छत्तीसगढ़ में चर्चा का केंद्र बनीं IPS अधिकारी अंकिता शर्मा, साड़ी पहनकर AK-47 से की ताबड़तोड़ फायरिंगकोटा में अनूठी परंपरा, मिट्टी से बने रावण के पुतले को पैरों से कुचलते हैं जेठी समाज के पहलवानश्रीनगर में धूमधाम से मनाया गया दशहरा, शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में जला 35 फुट ऊंचा रावण का पुतलाजालोर में रबी सीजन की खास फसल ईसबगोल की बुवाई शुरू, 15 नवंबर तक का समय सबसे बेहतरीनराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी ने मनाया दशहरा, देश की एकता पर दिया जोरतेलंगाना में मिला 300 साल पुराना 27 किलो का ताला, दो चाबियों से खुलता है इसका राजजुबीन गर्ग की मौत के मामले में गुवाहाटी में प्रदर्शन, असम सचिवालय के बाहर सौ से अधिक लोग हिरासत मेंसर्दी के मौसम में पशुओं की सेहत का रखें खास ख्याल, खुराक और पानी देने के तरीके में करें बदलावलाहौर एयरपोर्ट पर पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के कर्मचारियों का बड़ा खेल, प्रीमियम सीट बुकिंग से लगाई चपतघाटे में डूबी पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस में हुआ बड़ा घोटाला, कर्मचारियों ने ऐसे लगाई चपत
करौली के कैलादेवी मंदिर का अनोखा नियम, नवरात्रि में पूरे नौ दिन नहीं बदली जाती माता की पोशाकराजस्थान
20 अक्तू॰ 2026, 9:00 pm (15 मिनट पहले)· 0

करौली के कैलादेवी मंदिर का अनोखा नियम, नवरात्रि में पूरे नौ दिन नहीं बदली जाती माता की पोशाक

राजस्थान के करौली में स्थित प्रसिद्ध कैलादेवी मंदिर में नवरात्रि के दौरान एक विशेष परंपरा का पालन किया जाता है, जिसमें नौ दिनों तक माता की पोशाक नहीं बदली जाती और न ही उन्हें स्नान कराया जाता है।

देशभर में शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है और मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। अमूमन सभी शक्तिपीठों में नौ दिनों तक माता का अलग-अलग शृंगार किया जाता है, लेकिन राजस्थान के करौली जिले में स्थित प्रसिद्ध कैलादेवी आस्थाधाम की परंपरा बिल्कुल अलग है। यहां शारदीय नवरात्रि के इन नौ दिनों के दौरान मां कैलादेवी को न तो स्नान कराया जाता है और न ही उनकी पोशाक में कोई बदलाव किया जाता है।

युद्ध की कथा से जुड़ी है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में माता के मुख्य मठ में पोछा लगाने की भी मनाही होती है। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां कैलादेवी के प्रति देश भर के श्रद्धालुओं में अगाध श्रद्धा और विश्वास है। मंदिर की इस अनोखी परंपरा के पीछे मां दुर्गा और राक्षसों के बीच हुए भीषण संग्राम की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है। हालांकि इस दौरान मंदिर में नियमित रूप से पूजा-पाठ और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का दौर लगातार जारी रहता है।

ये भी पढ़ें

प्रथम दिन होता है विशेष शृंगार

कैलादेवी आस्थाधाम में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत के साथ ही माता का भव्य और विशेष शृंगार किया जाता है। परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के पहले दिन मां को जो वस्त्र और आभूषण पहनाए जाते हैं, माता पूरे नौ दिनों तक उन्हीं वस्त्रों में भक्तों को दर्शन देती हैं। इस समूची अवधि में न तो उनका वस्त्र बदला जाता है और न ही उन्हें जल से स्नान कराया जाता है।

दुर्गासप्तशती में मिलता है उल्लेख

इस अनूठी परंपरा के धार्मिक आधार को स्पष्ट करते हुए राज्याचार्य पंडित प्रकाश चंद जती बताते हैं कि शारदीय नवरात्रि के इन दिनों का संबंध मां दुर्गा और राक्षसों के युद्ध से है। उनका कहना है कि इस ऐतिहासिक प्रसंग का विस्तृत उल्लेख दुर्गासप्तशती ग्रंथ में भी मिलता है। मान्यता के अनुसार, दानवों के साथ हुए उस भयंकर संग्राम के दौरान मां ने उनका डटकर मुकाबला किया और अंत में उनका संहार कर विजय प्राप्त की थी। युद्ध के इसी विशेष प्रसंग को स्मरण करते हुए नवरात्रि के नौ दिनों को अत्यंत पवित्र और विशिष्ट धार्मिक काल माना गया है।

विशेष पाठ और श्रद्धालुओं की भीड़

इसी प्राचीन मान्यता का निर्वाह करते हुए कैलादेवी आस्थाधाम में माता के स्नान, वस्त्र परिवर्तन और मंदिर की सफाई से जुड़ी परंपराओं का सख्ती से पालन होता है। शारदीय नवरात्रि के इस पावन काल में कैलादेवी मंदिर में माता की साधना और आराधना का विशेष महत्व माना गया है। विद्वान पंडितों और आचार्यों द्वारा माता को प्रसन्न करने के लिए इस अवधि में विशेष पाठ किए जाते हैं। नवरात्रि के इन दिनों में देश के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु कैलादेवी के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

सवाल-जवाब

कैलादेवी मंदिर कहां स्थित है?
कैलादेवी मंदिर राजस्थान के करौली जिले में त्रिकूट पर्वत पर स्थित है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर में क्या परंपरा निभाई जाती है?
नवरात्रि के नौ दिनों तक माता को न तो स्नान कराया जाता है और न ही उनकी पोशाक बदली जाती है।
इस अनोखी परंपरा के पीछे क्या कारण माना जाता है?
इस परंपरा के पीछे मां दुर्गा और राक्षसों के बीच युद्ध की पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।
इस परंपरा का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?
इस युद्ध प्रसंग का उल्लेख दुर्गासप्तशती में मिलता है।
मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान कौन संपन्न कराता है?
मंदिर में विद्वान पंडितों और आचार्यों द्वारा विशेष पाठ और अनुष्ठान किए जाते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp