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पिपलांत्री मॉडल के जनक पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल को पंचायत चुनाव में मिली मात, नवीन पालीवाल बने नए सरपंचराजस्थान
1 नव॰ 2026, 10:23 am (1 घंटे पहले)· 0

पिपलांत्री मॉडल के जनक पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल को पंचायत चुनाव में मिली मात, नवीन पालीवाल बने नए सरपंच

राजसमंद जिले की पिपलांत्री ग्राम पंचायत में पंचायतीराज चुनाव 2026 के दूसरे चरण में पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल सरपंच चुनाव हार गए हैं, जहां मतदाताओं ने नवीन पालीवाल को अपना प्रतिनिधि चुना है।

राजस्थान के राजसमंद जिले में पंचायतीराज चुनाव 2026 के द्वितीय चरण की मतगणना के बीच एक बेहद चौंकाने वाला चुनावी परिणाम सामने आया है। पर्यावरण संरक्षण और बेटियों के सशक्तिकरण के अनूठे मॉडल से पूरी दुनिया में ख्याति पाने वाले पिपलांत्री गांव के मतदाताओं ने इस बार स्थानीय नेतृत्व में बड़ा फेरबदल कर दिया है। दशकों तक गांव की तस्वीर बदलने में जुटे रहे पद्मश्री श्यामसुंदर पालीवाल को इस बार सरपंच पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। स्थानीय ग्रामीणों ने चुनावी मुकाबले में श्यामसुंदर पालीवाल को नकारते हुए नवीन पालीवाल के पक्ष में मतदान किया और उन्हें पिपलांत्री का नया सरपंच निर्वाचित किया है।

पर्यावरण और बेटी सम्मान की अनूठी पहल से मिली थी वैश्विक पहचान

श्यामसुंदर पालीवाल ने पिपलांत्री गांव को एक प्रेरक और आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में स्थापित करने के लिए वर्षों तक ज़मीनी स्तर पर काम किया था। उन्होंने गांव में सामाजिक कुरीतियों को मिटाने और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष परंपरा की शुरुआत की थी। इस पहल के तहत पिपलांत्री में जब भी किसी घर में बेटी का जन्म होता है, तो पूरा गांव उत्सव मनाते हुए 111 पौधे लगाता है। इसके अलावा बच्ची के सुरक्षित भविष्य के लिए उसके नाम से पोस्ट ऑफिस में एक बचत खाता भी खुलवाया जाता है। प्रकृति और नारी सम्मान से जुड़ी इस अनूठी व्यवस्था ने पिपलांत्री को वैश्विक मानचित्र पर ला खड़ा किया और देश-विदेश से लोग इस विकास मॉडल का अध्ययन करने गांव पहुंचने लगे।

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राष्ट्रीय सम्मान से लेकर कौन बनेगा करोड़पति तक का सफर

पिपलांत्री में जल संचयन, हरियाली विस्तार और सामाजिक चेतना के कार्यों के लिए श्यामसुंदर पालीवाल को देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत किया जा चुका है। सामाजिक बदलाव के इस सफर में उन्हें व्यापक राष्ट्रीय मंच भी मिला। वे लोकप्रिय टेलीविजन शो कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में अतिथि के रूप में शामिल हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी व्यक्तिगत मुलाकात कर चुके हैं। इन तमाम राष्ट्रीय उपलब्धियों और वैश्विक प्रतिष्ठा के बावजूद स्थानीय पंचायत चुनाव का गणित उनके पक्ष में नहीं रहा।

चुनावी मैदान में जनता ने चुना नया चेहरा

पंचायतीराज चुनाव 2026 के दूसरे चरण के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय फलक पर अर्जित प्रतिष्ठा स्थानीय चुनावी समीकरणों की गारंटी नहीं होती। पिपलांत्री के मतदाताओं ने इस बार बदलाव का रास्ता चुनते हुए श्यामसुंदर पालीवाल की जगह नवीन पालीवाल को गांव की कमान सौंप दी। इस नतीजे के बाद नवीन पालीवाल अब पिपलांत्री ग्राम पंचायत के नए सरपंच के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

सवाल-जवाब

पिपलांत्री में सरपंच चुनाव में किसकी हार हुई है?
पद्मश्री से सम्मानित और पिपलांत्री मॉडल के जनक श्यामसुंदर पालीवाल सरपंच पद का चुनाव हार गए हैं।
पिपलांत्री ग्राम पंचायत के नए सरपंच कौन चुने गए हैं?
ग्रामीणों ने श्यामसुंदर पालीवाल की जगह नवीन पालीवाल को अपना नया सरपंच चुना है।
यह चुनाव किस जिले और किस चरण में हुआ था?
यह चुनाव राजस्थान के राजसमंद जिले में पंचायतीराज चुनाव 2026 के द्वितीय चरण के तहत संपन्न हुआ।
पिपलांत्री में बेटी के जन्म पर क्या विशेष परंपरा निभाई जाती है?
पिपलांत्री में बेटी के जन्म पर 111 पौधे लगाए जाते हैं और नवजात बच्ची के नाम से पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवाया जाता है।
श्यामसुंदर पालीवाल को किन बड़े राष्ट्रीय मंचों पर पहचान मिली थी?
उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला था, वे कौन बनेगा करोड़पति (KBC) में शामिल हुए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर चुके हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·3 मिनट पहले

गांव वाले ऐसे इंसान को कैसे हरा सकते हैं जिसने केबीसी तक जाकर गांव का नाम रोशन किया?

Ravikash Gupta@ravikash·26 मिनट पहले

गांव वाले पद्मश्री मिलने के बाद भी चुनाव हरा दें, बात कुछ हजम नहीं हुई। शायद ज़मीनी नाराजगी कुछ और ही रही होगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 मिनट पहले

रविकेश, पद्मश्री अपनी जगह है लेकिन जमीन पर हर 111 पौधे वाले नियम के अलावा भी रोज़मर्रा के काम होते हैं, जनता को शायद रोज़ के काम में कुछ कमी खटकी होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·47 मिनट पहले

पिपलांत्री के लोगों ने बदलाव तो चुन लिया, पर मुझे थोड़ा शक है कि बिना श्यामसुंदर जी के गांव वही ट्रैक पकड़ पाएगा। कई बार लोग सिर्फ नए चेहरे के चक्कर में बड़ा नुकसान करा बैठते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

करण भाई, यूपी में भी कई बार ऐसा होता है कि बड़े चेहरे हार जाते हैं और जनता नया मौका दे देती है। काम तो रहेगा ही, देखते हैं नवीन जी क्या करते हैं।

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