राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित भावी गांव में पंचायत चुनाव की चुनावी प्रक्रिया को लेकर गहराया विवाद अब हिंसक टकराव का रूप ले चुका है. सरपंच पद के लिए डाले गए मतों में गंभीर गड़बड़ी की शिकायत के बाद प्रशासन ने जब एक बूथ पर नए सिरे से वोटिंग कराने का निर्णय लिया, तो माहौल पूरी तरह गरमा गया. फैसले के खिलाफ नाराज ग्रामीणों ने शनिवार की देर रात थाने का घेराव कर दिया, जहां अचानक शुरू हुए उग्र पथराव के कारण तीन थाना प्रभारियों सहित कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए. हालात को काबू में करने के लिए सुरक्षा बलों को लाठीचार्ज करने के साथ-साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े.
बूथ नंबर 12 से 150 मतपत्र गायब होने से उपजा सारा विवाद
इस पूरे हंगामे की जड़ें 30 अक्टूबर को संपन्न हुए पंचायत मतदान से जुड़ी हैं. भावी गांव में सरपंच पद के चुनाव के दौरान बूथ संख्या 12 पर मतों की गिनती और प्रक्रिया के दौरान 150 मतपत्र अचानक गायब पाए गए. इस गंभीर अनियमितता की सूचना मिलते ही चुनाव में हिस्सा ले रहे पक्षों में खलबली मच गई. प्रशासन ने चुनावी निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से मामले की पड़ताल की और कड़ा कदम उठाते हुए संबंधित बूथ पर 2 नवंबर को पुनर्मतदान कराने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया.
प्रशासनिक अधिकारियों के इस निर्णय से चुनावी दौड़ में शामिल एक विशेष पक्ष के समर्थक बेहद आक्रोशित हो गए. उनका मानना था कि दोबारा मतदान कराने का फैसला अनुचित है. इसी नाराजगी के चलते ग्रामीणों और समर्थकों ने पहले स्थानीय पुलिस थाने का घेराव करके अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था. इसके बाद भी असंतोष थमा नहीं और शनिवार की शाम ढलते ही बड़ी तादाद में ग्रामीण दोबारा थाने के बाहर जमा होने लगे और वहां धरना देकर बैठ गए.
आधी रात को अचानक बिगड़े हालात और थाने पर पथराव
थाने के बाहर चल रहा यह धरना प्रदर्शन रात करीब 11:30 बजे अचानक उग्र रूप धारण कर गया. शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे विरोध के बीच भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने अचानक सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. रात के अंधेरे में हुए इस अप्रत्याशित हमले से परिसर में तैनात पुलिसकर्मियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया. पत्थरों की चपेट में आने से तीन थानाधिकारियों समेत कई जवान जख्मी हो गए.
पथराव से बिगड़ती स्थिति और अनियंत्रित होती भीड़ को पीछे धकेलने के लिए पुलिस बल ने मोर्चा संभाला. पुलिस ने पहले हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया, लेकिन जब उपद्रवी पीछे नहीं हटे तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले दागे गए. पुलिस की इस त्वरित जवाबी कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी तितर-बितर हुए, जिसके बाद इलाके में तनावपूर्ण शांति स्थापित हो सकी.
2 नवंबर के पुनर्मतदान को लेकर प्रशासन के आगे कड़ी चुनौती
शनिवार रात हुई इस हिंसक झड़प की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने पूरे इलाके का मुआयना किया और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए. सरपंच पद के एक सामान्य चुनाव से उपजा यह प्रशासनिक विवाद अब क्षेत्र में कानून और व्यवस्था के लिए बहुत बड़ी परीक्षा बन गया है.
प्रशासन के सामने अब 2 नवंबर को निर्धारित पुनर्मतदान को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने का सबसे बड़ा जिम्मा है. एक तरफ जहां मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पूरा करना है, वहीं दूसरी ओर रात में भड़की हिंसा और ग्रामीणों के भारी रोष को देखते हुए गांव में शांति बनाए रखना जरूरी हो गया है. तनाव के मद्देनजर पुलिस बल लगातार पूरे भावी गांव और आसपास के संवेदनशील इलाकों में गश्त कर कड़ी निगरानी रख रहा है.























