता रानी अति प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को उनकी इच्छा के अनुसार मनोवांछित फलों की प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि नवरात्रि के इस तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को किन-किन चीजों का भोग लगाया जाना चाहिए।
माता रानी को अर्पित करें ये विशेष भोग
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए कई तरह की सात्विक और पसंदीदा चीजों का भोग लगाने की परंपरा है, जिससे साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
- दूध से बनी चीजें: नवरात्रि के इस तीसरे दिन माता रानी को विशेष रूप से दूध से निर्मित सामग्रियां अर्पित करनी चाहिए। मां चंद्रघंटा को स्वादिष्ट खीर अथवा दूध से बनी अन्य शुद्ध मिठाइयों का भोग लगाना बहुत उत्तम माना जाता है।
- बताशा और मिश्री: यदि आपके पास अन्य मिठाइयां उपलब्ध न हों, तो आप माता को बताशा या फिर शुद्ध मिश्री भी अर्पित कर सकते हैं। यह भोग भी अत्यंत सरल और प्रिय माना गया है।
- मखाने की खीर: देवी मां को मखाने से तैयार की गई खीर का भोग लगाना भी बेहद शुभ और अत्यंत फलदायी साबित होता है। इससे मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- शहद: मां चंद्रघंटा को शहद का भोग चढ़ाना भी बहुत लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि शहद अर्पित करने से देवी मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को उत्तम आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
- सफेद रंग की मिठाई: दुर्गा माता के इस तीसरे स्वरूप को सफेद रंग की सामग्रियां अति प्रिय हैं। इस दिन आप गाय के दूध से बनी खीर, किसी भी प्रकार की सफेद रंग की मिठाई या फिर रसमलाई का भोग भी माता को लगा सकते हैं।
तीसरे दिन रखें इन बातों का ध्यान और करें ये कार्य
मां चंद्रघंटा की पूजा के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने और पूजन सामग्री अर्पित करने से देवी मां की असीम कृपा प्राप्त होती है और सभी कार्य सफल होते हैं।
- वस्त्र और रंग: आज के दिन पूजा-पाठ करते समय सफेद, गोल्डन, लाल या फिर पीले रंग के वस्त्र धारण करना बेहद शुभ और अनुकूल माना जाता है।
- फूलों का अर्पण: देवी मां को लाल रंग के पुष्प अर्पित करें, जिसमें खासतौर से गुड़हल का फूल शामिल होना चाहिए। गुड़हल का फूल माता रानी को बहुत अधिक प्रिय है।
- रोली और सिंदूर: पूजा के समय मां दुर्गा को रोली, सिंदूर, अक्षत चढ़ाएं और माथे पर कुमकुम का तिलक लगाएं।
- पान का पत्ता: मां अंबे को एक साफ पान के पत्ते पर सुपारी, लौंग और इलायची रखकर सविधि अर्पित करें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि अर्पित किया जाने वाला पान का पत्ता कहीं से भी कटा-फटा नहीं होना चाहिए।
- सुहाग सामग्री: माता रानी को सुहाग से जुड़ी सभी आवश्यक सामग्री जैसे कि कांच की हरी-लाल चूड़ियां, आलता, बिंदी और सिंदूर आदि अवश्य चढ़ाएं।
मां चंद्रघंटा का चमत्कारी मंत्र
पूजन के दौरान मां चंद्रघंटा के इस पावन मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करना चाहिए, जिससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
- पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकास्त्रकरयुक्ता। प्रसादं तनु मह्यं चंद्रघंतेति विश्रुता॥
यह दिन माता की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है और सच्चे भाव से की गई पूजा कभी भी निष्फल नहीं होती है।



















