दीपावली का पावन पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बाजारों में रौनक और खरीदारी का उत्साह तेजी से परवान चढ़ रहा है। इस रोशनी के महापर्व पर जहां लोग अपने घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों को सजाने के लिए खरीदारी कर रहे हैं, वहीं राजस्थान के भरतपुर में पशुओं के श्रृंगार के सामान की दुकानें भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। ग्रामीण अंचलों में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार दीपावली के मौके पर पशुधन की पूजा और उन्हें सजाने का विशेष विधान है। इसी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत बनाए रखने के लिए पशुपालक बड़ी संख्या में बाजार पहुंचकर अपने पालतू मवेशियों के लिए तरह-तरह के आभूषण और सजावटी सामान पसंद कर रहे हैं।
बाजारों में खास आकर्षण बनीं कांच वाली घंटियां और घुंघरू
भरतपुर के बाजारों में इस समय मवेशियों को सजाने के लिए कई तरह के पारंपरिक और आधुनिक आभूषण उपलब्ध कराए गए हैं। दुकानों पर इस साल विशेष रूप से कांच वाली घंटियों और घुंघरू लगी रंग-बिरंगी मालाओं की सबसे ज्यादा मांग देखी जा रही है। कांच वाली घंटियों की खूबी उनकी आकर्षक बनावट और उनसे निकलने वाली मधुर झंकार है, जो दूर से ही पशुपालकों को अपनी ओर खींच रही है। इसके साथ ही विभिन्न आकारों और खूबसूरत डिजाइनों में तैयार की गई मालाएं भी खूब पसंद की जा रही हैं, जिन्हें गायों, बैलों और भैंसों के गले में बांधा जाता है।
ग्रामीण परंपरा और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक
दुकानों पर केवल घंटियां ही नहीं, बल्कि फूलों की बनावट जैसी दिखने वाली सजावटी मालाएं, छोटी-छोटी घंटियां और पारंपरिक साज-सज्जा की पूरी सामग्री उपलब्ध है। ग्रामीण इलाकों से खरीदारी करने आ रहे किसान और पशुपालक अपने मवेशियों के लिए एक से अधिक सजावटी वस्तुएं खरीद रहे हैं। कई खरीदार गले के हार के साथ-साथ सींगों और माथे पर सजाने वाले रंगीन आभूषण भी चुन रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि जैसे-जैसे त्योहार की मुख्य तिथि करीब आएगी, इस पारंपरिक सजावटी सामान की बिक्री में और अधिक उछाल आने की पूरी उम्मीद है।
संस्कृति की सजीव झलक पेश करते बाजार
भारतीय लोकजीवन में दीपावली का उत्सव केवल इंसानी बस्तियों या ईंट-पत्थर के मकानों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह प्रकृति और मवेशियों के साथ परस्पर रिश्ते का उत्सव भी है। ग्रामीण परिवेश में पशुधन को परिवार के अभिन्न सदस्य के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि त्योहार से ठीक पहले ग्रामीण संस्कृति की यह समृद्ध परंपरा बाजारों में साफ तौर पर छाई हुई है। रंग-बिरंगे मोतियों, घुंघरुओं और मधुर घंटियों से सजी ये दुकानें भरतपुर में दीपावली के त्योहारी उल्लास के साथ-साथ लोक परंपरा का एक बेहद खूबसूरत और जीवंत रूप पेश कर रही हैं।


















