दीवाली के पटाखों से अपनी कार और बाइक को यूं बचाएं, इन जरूरी बातों का रखें ध्यानसोनिया गांधी की किताब में अरहर दाल का जिक्र, घर पर ऐसे तैयार करें देसी घी और लहसुन के तड़के वाली स्वादिष्ट रेसिपीघर की शोभा बढ़ाने वाला स्नेक प्लांट, रात में भी देता है ऑक्सीजन और क्या इससे आते हैं सांप?धनुष ने साई पल्लवी की अदाकारी पर लुटाया प्यार, फिल्म रामायण में सीता के रोल को बताया एकदम सहीन्यूजीलैंड में गुरनूर बरार का शानदार प्रदर्शन, 2027 वनडे विश्व कप के लिए मजबूत की दावेदारीअयोध्या में दीपोत्सव पर जगमगाए लाखों दीये, उत्तर प्रदेश को लेकर सामने आया बड़ा बयानशाम की चाय के साथ झटपट बनाएं स्वादिष्ट ब्रेड, घी, गुड़ और शहद का यह हेल्दी स्नैकरामायण में सीता के युद्ध वाले सीन पर बोलीं दीपिका चिखलिया, कहा- मुझे ऐसे दृश्य याद नहींअमेज़न के एलेक्सा फॉर शॉपिंग में आया टेक्स्ट सपोर्ट, बिना बोले भी होगी खरीदारीफैंसी गॉगल्स बिजनेस से हर दिन होगी दमदार कमाई, कम निवेश में ऐसे शुरू करें दुकान
भीलवाड़ा में लगता है अनोखा बाजार, जहां सिर्फ सात दिन के लिए बिकती है वाहनों की खास सजावट सामग्रीराजस्थान
7 नव॰ 2026, 7:28 pm (4 घंटे पहले)· 0

भीलवाड़ा में लगता है अनोखा बाजार, जहां सिर्फ सात दिन के लिए बिकती है वाहनों की खास सजावट सामग्री

भीलवाड़ा में दिवाली के सात दिन पहले एक विशेष बाजार सजता है, जहां किसान और ग्रामीण अपने ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और अन्य वाहनों को सजाने के लिए हस्तनिर्मित सामान खरीदते हैं।

भीलवाड़ा में दिवाली के पावन पर्व पर एक अनोखा और विशेष बाजार आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जो साल भर में केवल सात दिनों के लिए संचालित होता है। इस विशेष बाजार में पारंपरिक खरीदारी के बजाय ग्रामीण इलाकों और खेती किसानी से जुड़े लोग पहुंचते हैं, जो अपने कृषि उपकरणों और वाहनों को सजाने के लिए सामान खरीदने आते हैं। शहर के अन्य बाजारों में जहां आधुनिक उपभोक्ता वस्तुओं की धूम रहती है, वहीं इस अस्थाई बाजार का पूरा फोकस किसानों और ग्रामीण संस्कृति पर केंद्रित होता है।

हाथों से तैयार होती हैं सजावट की वस्तुएं

ट्रैफिक थाने के निकट अस्थाई दुकानें सजाने वाले व्यापारी फारूक बताते हैं कि उनका परिवार पीढ़ियों से वाहनों की सजावट का काम संभालता आ रहा है। वे हर साल केवल दिवाली के इस सात दिवसीय अवसर पर भीलवाड़ा आते हैं और अपनी दुकानें लगाते हैं। इस बाजार में कुल 20 से 25 दुकानें सजती हैं, जहां ट्रैक्टर, जेसीबी, ट्रक, बैलगाड़ी और मोटरसाइकिल को सजाने के लिए रंग-बिरंगे और आकर्षक सामान मिलते हैं। यहां बिकने वाली अधिकांश एसेसरीज कारीगरों द्वारा खुद अपने हाथों से तैयार की जाती हैं, जबकि कुछ खास सामान बाहर से भी मंगवाया जाता है।

ये भी पढ़ें

साधनों की पूजा और ग्रामीण आस्था

तिलस्वां गांव से खरीदारी करने आए किसान गोविंद अहीर का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में साधनों का विशेष महत्व होता है। जिस प्रकार लोग दिवाली के खास दिन पर खुद नए वस्त्र पहनते हैं, उसी तरह ग्रामीण अपने काम आने वाले संसाधनों जैसे ट्रैक्टर, बैलगाड़ी, ट्रक और जेसीबी को भी सजाते-संवारते हैं। किसानों की आजीविका और आमदनी इन्हीं वाहनों और उपकरणों के जरिए चलती है, जिससे उनका घर परिवार संचालित होता है। दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के बाद इन सभी संसाधनों की पूजा करने की पुरानी परंपरा है, जिसके चलते ग्रामीण इस अनूठे बाजार से खरीदारी करने पहुंचते हैं।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा का यह विशेष बाजार साल में कितने दिन लगता है?
यह बाजार साल में केवल सात दिन केवल दिवाली के अवसर पर लगता है।
इस बाजार में मुख्य रूप से कौन लोग खरीदारी करने आते हैं?
इस बाजार में मुख्य रूप से ग्रामीण और किसान वर्ग के लोग खरीदारी करने पहुंचते हैं।
व्यापारी फारूक कहां पर अपनी दुकान लगाते हैं?
व्यापारी फारूक ट्रैफिक थाने के पास हर साल अस्थाई दुकानें लगाते हैं।
तिलस्वां गांव के किस निवासी ने बाजार का दौरा किया?
तिलस्वां गांव के निवासी गोविंद अहीर ने इस बाजार से खरीदारी की।
इस बाजार में किन वाहनों के सजावट का सामान मिलता है?
यहां बैलगाड़ी, ट्रक, जेसीबी, ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल को सजाने के लिए एसेसरीज मिलती हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp