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खाजूवाला में खुली निशुल्क उज्ज्वल पाठशाला, ईंट भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी बच्चों को मिलेगी मुफ्त शिक्षाराजस्थान
2 नव॰ 2026, 7:00 pm (2 मिनट पहले)· 0

खाजूवाला में खुली निशुल्क उज्ज्वल पाठशाला, ईंट भट्ठों पर काम करने वाले प्रवासी बच्चों को मिलेगी मुफ्त शिक्षा

बीकानेर के सीमावर्ती इलाके खाजूवाला में ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले प्रवासी परिवारों के बच्चों के लिए निशुल्क उज्ज्वल पाठशाला की शुरुआत हुई है, जहां पहले दिन 30 बच्चों का दाखिला हुआ।

राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्र बीकानेर के खाजूवाला में अभावों के बीच जिंदगी गुजार रहे मजदूर परिवारों की नई पीढ़ी को संवारने के लिए एक विशेष कदम उठाया गया है। ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने के मकसद से निशुल्क उज्ज्वल पाठशाला का शुभारंभ किया गया है। आर्थिक तंगी और लगातार पलायन की वजह से जो बच्चे स्कूल की दहलीज तक नहीं पहुंच पाते थे, यह केंद्र उनके जीवन में बुनियादी साक्षरता और अनुशासन का माध्यम बनेगा। उद्घाटन के पहले ही दिन 30 बच्चों का इस पाठशाला में दाखिला कराया गया और पढ़ाई में कोई रुकावट न आए, इसके लिए उन्हें शिक्षण सामग्री पूरी तरह मुफ्त दी गई।

प्रवासी श्रमिकों के नौनिहालों को जोड़ने का प्रयास

इस केंद्र के संचालन से जुड़े सुनील माहर ने जानकारी दी कि यह व्यवस्था खासतौर पर उत्तर प्रदेश और बिहार से रोजगार की तलाश में आए उन प्रवासी मजदूरों के बच्चों के लिए बनाई गई है जो ईंट भट्ठों पर काम करते हैं। अपने पैतृक गांवों को छोड़कर रोजी-रोटी के लिए दूरदराज के इलाकों में डेरा डालने वाले इन परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चों की पढ़ाई जारी रखना होती है। सामाजिक और माली हालातों के कारण वे अपने बच्चों को नियमित विद्यालयों में दाखिल नहीं करवा पाते। इसका नतीजा यह होता है कि कम उम्र में ही बच्चे भट्ठों के माहौल में रहकर पढ़ाई से हमेशा के लिए दूर हो जाते हैं। पाठशाला का मुख्य लक्ष्य इन्हीं बच्चों की बुनियादी शैक्षणिक नींव को मजबूत करना और उन्हें आगे बढ़ने के समान मौके देना है।

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अक्षर ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों और जीवनशैली पर ध्यान

पाठशाला में रोजाना नियमित तौर पर कक्षाओं का आयोजन होगा, जहां बच्चों को वर्णमाला, अक्षर ज्ञान, पढ़ना, लिखना और प्राथमिक गणित सिखाया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर देते हुए उन्हें अनुशासन, साफ-सफाई, नैतिक संस्कार और रोजाना काम आने वाली सकारात्मक आदतें भी सिखाई जाएंगी। ईंट उद्योग संचालक मेघराज सियाग ने इस सामाजिक कदम का स्वागत करते हुए इसमें हर मुमकिन सहयोग देने की बात कही। उनका मानना है कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिससे इन बच्चों के आने वाले कल को सुरक्षित और बेहतर बनाया जा सकता है। खाजूवाला जैसे सीमावर्ती इलाके में शुरू हुई यह कक्षाएं उन परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण हैं, जिनकी पीढ़ियां अब तक सिर्फ मजदूरी तक सीमित रही हैं।

सवाल-जवाब

खाजूवाला में किस नाम से निशुल्क पाठशाला शुरू की गई है?
बीकानेर के खाजूवाला क्षेत्र में जरूरतमंद और प्रवासी बच्चों के लिए 'निशुल्क उज्ज्वल पाठशाला' की शुरुआत की गई है।
इस पाठशाला के पहले दिन कितने बच्चों का दाखिला हुआ?
पाठशाला के शुभारंभ के पहले ही दिन कुल 30 बच्चों का नामांकन किया गया और उन्हें मुफ्त शिक्षण सामग्री बांटी गई।
यह पाठशाला मुख्य रूप से किन बच्चों के लिए बनाई गई है?
यह विशेष रूप से ईंट भट्ठों पर मजदूरी करने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासी श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए शुरू की गई है।
इस केंद्र पर बच्चों को क्या-क्या सिखाया जाएगा?
यहां बच्चों को वर्णमाला, अक्षर ज्ञान, पढ़ना-लिखना और बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार और अनुशासन की आदतें सिखाई जाएंगी।
पाठशाला के संचालन में स्थानीय उद्योग की क्या भूमिका है?
ईंट उद्योग संचालक मेघराज सियाग ने इस पहल की सराहना की है और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए पूरा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है।
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