राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के अंतर्गत आने वाले गंगापुर सिटी इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब एक व्यथित युवती सीधे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कार्यालय की छत पर जा पहुंची। छत की मुंडेर पर युवती की मौजूदगी देखते ही प्रशासनिक परिसर में मौजूद पुलिसकर्मियों, कर्मचारियों और अन्य आगंतुकों के हाथ-पांव फूल गए। ससुराल पक्ष की प्रताड़ना और पुलिस द्वारा दहेज मामले में प्राथमिकी दर्ज न किए जाने के विरोध में उठाया गया यह कदम पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया।
ससुराल पक्ष से विवाद और केस दर्ज न होने की नाराजगी
पीड़िता का अपने ससुराल के लोगों के साथ लंबे समय से गंभीर पारिवारिक कलह चल रहा था। उसका सीधा आरोप था कि दहेज उत्पीड़न को लेकर वह लगातार कानूनी कार्रवाई की गुहार लगा रही थी, लेकिन थाने के स्तर पर उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। बार-बार चक्कर काटने के बावजूद जब संबंधित पक्षों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में टालमटोल की गई, तो हताशा और क्षोभ में आकर उसने यह जोखिम भरा रास्ता अख्तियार किया। उसका मकसद उच्चाधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाना और न्याय की गुहार लगाना था।
घंटों चली मान-मनौव्वल और छत पर बना रहा तनाव
एएसपी दफ्तर की छत पर युवती के खड़े होने की जानकारी जैसे ही अधिकारियों और जवानों को मिली, परिसर में त्वरित रूप से बचाव की कवायद शुरू कर दी गई। पुलिसकर्मियों ने नीचे से और छत के रास्ते पहुंचकर उससे निरंतर बातचीत की तथा समझा-बुझाकर नीचे आने का आग्रह किया। काफी देर तक चले संवाद के बावजूद युवती अपनी मांगों पर अड़ी रही और साफ कह दिया कि जब तक उसकी शिकायत पर ठोस कानूनी कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, वह नीचे नहीं आएगी।
रणनीति बनाकर पुलिस ने पीछे से पकड़ा, टला बड़ा हादसा
जब बातचीत के सामान्य प्रयास विफल साबित होने लगे और समय बीतने के साथ किसी भी अनहोनी की आशंका गहराने लगी, तब पुलिस दल ने एक सुविचारित रणनीति तैयार की। कुछ पुलिसकर्मियों ने युवती का ध्यान बातचीत में उलझाए रखा, जबकि अन्य कर्मियों ने दबे पांव पीछे से पहुंचकर उसे अचानक दोनों हाथों से सुरक्षित पकड़ लिया। त्वरित सूझबूझ और सावधानी से उसे मुंडेर से दूर खींचकर नीचे सुरक्षित लाया गया। इस सफल बचाव अभियान के बाद परिसर में मौजूद सभी लोगों ने राहत की गहरी सांस ली, वहीं अब सभी का ध्यान इस बात पर है कि पीड़िता की मूल दहेज शिकायत पर विभाग आगे क्या कानूनी कदम उठाता है।






















