सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर पिछले कुछ दिनों से भाखड़ा नांगल बांध की सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक खबर तेजी से वायरल हो रही है। इंटरनेट पर साझा किए जा रहे एक वीडियो में दावा किया गया है कि भाखड़ा नांगल बांध की मुख्य दीवार में 1.77 इंच का खतरनाक झुकाव आ चुका है। वीडियो पोस्ट करने वाले यूजर यह दावा कर रहे हैं कि यदि बांध की दीवार टूटी तो भारत की राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों में विनाशकारी बाढ़ आ जाएगी। इस प्रकार की भ्रामक खबरों के कारण आम लोगों और जलसंभर क्षेत्रों के निवासियों के बीच काफी डर और असुरक्षा का वातावरण बन गया था।
सोशल मीडिया के बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए दावों की असलियत
प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक इकाई ने इस पूरे मामले की गहनता से पड़ताल करने के बाद इंटरनेट पर तैर रहे इन दावों को पूरी तरह से भ्रामक और गलत ठहराया है। आधिकारिक आंकड़ों की जांच में पाया गया कि 27 अगस्त को भाखड़ा नांगल बांध की संरचना में दर्ज किया गया वास्तविक झुकाव 1.77 इंच नहीं, बल्कि मात्र 0.86 इंच था। पीआईबी ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर आंकड़े को काफी बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया है ताकि लोगों के बीच बेवजह सनसनी और घबराहट फैलाई जा सके।
वैज्ञानिक मानकों और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था की स्थिति
जल संसाधन प्रबंधन और बांध सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी विशाल बांध की स्थिति का आकलन केवल दीवार के झुकाव के किसी एक आंकड़े के आधार पर नहीं किया जा सकता। बड़े बांधों की मजबूती और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चौबीसों घंटे आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और टेलीमेट्री उपकरणों के जरिए निगरानी की जाती है। बांध की सुरक्षा जांचने के लिए चार मुख्य मानकों को आधार बनाया जाता है। इनमें बांध के ढांचे पर पड़ने वाला तनाव, संरचना में होने वाला खिंचाव, जलभराव के कारण अंदरूनी जल दाब और पानी का सूक्ष्म रिसाव शामिल हैं। पीआईबी के फैक्ट चेक में यह साबित हुआ है कि 27 अगस्त की माप के दौरान ये सभी चारों सुरक्षा मानक सरकार द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा के बिल्कुल भीतर पाए गए हैं।
उत्तर भारत की जीवनरेखा और आधारभूत ढांचा
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलुज नदी के प्रवाह पर स्थित भाखड़ा बांध स्वतंत्र भारत की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में से एक है। यह विशाल बांध उत्तरी राज्यों के विस्तृत कृषि क्षेत्रों को सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर जल विद्युत ऊर्जा का उत्पादन भी करता है। देश की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में इस परियोजना के बेहद महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए इससे संबंधित किसी भी भ्रामक या भड़काऊ अफवाह का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
भ्रामक जानकारियों से बचने और सतर्क रहने की सलाह
सरकारी तंत्र और विषय विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित होने वाले ऐसे किसी भी सनसनीखेज दावे पर बिना आधिकारिक पुष्टि के विश्वास न करें। बिना तथ्यों की पड़ताल किए आपदा से जुड़ी अफवाहों को आगे शेयर या फॉरवर्ड करना कानून व्यवस्था और सामाजिक शांति के लिए हानिकारक हो सकता है। नागरिकों को यह सलाह दी गई है कि वे राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी खबरों के लिए केवल प्रामाणिक सरकारी बुलेटिन और विश्वसनीय समाचार माध्यमों पर ही भरोसा करें।



















