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100 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का मुंबई पुलिस ने किया पर्दाफाश, डोंगरी से 6 आरोपी गिरफ्तारमहाराष्ट्र
21 अग॰ 2026, 7:26 am (3 घंटे पहले)· 1

100 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का मुंबई पुलिस ने किया पर्दाफाश, डोंगरी से 6 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई की डोंगरी पुलिस ने सट्टेबाजी और ऑनलाइन कैसीनो धोखाधड़ी के लिए म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

महाराष्ट्र में मुंबई पुलिस की डोंगरी इकाई ने ऑनलाइन सट्टेबाजी, कैसीनो और अवैध गेमिंग ऐप्स के जरिए की जाने वाली ठगी के लिए वित्तीय ढांचा तैयार करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की विशेष साइबर टीम ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए 6 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, जबकि मामले में संलिप्त 5 अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सम्भावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। शुरुआती पुलिस जांच में करीब 25 करोड़ रुपये की सीधी साइबर धोखाधड़ी की बात उजागर हुई है। इसके साथ ही गिरोह से जुड़े जब्त किए गए 110 खातों के वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण में 100 करोड़ रुपये से भी अधिक के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह सिंडिकेट देश के अलग-अलग हिस्सों से ठगी गई अवैध रकम को ठिकाने लगाने का बहुत बड़ा ढांचा चला रहा था।

म्यूल बैंक अकाउंट का तंत्र और अपराधियों का नया तरीका

आधुनिक दौर के डिजिटल वित्तीय अपराधों में म्यूल बैंक अकाउंट एक ऐसे किराए के खाते की तरह कार्य करता है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य धोखाधड़ी से अर्जित अवैध धन को विभिन्न परतों में घुमाना, जमा करना अथवा तुरंत निकाल लेना होता है। साइबर ठग स्वयं की वास्तविक पहचान छुपाने और जांच एजेंसियों की पकड़ से बचने की मंशा से अपने निजी खातों के प्रयोग से बचते हैं। इसके स्थान पर वे आम नागरिकों और वित्तीय रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इस गिरोह का तरीका यह था कि वे जरूरतमंद व्यक्तियों को 5 हजार से 10 हजार रुपये के नकद लाभ या कमीशन का प्रलोभन देकर उनके नाम पर नए बैंक खाते खुलवाते थे या उनके पूर्व में मौजूद चालू और बचत खातों का अधिग्रहण कर लेते थे।

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एक बार खाता खुल जाने के उपरांत गिरोह के सदस्य खाताधारक से उसकी मूल पासबुक, एक्टिव डेबिट कार्ड, चेकबुक, पंजीकृत SIM कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी तमाम गोपनीय जानकारियां अपने पूर्ण नियंत्रण में ले लेते थे। इन खातों का मुख्य उपयोग ऑनलाइन कैसीनो प्लेटफॉर्म, अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी ऐप्स और फर्जी गेमिंग साइट्स के माध्यम से जुटाई गई अवैध राशि की लॉन्ड्रिंग और डिजिटल ट्रांसफर के लिए किया जाता था। इस प्रक्रिया से पैसे के मुख्य स्रोत और अंतिम लाभार्थी के बीच की कड़ियां उलझ जाती थीं, जिससे कानूनी एजेंसियों के लिए असली अपराधियों तक पहुंचना अत्यंत कठिन हो जाता था।

तकनीकी इनपुट और डोंगरी पुलिस की रणनीतिक छापेमारी

इस पूरे गिरोह की गतिविधियों का खुलासा तब हुआ जब डोंगरी पुलिस स्टेशन के साइबर दस्ते को नेटवर्क के संदेहास्पद लेन-देन के संबंध में अत्यंत गोपनीय और सटीक सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम ने डिजिटल सबूतों का बारीकी से विश्लेषण शुरू किया और संबंधित बैंक खातों की वित्तीय आवाजाही पर नजर रखनी शुरू कर दी। तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस ने सैंडहर्स्ट रोड रेलवे स्टेशन, डॉ. महेश्वरी रोड और डोंगरी क्षेत्र के आसपास रणनीतिक जाल बिछाया और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को धर दबोचा।

गिरफ्तार किए गए 6 आरोपियों में मध्य प्रदेश के रहने वाले तीन मुख्य संदिग्धों की पहचान निखिल कमल कुमार जयसवानी (उम्र 32 वर्ष), राहुल श्यामलाल परवानी (उम्र 22 वर्ष) और जय बिहारीलाल तीरपाठी (उम्र 26 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में कुल 11 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें से 6 पुलिस हिरासत में हैं और शेष 5 फरार आरोपियों की तलाश जारी है। इसके अतिरिक्त, इस नेटवर्क की गतिविधियों में संदिग्ध भूमिका के चलते तीन महिलाओं को भी जांच में शामिल होने के लिए कानूनी नोटिस जारी किए गए हैं।

50 लाख रुपये का सामान और डिजिटल सामग्री जब्त

छापेमारी के दौरान डोंगरी पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में बैंकिंग उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनकी कुल अनुमानित बाजार कीमत लगभग 50 लाख रुपये आंकी गई है। जब्त किए गए सामान में 44 बैंक पासबुक, 70 एक्टिव डेबिट कार्ड, 36 रजिस्टर्ड SIM कार्ड, 23 स्मार्टफोन, 3 लैपटॉप, 1 टैबलेट, 12 बैंक किट और अपराध में इस्तेमाल की गई एक कार शामिल है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से गिरोह के अंतर्राष्ट्रीय और अंतरराज्यीय संबंधों का खुलासा हो सकता है।

पुलिस की वित्तीय जांच शाखा ने इस गिरोह से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े कुल 110 बैंक खातों को चिन्हित किया है। इनमें से प्राथमिक चरण में 17 खातों का विस्तृत आधिकारिक डेटा संबंधित वित्तीय संस्थानों से प्राप्त कर लिया गया है। इन 17 खातों के पिछले डेढ़ से दो महीने के ऑडिट से पता चला कि इस छोटी सी अवधि में ही 25 करोड़ 45 लाख रुपये का भारी-भरकम लेन-देन किया गया था। देशभर के साइबर क्राइम पोर्टल का मिलान करने पर इन खातों का संबंध भारत के विभिन्न राज्यों में दर्ज 38 से अधिक साइबर अपराध मामलों और आधिकारिक शिकायतों से पाया गया है।

देशव्यापी नेटवर्क और कई राज्यों तक फैली कड़ियां

डोंगरी पुलिस द्वारा की गई गहन पूछताछ और नेटवर्क ट्रैकिंग से यह स्पष्ट हुआ है कि यह सिंडिकेट केवल मुंबई के स्थानीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं था। मुंबई महानगर के भीतर डोंगरी, गोवंडी और मानखुर्द जैसे क्षेत्रों के अलावा नवी मुंबई के बेलापुर, पनवेल और उलवे तक इसके तार फैले हुए थे। इसके साथ ही महाराष्ट्र के उस्मानाबाद जिले में भी इस गिरोह के सक्रिय सदस्यों की मौजूदगी पाई गई है।

जांच अधिकारियों ने पाया कि इस नेटवर्क से जुड़े म्यूल खातों का उपयोग केवल महाराष्ट्र में ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में हुए साइबर अपराधों का पैसा घुमाने के लिए भी किया जा रहा था। इन खातों के खिलाफ कर्नाटका, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरला, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू एवं कश्मीर और पश्चिम बंगाल में शिकायतें दर्ज पाई गई हैं। यह आंकड़ा साबित करता है कि यह अंतरराज्यीय सिंडिकेट पूरे देश में साइबर ठगी की शिकार बनाई गई जनता के पैसे को सफेद करने का समानांतर नेटवर्क चला रहा था।

कानूनी कार्रवाई, अगला जांच चरण और जन जागरूकता

फिलहाल डोंगरी पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस हिरासत में आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है। जांच अधिकारियों का मुख्य ध्यान अब उन मास्टरमाइंड्स और मुख्य साइबर अपराधियों की पहचान करने पर केंद्रित है, जिन्हें ये म्यूल खाते उपलब्ध कराए जाते थे। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि खातों से निकाली गई ठगी की रकम का अंतिम इस्तेमाल किन संपत्तियों को खरीदने या किन अवैध धंधों में करने के लिए किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डोंगरी पुलिस ने आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है। पुलिस ने स्पष्ट शब्दों में अपील की है कि किसी भी अनजान या जान-पहचान के व्यक्ति के बहकावे में आकर पैसे के लालच में अपना बैंक खाता, पासबुक, डेबिट कार्ड, SIM कार्ड या मोबाइल किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें। इसके अलावा OTP, PIN और इंटरनेट बैंकिंग के क्रेडेंशियल कभी किसी से साझा न करें। यदि किसी नागरिक को अपने बैंक खाते में किसी भी प्रकार का अनधिकृत या संदिग्ध लेन-देन नजर आता है, तो वे तुरंत अपने बैंक और स्थानीय पुलिस को सूचित करें। पुलिस के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे और गिरफ्तारियां होना तय माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

म्यूल बैंक अकाउंट क्या होता है?
म्यूल बैंक अकाउंट ऐसा खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम जमा करने, ट्रांसफर करने या निकालने के लिए करते हैं ताकि वे अपनी असली पहचान छुपा सकें।
मुंबई पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
डोंगरी पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 5 अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है और 3 महिलाओं को नोटिस दिया गया है।
इस गिरोह के पास से क्या-क्या सामान बरामद हुआ है?
पुलिस ने करीब 50 लाख रुपये मूल्य का सामान जब्त किया है, जिसमें 44 पासबुक, 70 डेबिट कार्ड, 36 SIM कार्ड, 23 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 1 टैबलेट, 12 बैंक किट और 1 कार शामिल हैं।
ठग लोगों को म्यूल अकाउंट खोलने के लिए कैसे फुसलाते थे?
आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर या जरूरतमंद लोगों को 5 से 10 हजार रुपये का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे और फिर पासबुक, चेकबुक व डेबिट कार्ड अपने कब्जे में ले लेते थे।
इस नेटवर्क का दायरा किन-किन राज्यों तक फैला हुआ है?
इस नेटवर्क का दायरा महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है।
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