राजस्थान के नागौर जिले में किसानों की गाढ़ी कमाई और सरकारी योजनाओं के पैसों पर डाका डालने वाले एक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। पांचौड़ी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह के 4 प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से किसानों के नाम पर तैयार किए गए फर्जी बीमा दस्तावेज, कूटरचित फॉर्म, 3 लाख रुपये की नकद राशि और वारदात में इस्तेमाल की जा रही एक स्कॉर्पियो गाड़ी भी जब्त की है। यह गिरोह सीधे-सादे किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड हासिल कर उनके नाम पर फर्जी क्लेम उठा रहा था।
किस तरह दिया जा रहा था ठगी का अंजाम
पुलिस पड़ताल में इस शातिर गिरोह की पूरी कार्यप्रणाली सामने आई है। आरोपी सबसे पहले ग्रामीण इलाकों के सीधे-सादे किसानों के नाम, पते, आधार कार्ड और जमीन की जमाबंदी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाते थे। इसके बाद किसान को बिना भनक लगे क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के माध्यम से उनकी जमीनों पर फसल बीमा का आवेदन कर दिया जाता था। इस प्रक्रिया में गिरोह के सदस्य किसानों के बैंक खातों की जगह अपने नेटवर्क से जुड़े फर्जी या अन्य लोगों के बैंक खातों का ब्योरा दर्ज करते थे। जैसे ही बीमा कंपनी की तरफ से क्लेम की राशि स्वीकृत होती थी, वह पैसा सीधे गिरोह के सदस्यों के खातों में ट्रांसफर हो जाता था, जिसे आरोपी तुरंत निकाल कर आपस में बांट लेते थे।
4 लाख 70 हजार रुपये के फर्जीवाड़े से खुला राज
इस पूरे घोटाले का खुलासा दुजासर गांव के रहने वाले राजेश (पुत्र रामलाल जाट) की शिकायत के बाद हुआ। राजेश ने 13 अगस्त को पांचौड़ी पुलिस थाने में एक औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। परिवादी राजेश ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी सुमित्रा के नाम पर दर्ज कृषि भूमि का किसी अज्ञात व्यक्ति ने क्रॉप इंश्योरेंस ऐप के जरिए फर्जी तरीके से फसल बीमा करवा लिया है। जब राजेश ने इस मामले की गहराई से जानकारी जुटाई तो पता चला कि बीमा आवेदन में उनकी पत्नी के दस्तावेजों और बैंक विवरणों का गलत इस्तेमाल किया गया है। आरोपियों ने फर्जी क्लेम तैयार कर 4 लाख 70 हजार 168 रुपये की भारी-भरकम राशि हड़प ली थी। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
पुलिस की गिरफ्त में आए 4 शातिर आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए नागौर एसपी आशा राम चौधरी के दिशा-निर्देशन में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने साक्ष्यों और तकनीकी विवरणों का विश्लेषण करते हुए गिरोह के 4 सदस्यों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है
- सियाराम लोयल: पुत्र परसाराम जाट
- रविन्द्र: पुत्र श्रवणराम जाट
- तरुण लोयल: पुत्र परसाराम जाट
- सुखवीर: पुत्र ताजूराम जाट
नागौर एसपी आशा राम चौधरी ने बताया कि आरोपियों के पास से बरामद दस्तावेजों की सघन जांच की जा रही है। जब्त किए गए 3 लाख रुपये नकद और स्कॉर्पियो कार के अलावा पुलिस को कई अन्य जमीनों के कूटरचित फॉर्म भी मिले हैं, जिनसे इस गिरोह के तार और भी कई मामलों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
10 से 12 अन्य संदिग्धों पर पुलिस की नजर
एसपी आशा राम चौधरी ने खुलासा किया कि इस फर्जीवाड़े में केवल यही 4 लोग शामिल नहीं हैं, बल्कि एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है। शुरुआती जांच में करीब 10 से 12 अन्य लोगों की संदिग्ध भूमिका सामने आई है। इसमें सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर काम करने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार स्टाम्प वेंडर, नोटरी, बीमा कंपनी के तहसील कॉर्डिनेटर, जिला कॉर्डिनेटर और स्थानीय एजेंटों की मिलीभगत की गहनता से पड़ताल की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन प्रशासनिक और संस्थागत संपर्कों के बिना इतने बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार करना और क्लेम पास कराना संभव नहीं था।
पुलिस उपाधीक्षक की देखरेख में चल रही जांच
इस पूरे मामले की तफ्तीश पुलिस उपाधीक्षक जुगाराम और पांचौड़ी थाना अधिकारी के सुपरविजन में की गई। पुलिस टीम ने गहन छानबीन और कागजी सबूतों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रैकिंग कर उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पांचौड़ी पुलिस थाने में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस हिरासत में आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है, जिससे नागौर और आसपास के इलाकों में फसल बीमा के नाम पर हुई अन्य बड़ी ठगी की घटनाओं का पर्दाफाश होने की पूरी संभावना है।





















