राजस्थान का कोटा शहर इन दिनों पूरी तरह से आस्था, उमंग और दिव्य रोशनी से सराबोर है। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर शहर के हर कोने, गली-मोहल्ले और प्रमुख चौराहों पर विघ्नहर्ता भगवान श्रीगणेश के विभिन्न और अद्भुत रूपों की झांकियां सजी हुई हैं। गणपति बप्पा के दर्शन के लिए कहीं भव्य और चमचमाते झूमरों से सजे पंडाल तैयार किए गए हैं, तो कहीं पारंपरिक और क्लासिक कलाकृतियों के जरिए श्रद्धालुओं का मन मोहा जा रहा है। पूरा कोटा शहर इस समय बप्पा की भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है और हर तरफ केवल जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में बने भव्य दरबारों को देखने के लिए दिन-रात भक्तों का तांता लगा हुआ है।
रामपुरा के नगर सेठ और राजा के दरबार की अद्भुत रौनक
कोटा के रामपुरा इलाके में स्थित नगर सेठ के विशाल पंडाल में की गई अलौकिक सजावट इस समय पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस भव्य पंडाल की छतों पर लटकाए गए विशालकाय और जगमगाते झूमर हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इसके साथ ही मोतियों की लंबी-लंबी लड़ियों की बारीक कारीगरी और ताजे फूलों से की गई सजावट इस पूरे दरबार की सुंदरता में चार चांद लगा रही है। इस दिव्य रोशनी से नहाए पंडाल में विराजे बप्पा की एक झलक पाने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
इसके ठीक पास रामपुरा के राजा के स्वागत के लिए भी एक भव्य पंडाल तैयार किया गया है। बप्पा के आगमन पर पूरा इलाका रंग-बिरंगी लाइटों और शानदार आतिशबाजी से गूंज उठा। इस अद्भुत नजारे को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने के लिए भक्तों की होड़ मची रही। विशेष रूप से शाम के समय जब महाआरती का आयोजन होता है, तो पूरा पंडाल मोबाइल की रोशनी और श्रद्धा के अनूठे मेल से जगमगा उठता है। जय गणेश देवा के जयकारों के बीच होने वाली यह आरती भक्तों को एक अलग ही आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराती है।
अनंतपुरा में शिव-पार्वती रूपी राजा-रानी का आकर्षण
कोटा से झालावाड़ जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित अनंतपुरा में इस बार गणेशोत्सव का एक बेहद खास रूप देखने को मिल रहा है। यहां स्थापित किए गए 'अनंतपुरा के राजा और रानी शिव-पार्वती' की मूर्तियां अपने क्लासिक और पारंपरिक अंदाज से लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। भगवान गणेश और माता पार्वती के इस अनूठे स्वरूप को देखने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले मुसाफिर भी अपनी गाड़ियां रोककर बप्पा के चरणों में शीश नवा रहे हैं। ढलती शाम के साथ ही इस पंडाल में रंग-बिरंगी रोशनी का ऐसा शानदार खेल शुरू होता है कि यहां भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। यह स्थान इस समय भक्ति और उत्सव का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है।
600 साल पुराना खड़े गणेश जी का ऐतिहासिक और अनूठा मंदिर
कोटा की धार्मिक विरासत में खड़े गणेश जी का मंदिर एक बेहद विशिष्ट स्थान रखता है। चंबल नदी के पावन तट के समीप और प्राकृतिक वादियों के बीच बसा यह ऐतिहासिक मंदिर लगभग 600 वर्ष पुराना है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश की प्रतिमा बैठी हुई या शयन मुद्रा में नहीं, बल्कि खड़ी मुद्रा में स्थापित है। पूरे भारतवर्ष में भगवान गणेश का यह स्वरूप अत्यंत दुर्लभ और अनूठा माना जाता है। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु यहां आकर सच्चे मन से बप्पा से मन्नत मांगता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। अपनी इसी धार्मिक मान्यता और अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के कारण इस मंदिर में न केवल गणेशोत्सव के दौरान, बल्कि साल के बारह महीने देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का आगमन होता रहता है।
कैथूनीपोल के दादा गणेश और पुरानी सब्जी मंडी में संत स्वरूप
कोटा के कैथूनीपोल इलाके में स्थित दादा गणेश जी का पंडाल भी अपनी खास पहचान रखता है। यहां हर वर्ष गणेशोत्सव के समय अत्यंत सुंदर और बारीक नक्काशी वाली कलात्मक प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। उत्सव के सभी दिनों में बप्पा का बिल्कुल अलग, अनूठा और मनमोहक श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। इस पंडाल की सजावट और बप्पा की भव्यता श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच लाती है।
इसी तरह, कोटा की पुरानी सब्जी मंडी के प्राचीन गणेश मंदिर के ठीक बाहर सजे पंडाल में इस बार एक अनोखा प्रयोग देखने को मिला है। यहां पूज्य संत प्रेमानंद महाराज जी के स्वरूप से मिलती-जुलती भगवान गणेश की एक बेहद आकर्षक और दिव्य प्रतिमा विराजमान की गई है। फूलों के खूबसूरत और सुगंधित बंगले के बीच सजे इस अलौकिक दरबार में बप्पा के इस नए और मनभावन रूप के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु जुट रहे हैं और मत्था टेककर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।














