राजस्थान हाईकोर्ट में बार और बेंच के बीच बढ़ता तनाव अब सार्वजनिक हो चुका है, लेकिन इस प्रशासनिक संकट की आहट काफी समय पहले ही मिल चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता द्वारा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए जाने से पहले ही स्थानीय वकीलों ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत को बाकायदा पत्र भेजकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने और एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करने की गुहार लगाई थी।
अप्रैल में भेजी गई थी सीजेआई को आधिकारिक चिट्ठी
राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत जोशी ने 25 अप्रैल को सीजेआई सूर्यकांत को यह पत्र लिखा था। इस पत्राचार में एसोसिएशन ने मुख्य रूप से दो प्रमुख मांगें रखी थीं। पहली मांग यह थी कि राजस्थान हाईकोर्ट में तुरंत प्रभाव से एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश पदभार संभाले। दूसरी मांग के तहत उन्होंने आग्रह किया था कि वर्तमान प्रशासनिक परिस्थितियों को देखते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा का तबादला राजस्थान से किसी अन्य राज्य में कर दिया जाए, ताकि अदालत के भीतर कामकाज का माहौल सुधर सके।
वकीलों और जजों के संबंधों में आई खटास का हवाला
पत्र में वकीलों के संगठन ने स्पष्ट किया था कि राज्य में बार और बेंच के बीच संबंध सामान्य नहीं चल रहे हैं। नियमित संवाद की कमी और अधिवक्ताओं के साथ व्यवहार संबंधी समस्याओं के कारण रोजाना मतभेद उत्पन्न हो रहे हैं। इसके अलावा वकीलों की बुनियादी प्रशासनिक जरूरतों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। उदाहरण के लिए, 10×10 फीट के टिन शेड जैसी छोटी बैठक व्यवस्था या चैंबर उपलब्ध कराने में भी सहयोग नहीं मिल पा रहा था। इन सभी कारणों से वकीलों के बीच असंतोष गहराता जा रहा था। रंजीत जोशी ने लिखा, "कोर्ट की गरिमा और अच्छे माहौल को बनाए रखने के लिए स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति बहुत ज़रूरी है।"
जस्टिस संदीप मेहता की सिफारिशों ने बढ़ाई हलचल
यह मामला उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने भी सीजेआई और कॉलेजियम के सदस्यों को पत्र लिखकर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के तबादले की सिफारिश कर दी। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले जस्टिस मेहता ने कॉलेजियम को भेजे तीन पत्रों में आरोप लगाया कि संजीव प्रकाश शर्मा द्वारा शक्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्हें ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं जो कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की सत्यनिष्ठा और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
न्यायिक हलकों में प्रशासनिक फेरबदल की चर्चा तेज
अप्रैल माह में वकीलों द्वारा भेजी गई चिट्ठी और हाल ही में शीर्ष अदालत के जज द्वारा उठाए गए कदमों ने राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक ढांचे पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि जब किसी हाईकोर्ट में बार और बेंच के बीच तालमेल बिगड़ता है, तो उसका सीधा असर मुकदमों की सुनवाई और आम जनता को मिलने वाले न्याय पर पड़ता है। कॉलेजियम के समक्ष अब स्थायी नियुक्ति और तबादले को लेकर दबाव बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में राजस्थान हाईकोर्ट में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।



















