श्रीगंगानगर जिले में पांच दिवसीय महापर्व दीपावली का उत्साह अपने चरम पर पहुंच चुका है। जिला मुख्यालय से लेकर दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों तक हर तरफ उत्सव का माहौल साफ नजर आ रहा है। बाजारों में भव्य सजावट और रंग-बिरंगी रोशनी के बीच लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। पर्व की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे नागरिक सुबह से लेकर देर रात तक बाजारों में खरीदारी करते दिखाई दे रहे हैं, जिससे स्थानीय कारोबारियों में खासा उत्साह है।
पारंपरिक संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा
आधुनिकता के इस दौर में भी श्रीगंगानगर के निवासियों का पारंपरिक संस्कृति के प्रति अगाध प्रेम देखने को मिल रहा है। शहर में कुम्हारों के ठिकानों और अस्थायी दुकानों पर मिट्टी के दीये खरीदने के लिए लोगों का तांता लगा हुआ है। लोग चीनी या अन्य कृत्रिम प्रकाश स्रोतों से दूरी बनाते हुए स्वदेशी और स्थानीय हस्तशिल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं। कुम्हारों द्वारा तैयार किए गए कलात्मक दीये इस बार हर घर के आंगन को रोशन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, जिससे पारंपरिक कामगारों के घरों में भी इस बार खुशियों भरी दिवाली मन रही है।
हर सेक्टर में रिकॉर्ड तोड़ कारोबार
दीपावली के इस पावन अवसर पर केवल पूजन सामग्री तक ही खरीदारी सीमित नहीं है, बल्कि बाजार के प्रत्येक हिस्से में जबरदस्त बूम देखा जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के शोरूम, ऑटोमोबाइल सेक्टर, बर्तन बाजार और कपड़ों की दुकानों पर ग्राहकों का सैलाब उमड़ा हुआ है। शुभ मुहूर्त में नए सामान घर लाने की परंपरा के चलते लोगों ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ-साथ टेलीविजन, फ्रिज और वाशिंग मशीन जैसे घरेलू उपकरणों की जमकर खरीदारी की है। परिधान बाजारों में भी नए कपड़ों की खरीद के लिए खरीदारों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।
मिठाइयों की मिठास और व्यापारिक उम्मीदें
मिठाइयों के बिना दीपोत्सव का आनंद अधूरा माना जाता है, और यही कारण है कि शहर की प्रसिद्ध हलवाई की दुकानों पर भी ग्राहकों की भारी भीड़ है। लोग अपने मित्रों और परिजनों को भेजने के लिए पारंपरिक मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी कर रहे हैं। स्थानीय व्यापार संगठनों के अनुसार इस बार का त्योहारी सीजन पिछले कई वर्षों के सभी व्यावसायिक रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिली है।



















