स्विट्जरलैंड में उपभोक्ता कीमतों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने अपनी मौद्रिक नीतियों में जरूरी फेरबदल के स्पष्ट संकेत दिए हैं। स्विस नेशनल बैंक के चेयरमैन मार्टिन श्लेजेल ने बुधवार को कहा कि अक्टूबर महीने के मुद्रास्फीति आंकड़े उम्मीद से अधिक रहे हैं, जिससे मूल्य दबाव में तेजी दर्ज की गई है। उन्होंने जोर देकर स्पष्ट किया कि यदि देश के भीतर मूल्य स्थिरता के लक्ष्य को किसी भी तरह का खतरा पैदा होता है, तो केंद्रीय बैंक अपनी मौजूदा नीति में संशोधन करने से बिल्कुल नहीं हिचकिचाएगा।
अक्टूबर के ताजा आंकड़ों में स्विट्जरलैंड की महंगाई दर में तेजी देखी गई है। मार्टिन श्लेजेल के अनुसार, अब तक अर्थव्यवस्था में कीमतों के बढ़ने के बड़े दूसरे दौर के प्रभाव देखने को नहीं मिले हैं, लेकिन आने वाले समय में ऐसी संभावनाओं से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से केंद्रीय बैंक समग्र आर्थिक हालात पर बेहद बारीक नजर रख रहा है, विशेष रूप से दूसरे दौर के उन प्रभावों पर जो बाजार में मजदूरी और अन्य लागतों को बढ़ाकर महंगाई को टिकाऊ बना सकते हैं।
मूल्य स्थिरता का दायरा और केंद्रीय बैंक का कानूनी जनादेश
स्विस नेशनल बैंक देश का केंद्रीय बैंक है, जो एक स्वतंत्र संस्था के रूप में काम करता है। बैंक का मुख्य कानूनी दायरा मध्यम और दीर्घावधि में देश के भीतर मूल्य स्थिरता बनाए रखना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक अर्थव्यवस्था में अनुकूल मौद्रिक स्थितियों को सुनिश्चित करता है। ये स्थितियां मुख्य रूप से नीतिगत ब्याज दरों के स्तर और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों से तय होती हैं। केंद्रीय बैंक की स्थापित परिभाषा के अनुसार, मूल्य स्थिरता का अर्थ है कि स्विस उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वार्षिक वृद्धि 2 प्रतिशत से कम रहनी चाहिए।
नीतिगत ब्याज दरों का उचित स्तर निर्धारित करने का पूरा अधिकार स्विस नेशनल बैंक के गवर्निंग बोर्ड के पास होता है। बोर्ड अपने मूल्य स्थिरता के लक्ष्य के आधार पर ही कोई भी निर्णय लेता है। जब भी वास्तविक मुद्रास्फीति निर्धारित लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है या निकट भविष्य में लक्ष्य से ऊपर जाने का अनुमान होता है, तब गवर्निंग बोर्ड ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके अनियंत्रित मूल्य वृद्धि पर लगाम लगाने का प्रयास करता है।
मुद्रा बाजार पर ब्याज दरों और विनिमय दर का असर
केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों में बदलाव का सीधा असर राष्ट्रीय मुद्रा स्विस फ्रैंक पर पड़ता है। ऊंची ब्याज दरें आम तौर पर स्विस फ्रैंक के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इनसे बॉन्ड और जमा राशियों पर यील्ड में सुधार होता है। उच्च प्रतिफल मिलने से स्विट्जरलैंड अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए एक आकर्षक निवेश स्थल बन जाता है। इसके विपरीत, जब केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती करता है, तो कम यील्ड की वजह से स्विस फ्रैंक की विनिमय दर में नरमी आने लगती है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए स्विस नेशनल बैंक नियमित रूप से हस्तक्षेप भी करता रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य स्विस फ्रैंक को अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले बहुत अधिक मजबूत होने से रोकना है। बहुत ज्यादा मजबूत स्विस फ्रैंक देश के विशाल और मजबूत निर्यात क्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचाता है। इसी स्थिति से निपटने के लिए वर्ष 2011 से 2015 के बीच बैंक ने यूरो के मुकाबले स्विस फ्रैंक की बढ़त को सीमित करने के लिए एक निश्चित विनिमय दर पेग लागू किया था।
मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप के लिए केंद्रीय बैंक अपने विशाल विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करता है। इसके तहत बैंक अक्सर खुले बाजार से अमेरिकी डॉलर या यूरो जैसी विदेशी मुद्राएं खरीदता है। हालांकि, जब ऊर्जा की ऊंची कीमतों के कारण देश में तीव्र मुद्रास्फीति का दौर आता है, तो स्विस नेशनल बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने से बचता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि मजबूत स्विस फ्रैंक की बदौलत स्विट्जरलैंड के लिए ईंधन और ऊर्जा का आयात सस्ता हो जाता है, जिससे स्विस परिवारों और स्थानीय व्यवसायों पर पड़ने वाला कीमतों का झटका काफी हद तक कम हो जाता है।
तिमाही मौद्रिक समीक्षा और वैश्विक वित्तीय बाजारों की स्थिति
स्विस नेशनल बैंक अपनी मौद्रिक नीति का समग्र मूल्यांकन करने के लिए साल में चार बार बैठक करता है। ये तिमाही समीक्षा बैठकें मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में आयोजित की जाती हैं। प्रत्येक बैठक के समापन पर गवर्निंग बोर्ड मौद्रिक नीति से जुड़ा नया फैसला जारी करता है और साथ ही मध्यम अवधि के लिए मुद्रास्फीति का अपना आधिकारिक पूर्वानुमान भी सार्वजनिक करता है।
इस बीच, व्यापक अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अन्य मुद्राओं और परिसंपत्तियों में भी अहम हलचल देखी गई है। एशियाई कारोबारी सत्र में गुरुवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर की जोड़ी 0.7000 के स्तर से ऊपर स्थिर बनी रही। इस जोड़ी ने पिछले दिन तीन हफ्ते के निचले स्तर से उबरते हुए अपनी बढ़त को बरकरार रखा, क्योंकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत और ईरान के साथ कूटनीतिक उम्मीदों ने अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, शुक्रवार को जारी होने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट से पहले तेजी के खरीदार सतर्क दिखे।
दूसरी तरफ, डॉलर-येन जोड़ी में अमेरिकी चुनावी नतीजों के बाद 0.20 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। यह जोड़ी 50-दिवसीय और 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के बीच सीमित दायरे में बनी रही, जो क्रमशः 157.39 और 158.62 पर स्थित हैं, और यह 158.41 के स्तर पर कारोबार करती रही। वहीं कीमती धातुओं में सोने ने लगातार दो सत्रों की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए बुधवार को 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर को फिर से हासिल कर लिया। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने सोने की इस रिकवरी को सीधा समर्थन दिया।


















