राजस्थान में जयपुर जिले के दूदू क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध प्राचीन श्री शैलेश्वर महादेव मंदिर में सावन पूर्णिमा के पावन पर्व पर धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रही। इस पवित्र अवसर पर भगवान शिव का विशेष रूप से दिव्य बर्फ श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी। बर्फ से ढके भगवान शैलेश्वर महादेव का अलौकिक रूप भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से शिव प्रतिमा की पूजा-अर्चना की और क्षेत्र की सुख, शांति तथा समृद्धि के लिए आशीर्वाद माँगा।
बर्फ श्रृंगार के बाद महाआरती में गूँजे हर-हर महादेव के जयकारे
भगवान शिव के बर्फ श्रृंगार दर्शन के पश्चात् मंदिर प्रांगण में भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस महाआरती में बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने हिस्सा लिया। आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और भगवान शिव के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। सावन पूर्णिमा का दिन होने के कारण भोर से ही मंदिर के कपाट खुलते ही शिव भक्तों का आना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक निरंतर जारी रहा। श्रद्धालुओं ने जल और दूध से शिवलिंग का अभिषेक कर परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
एक महीने से जारी रामायण पाठ का पूर्णाहुति के साथ समापन
मंदिर के पुजारी पंडित बाबूलाल शर्मा ने आयोजन के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि सावन के पूरे पवित्र महीने के दौरान आयोजित इन धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर स्थानीय और आसपास के श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। भक्तगण अपने परिजनों के साथ मंदिर पहुँचे और भगवान शैलेश्वर महादेव के बर्फ श्रृंगार के अलौकिक दर्शन का लाभ उठाया। इसके साथ ही मंदिर परिसर में पिछले एक महीने से निरंतर चल रहे रामायण पाठ का भी सावन पूर्णिमा के शुभ अवसर पर विधिवत समापन किया गया।
क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना के साथ महाप्रसाद का वितरण
रामायण पाठ के अंतिम चरण में भव्य पूर्णाहुति का आयोजन हुआ, जिसमें वैदिक विद्वानों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच अग्नि में आहुतियाँ दी गईं। श्रद्धालुओं ने इस धार्मिक आहुति कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और आहुति समर्पित करते हुए ईश्वर से क्षेत्र में उत्तम वर्षा, खुशहाली और शांति की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और अध्यात्म का विशेष वातावरण बना रहा। धार्मिक अनुष्ठान के संपन्न होने के बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भगवान शिव का प्रसाद वितरित किया गया, जिसे ग्रहण कर भक्तों ने आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।



















