डेयरी व्यवसाय से जुड़े पशुपालकों के सामने अक्सर यह दुविधा रहती है कि मवेशियों की खुराक में ऐसा क्या शामिल किया जाए जिससे दुग्ध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो सके। इस संदर्भ में पशु विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि अगर सही हरे चारे का चुनाव किया जाए, तो मवेशियों का स्वास्थ्य सुधरने के साथ-साथ दूध की मात्रा में भी उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिलता है। हरे चारे के विकल्पों में नेपियर घास और बरसीम को सबसे ज्यादा गुणकारी माना गया है, जिन्हें पशुपालक अपने मवेशियों के नियमित आहार का हिस्सा बना सकते हैं।
गन्ने की क्रॉस वैरायटी होने से नेपियर घास पसंद करते हैं पशु
पशु विशेषज्ञ योगेंद्र कुमार सिंह के अनुसार, मवेशियों में दुग्ध क्षमता को बनाए रखने और उसमें इजाफा करने के लिए दो प्रमुख तत्वों की दरकार होती है, जिसमें पर्याप्त प्रोटीन और गुणवत्तापूर्ण हरा चारा शामिल है। चारे के रूप में नेपियर घास एक बेहतरीन विकल्प साबित होती है क्योंकि यह गन्ने की क्रॉस वैरायटी है। स्वाद में हल्की मिठास होने की वजह से पशु इसे बड़े चाव से खाते हैं। इसके अतिरिक्त बरसीम का इस्तेमाल भी उत्पादन बढ़ाने में अत्यधिक असरदार पाया गया है। नेपियर और बरसीम जैसे चारे मुख्य रूप से गर्मी के मौसम में बोए जाते हैं। इसके साथ ही, यदि मवेशियों के आहार में दाल की मात्रा शामिल कर प्रोटीन का संतुलन बना दिया जाए, तो दूध उत्पादन में अचानक गिरावट नहीं आती है।
मौसम और नस्लों के अनुसार रखरखाव की जरूरत
योगेंद्र कुमार सिंह ने विदेशी और देशी नस्लों के शारीरिक ढांचे और मौसम सहन करने की क्षमता पर भी विस्तार से जानकारी दी। देश में पाली जाने वाली हॉलस्टीन फ्रिसियन यानी एचएफ नस्ल की गायों को मौसम के प्रति विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। एचएफ गायों की चमड़ी हल्की होती है, जिसके चलते अत्यधिक गर्मी पड़ने पर वे तनाव में आ जाती हैं। अगर उचित छाया और ठंडक की व्यवस्था न की जाए, तो गर्मी के प्रभाव से इनका दूध उत्पादन काफी कम हो जाता है। इसके विपरीत, देशी नस्लों और गिरलैंडो जैसी क्रॉस किस्मों की चमड़ी मोटी होती है, जिससे उनमें तेज तापमान सहने की बेहतर क्षमता मौजूद रहती है।
दूध की गुणवत्ता और फैट का अंतर
दोनों नस्लों के दूध की गुणवत्ता और वसा की मात्रा में भी बड़ा फर्क देखने को मिलता है। तुलनात्मक रूप से यदि एचएफ नस्ल में 30 प्रतिशत फैट मिलता है, तो वहीं देशी नस्लों के दूध में लगभग 70 से 75 प्रतिशत फैट दर्ज किया जाता है। हालांकि देशी गायों का दुग्ध उत्पादन अपेक्षाकृत कम हो सकता है, लेकिन गुणवत्ता के मामले में यह काफी बेहतर होता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि बरसीम और नेपियर के साथ-साथ पशुओं के संपूर्ण आहार में मक्का, बाजरा और अन्य मोटे अनाज भी शामिल किए जाने चाहिए ताकि मवेशियों को हर जरूरी पोषक तत्व मिल सके।















