राजस्थान में इन दिनों प्रसिद्ध लोक देवता बाबा रामदेव के दर्शन के लिए रामदेवरा मेले की धूम मची हुई है। इस पावन अवसर पर देश के विभिन्न कोनों से लाखों श्रद्धालु, जिन्हें स्थानीय भाषा में जातरू कहा जाता है, सैकड़ों किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर रामदेवरा पहुंच रहे हैं। चिलचिलाती धूप और पथरीले रास्तों पर लगातार चलने के कारण इन श्रद्धालुओं को अत्यधिक शारीरिक कष्ट उठाना पड़ता है। इसी कष्ट को दूर करने और भक्तों की राह आसान बनाने के लिए नागौर जिले के 10 संवेदनशील युवाओं की एक टोली मसीहा बनकर सामने आई है। ये युवा वीर तेजा एंबुलेंस सेवा के माध्यम से राजमार्गों पर अपनी दो एंबुलेंस गाड़ियां दौड़ा रहे हैं। वे रास्ते में दर्द से कराह रहे श्रद्धालुओं को बिल्कुल मुफ्त में प्राथमिक उपचार, जरूरी दवाइयां और मरहम-पट्टी की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि कोई भी जातरू शारीरिक कमजोरी के कारण अपनी आस्था की यात्रा अधूरी न छोड़े।
सड़कों पर श्रद्धालुओं के लिए जीवन रक्षक बनी मोबाइल चिकित्सा सेवा
युवाओं की इस समर्पित टीम द्वारा शुरू किया गया यह जनसेवा अभियान बीते 3 सितंबर से शुरू हुआ है और यह तब तक निरंतर चलता रहेगा जब तक रामदेवरा मेला पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता। इन युवाओं ने अपनी दोनों एंबुलेंस को उन प्रमुख राजमार्गों पर तैनात किया है, जहां से होकर जातरुओं के बड़े-बड़े संघ गुजरते हैं। मुख्य रूप से डीडवाना बाईपास, बीकानेर रोड और बासनी चौराहे जैसे व्यस्त मार्गों पर ये गाड़ियां लगातार गश्त करती हैं। यह टीम एक स्थान पर रुकने के बजाय पूरे मार्ग पर घूमती रहती है ताकि सड़क किनारे बैठे किसी भी थके या घायल यात्री को खोजकर उसकी मदद की जा सके। इसके अलावा, इन्होंने एक बहुत ही व्यावहारिक व्यवस्था की है। यदि मार्ग में किसी भी पदयात्री संघ के संचालक या सेवादार को लगता है कि उनके किसी साथी की तबीयत खराब हो रही है, तो वे सीधे टीम को फोन कर सकते हैं। फोन कॉल आते ही एंबुलेंस तुरंत मौके पर पहुंचती है और जरूरतमंद श्रद्धालु को राहत प्रदान करती है।
पैदल यात्रा के दर्द, सूजन और छालों का मौके पर इलाज
रामदेवरा जाने वाले कई श्रद्धालु प्रतिदिन 15 से 20 किलोमीटर या उससे भी अधिक दूरी तय करते हैं। लगातार इतने लंबे समय तक पैदल चलने का उनके पैरों और शरीर पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। सेवा दल के प्रमुख सदस्य राम चौधरी ने बताया कि उनके पास आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे ज्यादा शिकायत पैरों में गंभीर छालों, पैरों और टखनों की सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव और मोच आने की होती है। कई बार यात्री अत्यधिक थकान के कारण सड़क किनारे बैठ जाते हैं और आगे चलने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे में उनकी एंबुलेंस टीम तुरंत उनके छालों को साफ कर एंटीसेप्टिक लगाती है, पट्टियां बांधती है और दर्द निवारक दवाइयां देती है। इतना ही नहीं, बुजुर्गों और अत्यधिक थके हुए यात्रियों की मांसपेशियों को आराम देने के लिए टीम के सदस्य अपने हाथों से उनकी मालिश भी करते हैं। इलाज मिलने के बाद जब इन बुजुर्गों और परिवारों को दर्द से राहत मिलती है, तो वे इन युवाओं के सिर पर हाथ रखकर दिल से आशीर्वाद देते हैं। युवाओं का कहना है कि यह आत्मिक संतुष्टि ही उनकी इस कठिन सेवा का सबसे बड़ा फल है। अब तक 600 से अधिक जातरू इस निशुल्क चिकित्सा सेवा का लाभ ले चुके हैं और प्रतिदिन लगभग 70 से 80 यात्रियों का उपचार किया जा रहा है।
किराए की गाड़ियों से शुरू हुआ सफर अब दो शानदार एंबुलेंस तक पहुंचा
श्रद्धालुओं की सेवा का यह अनूठा और अनुकरणीय प्रयास कोई अल्पकालिक योजना नहीं है, बल्कि वीर तेजा एंबुलेंस सेवा पिछले तीन वर्षों से लगातार इस पुनीत कार्य को कर रही है। जब तीन साल पहले इस सफर की शुरुआत हुई थी, तब इन युवाओं के पास स्वयं की एंबुलेंस या बड़े संसाधन नहीं थे। उस समय ये युवा अपनी जेब से पैसे मिलाकर किराए के वाहनों के जरिए दवाइयां और चिकित्सा सामग्री ढोते थे और सड़क किनारे घायलों की मदद करते थे। लेकिन श्रद्धालुओं की तकलीफ को दूर करने के उनके दृढ़ संकल्प ने आज इस सेवा को दो सुसज्जित एंबुलेंस गाड़ियों के रूप में बदल दिया है। इस साल भी इस पुनीत यज्ञ में सांवराराम गालवा, विष्णु चौधरी, सुरेंद्र सिरोही, पुखराज, किरताराम, हीरालाल, किशन, कपिल विश्नोई और दीपक जैसे कई अन्य प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी और युवा दिन-रात अपनी निस्वार्थ सेवाएं दे रहे हैं। इस युवा टीम का साफ कहना है कि जब तक रामदेवरा की पवित्र भूमि की ओर श्रद्धालुओं के कदम बढ़ते रहेंगे, तब तक उनकी यह निशुल्क एंबुलेंस सेवा भी सड़कों पर बिना रुके चलती रहेगी।


















