राजस्थान अपने विशाल भूभाग और प्रचुर धूप के दम पर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव की ओर कदम बढ़ा रहा है। प्रदेश में औद्योगिक गलियारों, सड़क नेटवर्क, रेलवे और ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर निर्माण कार्य जारी हैं। बिजली उत्पादन से लेकर उसके सुगम वितरण तक पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़ा खाका तैयार किया गया है। इसी योजना के अंतर्गत राज्य के विद्युत पारेषण और वितरण ढांचे से जुड़ी 19 अहम परियोजनाओं पर 98,759 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च की जा रही है। इस बड़े पूंजी निवेश का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में लगातार बढ़ रही बिजली की मांग को समय पर पूरा करना और रिन्यूएबल एनर्जी की निर्बाध आपूर्ति के लिए एक मजबूत तकनीकी ढांचा तैयार करना है।
पश्चिमी रेगिस्तान में 6 गीगावाट के सौर संयंत्र की तैयारी
पश्चिमी राजस्थान का सूखा इलाका अब देश की ऊर्जा सुरक्षा की नई धुरी बन रहा है। बाड़मेर और उसके नजदीकी क्षेत्रों में खाली जमीन की उपलब्धता और साल भर रहने वाली तेज धूप सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सबसे मुफीद माहौल तैयार करती है। इसी क्षमता का लाभ उठाने के लिए राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी जोन (आरईजेड) के चौथे चरण के तहत बाड़मेर कॉम्प्लेक्स में 6 गीगावाट क्षमता का एक विशाल सोलर प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से बड़े पैमाने पर प्रदूषण-मुक्त बिजली का उत्पादन सुनिश्चित होगा। जब इतने बड़े पैमाने पर बिजली पैदा की जाती है, तो उसे सुरक्षित रूप से ग्रिड तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए फतेहगढ़-द्वितीय ट्रांसमिशन सिस्टम जैसी विशेष प्रसारण लाइनों के निर्माण पर तेजी से काम हो रहा है।
ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार से सुलझेगी बिजली आपूर्ति की चुनौती
सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के उत्पादन केंद्रों से बिजली को दूरदराज के उपभोक्ताओं तक पहुंचाना एक जटिल तकनीकी प्रक्रिया है। राजस्थान में सोलर पार्कों की क्षमता जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके समानांतर मजबूत ग्रिड का होना अनिवार्य शर्त है। इसके लिए हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों, नए ग्रिड सब-स्टेशनों और आधुनिक तकनीकी सुविधाओं का जाल बिछाया जा रहा है। पारेषण और वितरण से जुड़ी इन 19 परियोजनाओं में निवेश की जा रही 98,759 करोड़ रुपये की पूंजी इसी तकनीकी खाई को पाटने का काम करेगी। उत्पादन केंद्रों से बिजली का नुकसान रोके बिना उसे राष्ट्रीय व राज्य ग्रिड से जोड़ना इन परियोजनाओं का मुख्य लक्ष्य है।
उद्योगों, शहरों और गांवों को मिलेगी निर्बाध बिजली
ऊर्जा नेटवर्क का यह ढांचागत विस्तार केवल बिजली पैदा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर प्रदेश के आर्थिक विकास पर पड़ेगा। नए ग्रिड और सब-स्टेशन तैयार होने से राजस्थान के बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों, तेजी से फैलते शहरों और सुदूर ग्रामीण इलाकों तक बिना रुकावट के बिजली पहुंचाई जा सकेगी। इससे कल-कारखानों को उत्पादन जारी रखने के लिए स्थिर वोल्टेज और निरंतर पावर सप्लाई मिलेगी, जिससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। साथ ही आम नागरिकों को भीषण गर्मी के दिनों में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज जैसी समस्याओं से राहत मिलने का ठोस आधार तैयार होगा।



















