सवाई माधोपुर स्थित प्रसिद्ध रणथम्भौर टाइगर रिजर्व ने वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। जंगल में बाघों की मौजूदगी और प्राकृतिक छटा को देखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैलानियों का रुझान तेजी से बढ़ा है। एक नवंबर 2026 को शुरू की गई 90 दिनों की नई एडवांस सफारी बुकिंग विंडो के दौरान विदेशी पर्यटकों ने टिकट हासिल करने में रिकॉर्ड दिलचस्पी दिखाई है। सबसे खास बात यह रही कि सैलानियों ने किसी भी मध्यस्थ या ट्रैवल एजेंट का सहारा लिए बिना सीधे वन विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सफारी बुक की। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कई तकनीकी अड़चनें और बड़े साइबर हमले भी हुए, जिन्हें सफलता से निष्प्रभावी कर दिया गया।
16 देशों के पर्यटकों ने दिखाई दिलचस्पी, 46 हजार से ज्यादा टिकट बुक
सफारी टिकटों की नई बुकिंग खिड़की खुलते ही रिजर्वेशन सिस्टम पर वैश्विक स्तर से सैलानियों का भारी ट्रैफिक देखने को मिला। उप वन संरक्षक पर्यटन संजीव शर्मा ने इस ऐतिहासिक रिस्पॉन्स से जुड़े विस्तृत आंकड़े साझा करते हुए बताया कि कुल 46 हजार 500 सैलानियों ने सफारी के लिए अपने टिकट सुरक्षित कराए हैं। इनमें से 27 हजार टिकट भारतीय पर्यटकों के खाते में गए, जबकि 19 हजार 500 सीटों पर विदेशी यात्रियों ने बुकिंग हासिल की। दुनिया के 16 अलग-अलग देशों के प्रकृति प्रेमियों ने इस आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी सीधी भागीदारी दर्ज कराई है।
वन अधिकारियों के अनुसार यह रुझान स्पष्ट करता है कि रणथम्भौर की ख्याति अब राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक पटल पर एक प्रमुख ईको-टूरिज्म केंद्र के रूप में स्थापित हो चुकी है। बिचौलियों की गैरमौजूदगी में सीधे आधिकारिक पोर्टल से बुकिंग करने का यह कदम वन विभाग के पारदर्शी और भरोसेमंद ऑनलाइन ढांचे पर पर्यटकों के विश्वास को प्रमाणित करता है।
50 लाख से ज्यादा साइबर अटैक और बॉट हमलों को किया गया विफल
सफारी बुकिंग का यह नया रिकॉर्ड सिर्फ पर्यटकों की संख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तकनीकी मोर्चे पर भी यह एक बड़ी कामयाबी साबित हुआ। बुकिंग पोर्टल को ठप करने और सर्वर को बाधित करने के इरादे से भारी संख्या में साइबर हमले किए गए। विभागीय जानकारी के मुताबिक एआई टूल्स, बॉट्स और दुर्भावनापूर्ण नेटवर्क ट्रैफिक का इस्तेमाल करते हुए सिस्टम पर करीब 50 लाख 30 हजार हमले किए गए।
पोर्टल की सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था ने इन सभी साइबर हमलों को सफलतापूर्वक ब्लॉक कर दिया और सिस्टम को क्रैश होने से बचा लिया। नतीजतन, पूरे बुकिंग सत्र के दौरान आधिकारिक वेबसाइट पर टिकट वितरण का कार्य बिना किसी रुकावट के लगातार चलता रहा। सुरक्षा की इस कड़ी परीक्षा में सफल होकर विभाग ने यह साबित किया कि उसका डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर आधुनिकतम खतरों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।
तारीखों की पसंद और पर्यटकों का जनसांख्यिकीय विश्लेषण
सैलानियों की पसंद के विश्लेषण से यह बात सामने आई कि एक जनवरी 2027 की तारीख नए साल के जश्न के चलते पर्यटकों की सबसे पहली पसंद बनकर उभरी। इसके अलावा गर्मियों के महीनों की तारीखों में भी जबरदस्त उत्साह दर्ज किया गया। आंकड़ों के अनुसार 3 जून की तारीख के लिए करीब 7 हजार 200 सैलानियों ने बुकिंग हासिल की। इसी क्रम में 4 जून को लगभग 6 हजार 200 और 2 जून के लिए करीब 5 हजार 300 पर्यटकों ने अपने सफारी स्लॉट बुक किए।
सैलानियों के जनसांख्यिकीय विभाजन पर गौर करें तो कुल बुकिंग में 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिला पर्यटक शामिल हैं। आयु वर्ग के लिहाज से 41 से 60 वर्ष के यात्रियों की तादाद सबसे अधिक रही, जबकि 25 वर्ष तक के युवा सैलानियों ने भी बड़ी संख्या में जंगल सफारी के प्रति गहरा आकर्षण दिखाया। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितताओं के बावजूद यूरोपीय देशों से आने वाले यात्रियों की संख्या में उत्साहजनक रुझान देखा गया। फ्रांस के पर्यटकों की हिस्सेदारी में 0.31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं इटली और स्विट्जरलैंड से बुकिंग कराने वाले सैलानियों के आंकड़े ने कनाडा के यात्रियों की कुल संख्या को भी पीछे छोड़ दिया।
पर्यटन प्रबंधन में आधुनिक तकनीक, जीपीएस और रियल टाइम मॉनिटरिंग
रणथम्भौर प्रशासन अब अपने समग्र पर्यटन प्रबंधन तंत्र को आधुनिक तकनीकों से पूरी तरह लैस करने की योजना पर आगे बढ़ रहा है। सफारी वाहनों के बेहतर संचालन और ट्रैकिंग के लिए जीपीएस डेटा, रियल टाइम मॉनिटरिंग और पर्यटकों के फीडबैक का नियमित इस्तेमाल किया जा रहा है। उप वन संरक्षक पर्यटन ने बताया कि इन तकनीकी संसाधनों के समन्वय से सफारी प्रक्रिया को सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा रहा है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य न केवल सैलानियों को बेहतर वन्यजीव अनुभव देना है, बल्कि वन्यजीवों के संवेदनशील पर्यावास के संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखना है।


















