राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू क्षेत्र में स्थित रामपुरा-कंवरपुरा गांव का प्राथमिक विद्यालय इस समय भारी विवाद और राजनीतिक घमासान का केंद्र बन गया है। वर्षों से जर्जर हालत में पड़े सरकारी स्कूल के भवन और बच्चों की पढ़ाई की बदहाल व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (सीजेपी) के कार्यकर्ताओं का स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया। ग्रामीणों ने कार्यकर्ताओं को परिसर से वापस जाने को कहा और उनके खिलाफ धरने पर बैठ गए। दूसरी तरफ, सीजेपी प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने दावा किया कि स्कूल की बदहाली उजागर करने पहुंची उनकी टीम के सदस्यों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने हाथापाई और मारपीट की। हालांकि, प्रशासनिक या पुलिस स्तर पर इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
तबेले जैसी जगह में पढ़ने को मजबूर बच्चे और भवन का इतिहास
गांव के बुजुर्गों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस सरकारी प्राथमिक विद्यालय का निर्माण वर्ष 1999 में हुआ था। स्कूल के लिए जमीन गांव के ही एक परिवार के दादाजी ने बच्चों के बेहतर भविष्य की खातिर दान में दी थी। हालांकि, निर्माण के बाद से पिछले 27 सालों में भवन की कोई सुध नहीं ली गई और न ही इसकी मरम्मत कराई गई। समय के साथ इमारत इतनी खस्ताहाल हो गई कि उसमें कक्षाएं चलाना बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो गया। वर्तमान में स्कूल भवन बंद है और बच्चे एक अन्य बड़े परिसर में ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराए गए दो कमरों में पढ़ने को मजबूर हैं। सीजेपी से जुड़े आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि स्कूल कई सालों से भैंसों के तबेले जैसी जगह में चल रहा है। इस अस्थाई व्यवस्था के तहत महज दो शिक्षक लगभग 20 से 30 बच्चों को पढ़ा रहे हैं, जिससे बच्चों का पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
बजट के आश्वासन के बाद भी नहीं शुरू हुआ निर्माण कार्य
स्कूल की जर्जर हालत को लेकर ग्रामीणों में शासन और प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक डॉ. कैलाश वर्मा ने स्कूल भवन के पुनर्निर्माण के लिए बजट स्वीकृत कराने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद धरातल पर अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। गांव के लोगों का तर्क है कि जब ग्रामीणों ने अपनी पुश्तैनी जमीन बच्चों की शिक्षा के लिए दी थी, तो सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जल्द से जल्द नई इमारत का निर्माण पूरा कराना चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्माण कार्य जल्द शुरू नहीं कराया, तो वे आपस में चंदा और सहयोग जुटाकर स्वयं स्कूल भवन तैयार करेंगे।
सीजेपी के दौरे पर ग्रामीणों की नाराजगी और राजनीतिक घमासान
सीजेपी कार्यकर्ताओं के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों के भड़कने का मुख्य कारण मामले का राजनीतिकरण बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की इमारत जर्जर होना एक वास्तविक समस्या है, लेकिन बाहरी संगठनों को इस मुद्दे का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए नहीं करने दिया जाएगा। गांववालों का मानना है कि अपनी मांगों को उठाने का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे गांव के सामाजिक सौहार्द और माहौल पर कोई बुरा असर न पड़े। कार्यकर्ताओं के आगमन के बाद गांव में तनाव बढ़ गया और ग्रामीण धरने पर बैठ गए।
पोलिंग बूथ बदलने पर भी उठे सवाल और प्रशासनिक स्थिति
रामपुरा-कंवरपुरा के ग्रामीणों ने केवल स्कूल की समस्या ही नहीं उठाई, बल्कि गांव के मतदान केंद्र (पोलिंग बूथ) को स्थानांतरित किए जाने पर भी कड़ा ऐतराज जताया है। निवासियों के अनुसार, पहले मतदान केंद्र गांव के भीतर ही स्थित था, लेकिन हाल ही में इसे दूसरी जगह भेज दिया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पोलिंग बूथ को वापस गांव में ही स्थापित किया जाए। फिलहाल गांव में जर्जर स्कूल भवन, निर्माण में देरी, पोलिंग बूथ का मुद्दा और सीजेपी बनाम भाजपा के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप से माहौल गरमाया हुआ है। मामले में मारपीट की शिकायतों पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन के आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।



















