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दहेज मामले में सुनवाई न होने पर गंगापुर सिटी में एएसपी दफ्तर की छत पर चढ़ी युवती, पुलिस ने सूझबूझ से सुरक्षित उताराराजस्थान
1 नव॰ 2026, 10:38 am (1 घंटे पहले)· 0

दहेज मामले में सुनवाई न होने पर गंगापुर सिटी में एएसपी दफ्तर की छत पर चढ़ी युवती, पुलिस ने सूझबूझ से सुरक्षित उतारा

सवाई माधोपुर के गंगापुर सिटी में ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज न होने से आहत युवती एएसपी कार्यालय की छत पर जा चढ़ी, जिसे पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित बचा लिया।

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के अंतर्गत आने वाले गंगापुर सिटी इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक व्यथित युवती सीधे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कार्यालय की छत पर जा पहुंची। छत की मुंडेर पर युवती की मौजूदगी देखते ही प्रशासनिक परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों, कर्मचारियों और अन्य आगंतुकों के हाथ-पांव फूल गए। ससुराल पक्ष की प्रताड़ना और पुलिस द्वारा दहेज मामले में प्राथमिकी दर्ज न किए जाने के विरोध में उठाया गया यह कदम पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।

ससुराल पक्ष से विवाद और केस दर्ज न होने की नाराजगी

पीड़िता का अपने ससुराल के लोगों के साथ लंबे समय से गंभीर पारिवारिक कलह चल रहा था। उसका सीधा आरोप था कि दहेज उत्पीड़न को लेकर वह लगातार कानूनी कार्रवाई की गुहार लगा रही थी, लेकिन थाने के स्तर पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। बार-बार चक्कर काटने के बावजूद जब संबंधित पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में टालमटोल की गई, तो हताशा और क्षोभ में आकर उसने यह जोखिम भरा रास्ता अख्तियार किया। उसका मकसद उच्चाधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाना और न्याय की गुहार लगाना था।

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घंटों चली मान-मनौव्वल और छत पर बना रहा तनाव

एएसपी दफ्तर की छत पर युवती के खड़े होने की जानकारी जैसे ही अधिकारियों और जवानों को मिली, परिसर में त्वरित रूप से बचाव की कवायद शुरू कर दी गई। पुलिसकर्मियों ने नीचे से और छत के रास्ते पहुंचकर उससे निरंतर बातचीत की तथा समझा-बुझाकर नीचे आने का आग्रह किया। काफी देर तक चले संवाद के बावजूद युवती अपनी मांगों पर अड़ी रही और साफ कह दिया कि जब तक उसकी शिकायत पर ठोस कानूनी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, वह नीचे नहीं आएगी।

रणनीति बनाकर पुलिस ने पीछे से पकड़ा, टला बड़ा हादसा

जब बातचीत के सामान्य प्रयास विफल साबित होने लगे और समय बीतने के साथ किसी भी अनहोनी की आशंका गहराने लगी, तब पुलिस दल ने एक सुविचारित रणनीति तैयार की। कुछ पुलिसकर्मियों ने युवती का ध्यान बातचीत में उलझाए रखा, जबकि अन्य कर्मियों ने दबे पांव पीछे से पहुंचकर उसे अचानक दोनों हाथों से सुरक्षित पकड़ लिया। त्वरित सूझबूझ और सावधानी से उसे मुंडेर से दूर खींचकर नीचे सुरक्षित लाया गया। इस सफल बचाव अभियान के बाद परिसर में मौजूद सभी लोगों ने राहत की गहरी सांस ली, वहीं अब सभी का ध्यान इस बात पर है कि पीड़िता की मूल दहेज शिकायत पर विभाग आगे क्या कानूनी कदम उठाता है।

सवाल-जवाब

यह घटना किस स्थान पर और किस कार्यालय में हुई?
यह घटना राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में गंगापुर सिटी स्थित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कार्यालय की छत पर हुई।
युवती ने एएसपी दफ्तर की छत पर चढ़ने का कदम क्यों उठाया?
युवती का आरोप था कि ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के मामले में पुलिस उसकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज नहीं कर रही थी।
पुलिस ने युवती को छत से नीचे उतारने के लिए क्या किया?
पुलिसकर्मियों ने पहले बातचीत से उसे समझाने का प्रयास किया और फिर रणनीति के तहत पीछे से पकड़कर सुरक्षित नीचे उतार लिया।
घटना के बाद आगे क्या कानूनी कार्रवाई अपेक्षित है?
घटना के बाद सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि युवती द्वारा लगाए गए आरोपों और उसकी दहेज संबंधी शिकायत पर पुलिस क्या कदम उठाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·5 मिनट पहले

दहेज के मामले में सुनवाई के लिए किसी को छत पर चढ़ना पड़े, यह पुलिस और सिस्टम दोनों की नाकामी है। गनीमत रही कि महिला सुरक्षित बच गई, वर्ना कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

Ravikash Gupta@ravikash·29 मिनट पहले

पुलिस की लापरवाही का नतीजा है कि महिला को छत पर चढ़ना पड़ा। गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा टल गया, वरना थाने के चक्कर काट-काटकर लोग ऐसे ही अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर होते रहेंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 मिनट पहले

रविकेश जी, बात सही है कि लापरवाही हुई होगी, पर क्या पता महिला ने पहले ही शिकायत दी हो या नहीं? थाने की पूरी कहानी जाने बिना सीधे पुलिस को दोष देना ठीक नहीं लगता।

Rohan Verma@rohan-verma·50 मिनट पहले

मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब हमारे मोहल्ले में एक महिला थाने के बाहर ऐसे ही धरने पर बैठ गई थी क्योंकि पुलिस उसका मामला दर्ज नहीं कर रही थी। जब तक छत पर कोई तमाशा न हो, तब तक पुलिस हमारी बात सुनती ही नहीं है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·49 मिनट पहले

रोहन भाई, बात तो सही है आपकी। जब तक लोग ऐसा कदम नहीं उठाते, थानों में सुनवाई होती ही नहीं है।

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