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कोटा में SDRF: 2013 से आपदाओं में जान बचाने वाला कवच, आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित जवानों के साथ हर वक्त मुस्तैदराजस्थान
13 जून 2026, 5:09 pm (45 दिन पहले)· 0

कोटा में SDRF: 2013 से आपदाओं में जान बचाने वाला कवच, आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित जवानों के साथ हर वक्त मुस्तैद

इंस्पेक्टर एकता हाड़ा के अनुसार वर्ष 2013 में गठित राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) बाढ़, भूकंप और भवन ढहने जैसी आपदाओं में त्वरित राहत-बचाव के लिए हर समय तैयार रहती है। मानसून में कोटा संभाग की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहती है।

जब धरती कांपती है, नदियां उफान पर आती हैं या कोई इमारत भरभराकर गिर जाती है, तब सबसे पहले जो हाथ बचाव के लिए आगे बढ़ते हैं, वे राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल यानी SDRF के जवानों के होते हैं। प्राकृतिक हो या मानव जनित — हर तरह की आपदा में लोगों की जान बचाना और उन तक राहत पहुंचाना इस बल की पहचान बन चुका है। विशेष प्रशिक्षण और अत्याधुनिक संसाधनों से लैस इसकी टीमें किसी भी आपात स्थिति का सामना करने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहती हैं।

2013 में हुआ था गठन, मकसद साफ

SDRF की इंस्पेक्टर एकता हाड़ा बताती हैं कि इस बल का गठन वर्ष 2013 में किया गया था। इसके पीछे सोच बिल्कुल स्पष्ट थी — किसी भी प्रकार की आपदा के समय तेज गति से राहत और बचाव कार्य कर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। उनके मुताबिक भूकंप, बाढ़, भवन ढहने और सड़क हादसों जैसी आपात स्थितियों में टीम पल भर में हरकत में आ जाती है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने में जुट जाती है।

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आधुनिक उपकरण और हर चुनौती के लिए तैयार जवान

हाड़ा के अनुसार बल के पास आधुनिक रेस्क्यू उपकरण, जान बचाने वाले संसाधन और पूरी तरह प्रशिक्षित जवानों की टीम मौजूद है। इमारतों के ध्वस्त होने जैसी जटिल घटनाओं से निपटने के लिए जवानों को खास तौर पर तैयार किया गया है। यही वजह है कि किसी भी आपदा की सूचना मिलते ही टीम बेहद कम समय में मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान शुरू कर देती है।

लगातार अभ्यास से धार पर रहती है तैयारी

इंस्पेक्टर हाड़ा ने बताया कि जवानों को समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और नियमित अंतराल पर मॉक ड्रिल व अभ्यास कराए जाते हैं, ताकि सबसे कठिन हालात में भी वे प्रभावी ढंग से काम कर सकें। इस प्रशिक्षण में जल बचाव, खोज एवं बचाव, ऊंचाई वाले इलाकों में रेस्क्यू और आपदा प्रबंधन से जुड़ी कई तकनीकों का बारीकी से अभ्यास कराया जाता है।

मानसून में बढ़ जाती है जिम्मेदारी

बारिश का मौसम आते ही SDRF की भूमिका और अहम हो जाती है। इस दौरान कोटा संभाग की टीम पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहती है। बाढ़ संभावित और प्रभावित इलाकों पर लगातार नजर रखी जाती है और हर आपात स्थिति से निपटने के लिए जरूरी संसाधन पहले से तैयार रखे जाते हैं। जलभराव और डूबने की घटनाओं में फौरन कार्रवाई कर लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना टीम की सबसे बड़ी प्राथमिकता रहती है।

सिर्फ बचाव नहीं, भरोसे का आधार

हाड़ा का कहना है कि SDRF का उद्देश्य केवल राहत और बचाव कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा के समय जनहानि को कम से कम रखना और जरूरतमंदों तक समय पर मदद पहुंचाना भी है। यही कारण है कि संकट की हर घड़ी में यह बल आम लोगों के लिए सुरक्षा और भरोसे की मजबूत दीवार बनकर सामने आता है।

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